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Kasganj News: मातृत्व पर पोषण संकट, हर दूसरी गर्भवती एनीमिक
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फोटो 03 कासगंज फोटो डॉ. नबीला अब्बास। स्रोत:स्ंवाद
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कासगंज। मातृत्व के दौरान पोषण की कमी अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। जिला अस्पताल में जांच कराने आने वाली हर दूसरी गर्भवती महिला एनीमिया यानी खून की कमी से पीड़ित मिल रही है। इनमें से करीब 20 प्रतिशत महिलाओं में एनीमिया का स्तर गंभीर पाया जा रहा है, जिसे चिकित्सक मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए खतरनाक मान रहे हैं।
घर-आंगन में बच्चे की किलकारियां हर परिवार की खुशी होती हैं, लेकिन कई बार मां की सेहत को ही नजरअंदाज कर दिया जाता है। चिकित्सकों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त पोषण और देखभाल न मिलने से महिलाएं तेजी से रक्त अल्पता की शिकार हो रही हैं। गर्भवती महिलाओं के शरीर में रक्त का स्तर संतुलित रहना बेहद जरूरी होता है। मगर खानपान में लापरवाही और पोषक तत्वों की कमी के कारण यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के रक्त की नियमित जांच की जा रही है। जांच में सामने आया है कि करीब 50 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। इनमें लगभग 30 प्रतिशत महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर 9 से 7 ग्राम के बीच पाया जा रहा है, जबकि करीब 20 प्रतिशत महिलाओं में यह स्तर 7 ग्राम से भी कम है, जिसे चिकित्सक बेहद गंभीर स्थिति मानते हैं।
गर्भावस्था में जरूरी पोषक तत्व
आयरन, प्रोटीन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट, खनिज लवण
प्रसव के समय बढ़ सकती हैं जटिलताएं
- अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा
- प्रसव के समय मां की जान को जोखिम
- कमजोर शिशु का जन्म या शिशु की जान को खतरा
- रक्तचाप बढ़ने की संभावना
- शरीर में सूजन की समस्या
खून की कमी के प्रमुख लक्षण
- त्वचा का पीला या सफेद दिखना
- जीभ, नाखून और पलकों के अंदर सफेदी
- अत्यधिक कमजोरी और थकान
- चक्कर आना या बेहोशी
- सांस फूलना
- हृदय की धड़कन तेज होना
- चेहरे और पैरों में सूजन
वर्जन
- जिला अस्पताल में प्रसव से पूर्व गर्भवती महिलाओं की रक्त की जांच कराई जाती है। प्रतिदिन अस्पताल आने वाली आधी महिलाओं में एनीमिया की समस्या सामने आ रही है। इनमें से 20 प्रतिशत महिलाओं में गंभीर स्थिति रहती है, जाे चिंताजनक है। - डॉ. नबीला अब्बास, स्त्री रोग विशेषज्ञ
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घर-आंगन में बच्चे की किलकारियां हर परिवार की खुशी होती हैं, लेकिन कई बार मां की सेहत को ही नजरअंदाज कर दिया जाता है। चिकित्सकों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त पोषण और देखभाल न मिलने से महिलाएं तेजी से रक्त अल्पता की शिकार हो रही हैं। गर्भवती महिलाओं के शरीर में रक्त का स्तर संतुलित रहना बेहद जरूरी होता है। मगर खानपान में लापरवाही और पोषक तत्वों की कमी के कारण यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के रक्त की नियमित जांच की जा रही है। जांच में सामने आया है कि करीब 50 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। इनमें लगभग 30 प्रतिशत महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर 9 से 7 ग्राम के बीच पाया जा रहा है, जबकि करीब 20 प्रतिशत महिलाओं में यह स्तर 7 ग्राम से भी कम है, जिसे चिकित्सक बेहद गंभीर स्थिति मानते हैं।
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गर्भावस्था में जरूरी पोषक तत्व
आयरन, प्रोटीन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट, खनिज लवण
प्रसव के समय बढ़ सकती हैं जटिलताएं
- अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा
- प्रसव के समय मां की जान को जोखिम
- कमजोर शिशु का जन्म या शिशु की जान को खतरा
- रक्तचाप बढ़ने की संभावना
- शरीर में सूजन की समस्या
खून की कमी के प्रमुख लक्षण
- त्वचा का पीला या सफेद दिखना
- जीभ, नाखून और पलकों के अंदर सफेदी
- अत्यधिक कमजोरी और थकान
- चक्कर आना या बेहोशी
- सांस फूलना
- हृदय की धड़कन तेज होना
- चेहरे और पैरों में सूजन
वर्जन
- जिला अस्पताल में प्रसव से पूर्व गर्भवती महिलाओं की रक्त की जांच कराई जाती है। प्रतिदिन अस्पताल आने वाली आधी महिलाओं में एनीमिया की समस्या सामने आ रही है। इनमें से 20 प्रतिशत महिलाओं में गंभीर स्थिति रहती है, जाे चिंताजनक है। - डॉ. नबीला अब्बास, स्त्री रोग विशेषज्ञ