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Kasganj News: फसल सुखाते किसानों की आंखों में आए आंसू
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फोटो10वीरी सिंह,किसान। संवाद
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कासगंज। जिले में लगातार पांच दिन की बारिश और दो दिन की ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल को बुरी तरह तबाह कर दिया है। 2 से 8 अप्रैल तक चले इस दौर ने किसानों की उम्मीदों को पूरी तरह तोड़ दिया है। इस बार नुकसान सिर्फ खड़ी फसल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कटाई के बाद खेतों में पड़ी फसल भी बर्बादी की चपेट में आ गई है।
जिले में लगातार पांच दिन बारिश और दो दिन ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल को बुरी तरह तबाह कर दिया है। अब मौसम साफ होने पर किसान खेतों में भीगी फसल को सुखाने में जुटे हैं। लेकिन गेहूं में किल्ले पड़ गए हैं और कई जगह दाने काले हो गए हैं। इससे उपज की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है। यह उपज अब बाजार में बेचने लायक भी नहीं बची है।
कासगंज तहसील क्षेत्र में इसका सबसे अधिक असर देखा गया, जहां करीब 25 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। सहावर में तीन दिन में 14 मिलीमीटर और पटियाली में दो दिन में 3 मिलीमीटर बारिश ने हालात और खराब कर दिए।
फसल की गुणवत्ता गिरने से किसानों की आंखों में आंसू हैं। दाने काले पड़ने और किल्ले पड़ने से उपज का कोई मोल नहीं रहा है। किसान फिलहाल जो कुछ बचा है, उसे संभालने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस भारी नुकसान की भरपाई को लेकर उनकी चिंता गहराती जा रही है। उन्हें अपनी मेहनत पर पानी फिरता दिख रहा है।
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किसानों की बात
छह बीघा में गेहूं बोया था, लेकिन बारिश ने पूरी फसल बर्बाद कर दी। किल्ले निकलने के कारण अब इसे बेचना संभव नहीं है। - वीरी सिंह, किसान नगला सैय्यद
तीन बीघा की गेहूं की फसल पूरी तरह खराब हो चुकी है और अब सुखाने पर दाने काले नजर आ रहे हैं। लागत भी निकल पाना मुश्किल लग रहा है। - सरन देव, किसान, अहरौली
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जिले में लगातार पांच दिन बारिश और दो दिन ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल को बुरी तरह तबाह कर दिया है। अब मौसम साफ होने पर किसान खेतों में भीगी फसल को सुखाने में जुटे हैं। लेकिन गेहूं में किल्ले पड़ गए हैं और कई जगह दाने काले हो गए हैं। इससे उपज की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है। यह उपज अब बाजार में बेचने लायक भी नहीं बची है।
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कासगंज तहसील क्षेत्र में इसका सबसे अधिक असर देखा गया, जहां करीब 25 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। सहावर में तीन दिन में 14 मिलीमीटर और पटियाली में दो दिन में 3 मिलीमीटर बारिश ने हालात और खराब कर दिए।
फसल की गुणवत्ता गिरने से किसानों की आंखों में आंसू हैं। दाने काले पड़ने और किल्ले पड़ने से उपज का कोई मोल नहीं रहा है। किसान फिलहाल जो कुछ बचा है, उसे संभालने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस भारी नुकसान की भरपाई को लेकर उनकी चिंता गहराती जा रही है। उन्हें अपनी मेहनत पर पानी फिरता दिख रहा है।
किसानों की बात
छह बीघा में गेहूं बोया था, लेकिन बारिश ने पूरी फसल बर्बाद कर दी। किल्ले निकलने के कारण अब इसे बेचना संभव नहीं है। - वीरी सिंह, किसान नगला सैय्यद
तीन बीघा की गेहूं की फसल पूरी तरह खराब हो चुकी है और अब सुखाने पर दाने काले नजर आ रहे हैं। लागत भी निकल पाना मुश्किल लग रहा है। - सरन देव, किसान, अहरौली