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सोमवती अमावस्या: गंगास्नान के लिए घाटों पर पहुंचे लाखों श्रद्धालु ,लगाई पुण्य की डुबकी
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फोटो20सोरोंजी में सोमवती अमावस्या पर हरि की पौड़ी पर स्नान करते श्रृद्धालु । संवाद
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कासगंज/सोरोंजी/गंजडुंडवारा। ज्येष्ठ मास की सोमवती अमावस्या पर लाखों श्रद्धालुओं ने लहरा, हरि की पौड़ी व कादरगंज घाट पर गंगास्नान किया। श्रद्धालुओं ने पूर्वजों की आत्मशांति के लिए गंगाघाटों पर अनुष्ठान किए। तीर्थनगरी में प्रदेश के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, दिल्ली आदि विभिन्न प्रांतों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। जिले के गंगा घाटों पर पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।
श्रद्धालुओं ने हर हर गंगे के जयकारे लगाते हुए सुबह ब्रह्मुहूर्त से गंगा में में आस्था की डुबकी लगाना प्रारंभ कर दिया। गंगा स्नान से पूर्व श्रद्धालुओं ने मुंडन संस्कार कराकर तीर्थ पुरोहितों से अपने पूर्वजों की आत्मशांति के लिए पूजन-अनुष्ठान कराया। तीर्थपुरोहितों और ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक भोजन कराकर श्रद्धालुओं ने दान-दक्षिणा दी। हरि की पौड़ी में गंगास्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने हरि की पौड़ी और शूकरक्षेत्र की पंचकोसी परिक्रमा की। पितृ पूजन व श्राद्ध करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ हरि की पौड़ी के चारों ओर भागीरथी गंगा घाट, लाल घाट, वराह घाट, राजा वाले घाट, श्याम वराह घाट , सोमेश्वर घाट, लक्ष्मण जी घाट, बरी वाले घाट, लठ्ठा वाले घाट आदि पर नजर आईं । श्रद्धालुओं ने मां गंगा का दुग्धाभिषेक कर गंगा मैया की पैरावनी भी की। वहीं कादरगंज गंगाघाट पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगास्नान किया। इसके पश्चात महिलाओं ने व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा कर अपने पतियों की दीर्घायु की कामना की। इसके अलावा मार्ग में कई स्थानों पर समाजसेवियों द्वारा श्रद्धालुओं व राहगीरों को शरबत का वितरण किया गया।
मंदिरों में किए देव दर्शन
कासगंज। गंगास्नान के बाद हरि नाम का संकीर्तन व पितृ देवों का स्मरण करते हुए श्रद्धालुओं ने परिक्रमा मार्ग में बैठे निर्धनों को वस्त्र-अनाज आदि का दान किया। श्रद्धालुओं ने क्षेत्राधीश वराह मंदिर पहुंचकर भगवान वराह के दर्शन कर प्रसाद चढ़ाया एवं अपने परिवार की खुशहाली और समृद्धि का आशीष मांगा। वहीं रघुनाथजी, द्वारिकाधीश, बालाजी, सोमेश्वर, सिद्ध विनायक, सिद्धहनुमान, योगेश्वर, बटुकनाथ, पंचमहाशक्ति, 84 घंटे वाली मां, श्याम वराह, मानस मंदिर, गंगा माता, सीतारामजी मंदिर, भागीरथ गुफा आदि स्थलों पर श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे।
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संत आश्रमों में पहुंचकर अन्न क्षेत्र चलाए
सोरोंजी। गंगा स्नान को आए श्रद्धालु योगमार्ग स्थित अपने गुरुओं के आश्रम पहुंचे। जहां आश्रमों में अपने गुरु को शीश नवाकर वहां मौजूद महात्माओं के लिए अन्न क्षेत्र चलाया। महेश दयानंद सोहम आश्रम, स्वामी अमृतानंद आश्रम, टाटिया बाबा आश्रम, भूदत्त आश्रम, नागालैंड आश्रम आदि में अन्न क्षेत्र चलाए गए।
श्रद्धालुओं ने हर हर गंगे के जयकारे लगाते हुए सुबह ब्रह्मुहूर्त से गंगा में में आस्था की डुबकी लगाना प्रारंभ कर दिया। गंगा स्नान से पूर्व श्रद्धालुओं ने मुंडन संस्कार कराकर तीर्थ पुरोहितों से अपने पूर्वजों की आत्मशांति के लिए पूजन-अनुष्ठान कराया। तीर्थपुरोहितों और ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक भोजन कराकर श्रद्धालुओं ने दान-दक्षिणा दी। हरि की पौड़ी में गंगास्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने हरि की पौड़ी और शूकरक्षेत्र की पंचकोसी परिक्रमा की। पितृ पूजन व श्राद्ध करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ हरि की पौड़ी के चारों ओर भागीरथी गंगा घाट, लाल घाट, वराह घाट, राजा वाले घाट, श्याम वराह घाट , सोमेश्वर घाट, लक्ष्मण जी घाट, बरी वाले घाट, लठ्ठा वाले घाट आदि पर नजर आईं । श्रद्धालुओं ने मां गंगा का दुग्धाभिषेक कर गंगा मैया की पैरावनी भी की। वहीं कादरगंज गंगाघाट पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगास्नान किया। इसके पश्चात महिलाओं ने व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा कर अपने पतियों की दीर्घायु की कामना की। इसके अलावा मार्ग में कई स्थानों पर समाजसेवियों द्वारा श्रद्धालुओं व राहगीरों को शरबत का वितरण किया गया।
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मंदिरों में किए देव दर्शन
कासगंज। गंगास्नान के बाद हरि नाम का संकीर्तन व पितृ देवों का स्मरण करते हुए श्रद्धालुओं ने परिक्रमा मार्ग में बैठे निर्धनों को वस्त्र-अनाज आदि का दान किया। श्रद्धालुओं ने क्षेत्राधीश वराह मंदिर पहुंचकर भगवान वराह के दर्शन कर प्रसाद चढ़ाया एवं अपने परिवार की खुशहाली और समृद्धि का आशीष मांगा। वहीं रघुनाथजी, द्वारिकाधीश, बालाजी, सोमेश्वर, सिद्ध विनायक, सिद्धहनुमान, योगेश्वर, बटुकनाथ, पंचमहाशक्ति, 84 घंटे वाली मां, श्याम वराह, मानस मंदिर, गंगा माता, सीतारामजी मंदिर, भागीरथ गुफा आदि स्थलों पर श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे।
संत आश्रमों में पहुंचकर अन्न क्षेत्र चलाए
सोरोंजी। गंगा स्नान को आए श्रद्धालु योगमार्ग स्थित अपने गुरुओं के आश्रम पहुंचे। जहां आश्रमों में अपने गुरु को शीश नवाकर वहां मौजूद महात्माओं के लिए अन्न क्षेत्र चलाया। महेश दयानंद सोहम आश्रम, स्वामी अमृतानंद आश्रम, टाटिया बाबा आश्रम, भूदत्त आश्रम, नागालैंड आश्रम आदि में अन्न क्षेत्र चलाए गए।