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Kasganj News: एनसीईआरटी किताबों के आदेश पर निजी स्कूल संचालकों ने जताई आपत्ति
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कासगंज। जनपद के निजी स्कूलों के संगठन मान्यता प्राप्त विद्यालय बेसिक शिक्षा एसोसिएशन ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन जिला विद्यालय निरीक्षक के एक आदेश के खिलाफ दिया गया है। आदेश में जनपद के सभी विद्यालयों को केवल एनसीईआरटी की पुस्तकें मुख्य पाठ्य सामग्री के रूप में लागू करने का निर्देश है।
जिला विद्यालय निरीक्षक ने 31 मार्च को यह आदेश जारी किया था जिसके बाद निजी स्कूलों में खलबली मच गई है। एसोसिएशन ने बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बताया कि नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है। जनपद के करीब 60 फीसदी से अधिक छात्र पहले ही निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीद चुके हैं। अचानक इन किताबों पर प्रतिबंध लगाने से अभिभावकों को दोबारा पैसा खर्च करना पड़ेगा। यह उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2018 के विरुद्ध है।
ज्ञापन में कहा गया है कि स्थानीय पुस्तक विक्रेताओं के पास एससीईआरटी की किताबों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं है। यदि निजी प्रकाशकों की किताबों को तत्काल हटाया गया तो स्कूलों में शिक्षण कार्य पूरी तरह ठप हो जाएगा। ज्ञापन सौंपने वालों में महामंत्री संजय उपाध्याय, संजय पुंडीर, विपिन भारद्वाज, डीके पचौरी, योगेंद्र सिंह, मधुर पुंडीर, आनंद उपाध्याय और देवकी चरण आदि स्कूल प्रबंधक मौजूद रहे।
अभिभावकों का पूर्व प्रदर्शन
जिले में एनसीईआरटी पुस्तकें लागू करने के लिए कई दिनों से घमासान जारी है। बीते सोमवार को यूथ यूनाईटेड फॉर वैल्यूएशन एक्शन संगठन ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया था। उन्होंने शिक्षा को लूट से मुक्त करो अभियान के तहत धरना दिया था। संगठन ने बीएसए सूर्य प्रताप सिंह को ज्ञापन सौंपा था। अभिभावकों का कहना था कि कुछ स्कूल निजी प्रकाशन की महंगी पुस्तकों को अनिवार्य कर रहे हैं।
आर्थिक बोझ बढ़ने की चिंता
अभिभावकों का कहना था कि इससे परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। संगठन ने मांग की थी कि सभी निजी स्कूलों में एनसीईआरटी किताबों को प्राथमिकता देने के आदेश जारी किए जाएं। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक ने सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने का आदेश दिया था।
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जिला विद्यालय निरीक्षक ने 31 मार्च को यह आदेश जारी किया था जिसके बाद निजी स्कूलों में खलबली मच गई है। एसोसिएशन ने बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बताया कि नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है। जनपद के करीब 60 फीसदी से अधिक छात्र पहले ही निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीद चुके हैं। अचानक इन किताबों पर प्रतिबंध लगाने से अभिभावकों को दोबारा पैसा खर्च करना पड़ेगा। यह उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2018 के विरुद्ध है।
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ज्ञापन में कहा गया है कि स्थानीय पुस्तक विक्रेताओं के पास एससीईआरटी की किताबों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं है। यदि निजी प्रकाशकों की किताबों को तत्काल हटाया गया तो स्कूलों में शिक्षण कार्य पूरी तरह ठप हो जाएगा। ज्ञापन सौंपने वालों में महामंत्री संजय उपाध्याय, संजय पुंडीर, विपिन भारद्वाज, डीके पचौरी, योगेंद्र सिंह, मधुर पुंडीर, आनंद उपाध्याय और देवकी चरण आदि स्कूल प्रबंधक मौजूद रहे।
अभिभावकों का पूर्व प्रदर्शन
जिले में एनसीईआरटी पुस्तकें लागू करने के लिए कई दिनों से घमासान जारी है। बीते सोमवार को यूथ यूनाईटेड फॉर वैल्यूएशन एक्शन संगठन ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया था। उन्होंने शिक्षा को लूट से मुक्त करो अभियान के तहत धरना दिया था। संगठन ने बीएसए सूर्य प्रताप सिंह को ज्ञापन सौंपा था। अभिभावकों का कहना था कि कुछ स्कूल निजी प्रकाशन की महंगी पुस्तकों को अनिवार्य कर रहे हैं।
आर्थिक बोझ बढ़ने की चिंता
अभिभावकों का कहना था कि इससे परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। संगठन ने मांग की थी कि सभी निजी स्कूलों में एनसीईआरटी किताबों को प्राथमिकता देने के आदेश जारी किए जाएं। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक ने सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने का आदेश दिया था।