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Kasganj News: जायद में इंटरक्रॉपिंग विधि से खेती कर कमाएं दोहरा लाभ
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फोटो25मोहनपुरा क्षेत्र में मक्का की फसल के साथ बोई गई दलहन की फसल। स्रोत: कृषि विज्ञान केंद
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मोहनपुरा। किसान परंपरागत खेती के बजाय नवीन तकनीक और विधियों को अपनाकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। जायद के सीजन में मक्का की फसल को किसान प्रमुखता से करते हैं।
कृषि विज्ञान विशेषज्ञ इंटरक्रॉपिंग पद्धति को काफी प्रभावशाली बताते हैं। इस विधि से मक्का के साथ मूंग, उड़द जैसी दलहनी फसलें बोई जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त सब्जियां भी एक साथ खेत में उगाई जा सकती हैं। जिससे किसान एक ही समय में अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। बढ़ती आबादी की खाद्य जरूरतों के लिए यह पद्धति सहायक है। यह मौसम की अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से भी निपटती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में सहायक है।
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इंटर क्रॉपिंग फसल बोने से बढ़ती है पैदावार
दलहनी और अनाज वाली फसलों को मिलाकर बोने से खेती में जैव विविधता बढ़ती है और अधिक पैदावार मिलती है। यह पद्धति किसानों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफे की संभावना बढ़ाती है। दलहनी फसलों की जड़ों में राइजोबियम बैक्टीरिया मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाता है, जिससे उर्वरता में इजाफा होता है। इससे पानी, धूप और पोषक तत्वों का सही उपयोग होता है तथा सिंचाई की मांग कम रहती है। एक ही खेत में कई फसलें उगाने से कुल पैदावार बढ़ती है और प्रतिकूल मौसम में भी उपज की उम्मीद रहती है। यह मिट्टी के कटाव को कम करता है और खरपतवारों को पनपने नहीं देता। कुछ फसलें प्राकृतिक रूप से कीटों को दूर भगाती हैं, जिससे रासायनिक कीटनाशकों की आवश्यकता घटती है और मिट्टी में नमी बनी रहती है।
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मक्का के साथ मूंग अथवा उड़द की खेती अच्छा संयोग
कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ सस्य विज्ञान डॉ. गौरव वर्मा ने जायद में मक्का के साथ मूंग अथवा उड़द की खेती को बेहतर संयोग बताया है। इसके लिए किसान एक पंक्ति मक्का के बाद दो पंक्ति मूंग अथवा उड़द की रखें। मक्का की पंक्ति में 60 सेंटीमीटर की दूरी बनाना आवश्यक है। मूंग और उड़द को करीब 25 दिन बाद पोषक तत्वों की जरूरत होती है। वहीं मक्का को करीब 55 दिनों के बाद पोषक तत्वों की आवश्यकता पड़ती है। यह अलग-अलग समय पर पोषक तत्वों की मांग इस संयोजन को बेहतर बनाती है। इस संयोग से न सिर्फ अच्छा उत्पादन मिलेगा, बल्कि मिट्टी की सेहत और अपरदन दोनों में प्राकृतिक रूप से सुधार होगा। इसका लाभ वर्तमान फसल के साथ-साथ आगामी फसल को भी मिलेगा।
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मक्का के साथ सब्जी लगाने से होगी अच्छी उपज
उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. अंकित सिंह भदौरिया ने किसानों को मक्का के साथ सब्जी लगाने की सलाह दी है। इस विधि से किसान एक ही खेत से अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि मक्का की दो पंक्तियों के साथ भिंडी, सेम अथवा खीरा की एक पंक्ति लगाई जा सकती है। मक्का की पंक्तियों के बीच 60 से 75 सेंटीमीटर की दूरी रखनी चाहिए। वहीं, सब्जी की पंक्तियों के बीच 30 से 45 सेंटीमीटर की दूरी आवश्यक है। विशेषज्ञ ने इस बात पर विशेष ध्यान देने को कहा कि किसान खेत को समतल और अच्छी तरह तैयार करें। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि खेत में जलभराव की स्थिति न बने।
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कृषि विज्ञान विशेषज्ञ इंटरक्रॉपिंग पद्धति को काफी प्रभावशाली बताते हैं। इस विधि से मक्का के साथ मूंग, उड़द जैसी दलहनी फसलें बोई जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त सब्जियां भी एक साथ खेत में उगाई जा सकती हैं। जिससे किसान एक ही समय में अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। बढ़ती आबादी की खाद्य जरूरतों के लिए यह पद्धति सहायक है। यह मौसम की अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से भी निपटती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में सहायक है।
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इंटर क्रॉपिंग फसल बोने से बढ़ती है पैदावार
दलहनी और अनाज वाली फसलों को मिलाकर बोने से खेती में जैव विविधता बढ़ती है और अधिक पैदावार मिलती है। यह पद्धति किसानों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफे की संभावना बढ़ाती है। दलहनी फसलों की जड़ों में राइजोबियम बैक्टीरिया मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाता है, जिससे उर्वरता में इजाफा होता है। इससे पानी, धूप और पोषक तत्वों का सही उपयोग होता है तथा सिंचाई की मांग कम रहती है। एक ही खेत में कई फसलें उगाने से कुल पैदावार बढ़ती है और प्रतिकूल मौसम में भी उपज की उम्मीद रहती है। यह मिट्टी के कटाव को कम करता है और खरपतवारों को पनपने नहीं देता। कुछ फसलें प्राकृतिक रूप से कीटों को दूर भगाती हैं, जिससे रासायनिक कीटनाशकों की आवश्यकता घटती है और मिट्टी में नमी बनी रहती है।
मक्का के साथ मूंग अथवा उड़द की खेती अच्छा संयोग
कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ सस्य विज्ञान डॉ. गौरव वर्मा ने जायद में मक्का के साथ मूंग अथवा उड़द की खेती को बेहतर संयोग बताया है। इसके लिए किसान एक पंक्ति मक्का के बाद दो पंक्ति मूंग अथवा उड़द की रखें। मक्का की पंक्ति में 60 सेंटीमीटर की दूरी बनाना आवश्यक है। मूंग और उड़द को करीब 25 दिन बाद पोषक तत्वों की जरूरत होती है। वहीं मक्का को करीब 55 दिनों के बाद पोषक तत्वों की आवश्यकता पड़ती है। यह अलग-अलग समय पर पोषक तत्वों की मांग इस संयोजन को बेहतर बनाती है। इस संयोग से न सिर्फ अच्छा उत्पादन मिलेगा, बल्कि मिट्टी की सेहत और अपरदन दोनों में प्राकृतिक रूप से सुधार होगा। इसका लाभ वर्तमान फसल के साथ-साथ आगामी फसल को भी मिलेगा।
मक्का के साथ सब्जी लगाने से होगी अच्छी उपज
उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. अंकित सिंह भदौरिया ने किसानों को मक्का के साथ सब्जी लगाने की सलाह दी है। इस विधि से किसान एक ही खेत से अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि मक्का की दो पंक्तियों के साथ भिंडी, सेम अथवा खीरा की एक पंक्ति लगाई जा सकती है। मक्का की पंक्तियों के बीच 60 से 75 सेंटीमीटर की दूरी रखनी चाहिए। वहीं, सब्जी की पंक्तियों के बीच 30 से 45 सेंटीमीटर की दूरी आवश्यक है। विशेषज्ञ ने इस बात पर विशेष ध्यान देने को कहा कि किसान खेत को समतल और अच्छी तरह तैयार करें। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि खेत में जलभराव की स्थिति न बने।