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Kasganj News: 18 घंटे बाद खुला दरवाजा, और जीत गया दादा का प्यार
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कासगंज। लंबी मान-मनौव्वल के बाद बुधवार सुबह कमरे का दरवाजा खुला। दादा बाबूराम राजपूत (67) अपने 14 वर्षीय पोते दिग्विजय के साथ बाहर निकले। पुलिस ने पोते को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया। काउंसलिंग में पोते दिग्विजय ने दादा के साथ रहने की इच्छा जताई और दादा-पोते का प्यार जीत गया। समिति ने पोते को बाबा के संरक्षण में सौंप दिया। इसके बाद करीब 18 घंटे से चल रहा विवाद खत्म हो गया।
सदर कोतवाली के गांव पवसरा में मंगलवार को सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी दादा बाबूराम राजपूत ने पोते दिग्विजय के साथ खुद को घर के एक कमरे में बंद कर लिया था। उन्हें डर था कि बेटा अविनाश पोते को अपने साथ जयपुर लेकर चला जाएगा और वह अकेले रह जाएंगे। जयपुर से आए अविनाश ने पुलिस से शिकायत की कि उसके पिता उसे अपने बेटे से बात नहीं करने दे रहे। इसके कुछ ही देर बाद बाबूराम ने भी पुलिस से बेटे से जान के खतरे की शिकायत की।
सूचना पाकर कोतवाली प्रभारी जगदीश चंद्र, सीओ सदर आंचल चौहान और एसडीएम एसएन चौहान भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। बाबूराम पोते को जयपुर न भेजने की जिद पर अड़े रहे। देर रात तक पुलिस मनाती रही लेकिन उन्होंने दरवाजा नहीं खोला। मंगलवार रात करीब 10:30 बजे एसपी ओपी सिंह ने भी मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया और पिता से बातचीत की।
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बुधवार सुबह पुलिस के समझाने पर बाबूराम ने दरवाजा खोला। इसके बाद बच्चे को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। बाल कल्याण समिति न्यायपीठ के सदस्य डॉ. लईक अली ने बताया कि काउंसलिंग के बाद दादा और पिता के बीच आपसी समझौते के आधार पर यह तय हुआ कि बच्चे का लालन-पालन उसके बाबा ही करेंगे और पिता समय-समय पर उससे मिलने आ सकेंगे।
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पोते ने जताई बाबा के साथ रहने की इच्छा
वर्ष 2021 में कोरोना से पत्नी और वर्ष 2009 में सड़क हादसे में बड़े बेटे राजेश की मौत के बाद बाबूराम का अपने पोते दिग्विजय से विशेष लगाव हो गया था। दिग्विजय की मां ममता देवी की मृत्यु उसकी डिलीवरी के दौरान ही हो गई थी जिसके बाद अविनाश ने दूसरी शादी कर ली। वर्तमान में वह जयपुर में एक निजी कंपनी में प्लांट मैनेजर हैं। बाबूराम अपने पोते को फर्रुखाबाद के एक स्कूल के हॉस्टल में पढ़ा रहे थे और कुछ समय पहले ही उसे घर लाए थे। उन्होंने अपनी संपत्ति का एक हिस्सा भी पोते के नाम कर रखा है।
वर्जन
बुजुर्ग को समझाकर दरवाजा खुलवाया गया। पोते ने भी बाबा के साथ रहने की इच्छा जताई है। बच्चे को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया।
- ओपी सिंह, एसपी
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सदर कोतवाली के गांव पवसरा में मंगलवार को सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी दादा बाबूराम राजपूत ने पोते दिग्विजय के साथ खुद को घर के एक कमरे में बंद कर लिया था। उन्हें डर था कि बेटा अविनाश पोते को अपने साथ जयपुर लेकर चला जाएगा और वह अकेले रह जाएंगे। जयपुर से आए अविनाश ने पुलिस से शिकायत की कि उसके पिता उसे अपने बेटे से बात नहीं करने दे रहे। इसके कुछ ही देर बाद बाबूराम ने भी पुलिस से बेटे से जान के खतरे की शिकायत की।
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सूचना पाकर कोतवाली प्रभारी जगदीश चंद्र, सीओ सदर आंचल चौहान और एसडीएम एसएन चौहान भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। बाबूराम पोते को जयपुर न भेजने की जिद पर अड़े रहे। देर रात तक पुलिस मनाती रही लेकिन उन्होंने दरवाजा नहीं खोला। मंगलवार रात करीब 10:30 बजे एसपी ओपी सिंह ने भी मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया और पिता से बातचीत की।
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बुधवार सुबह पुलिस के समझाने पर बाबूराम ने दरवाजा खोला। इसके बाद बच्चे को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। बाल कल्याण समिति न्यायपीठ के सदस्य डॉ. लईक अली ने बताया कि काउंसलिंग के बाद दादा और पिता के बीच आपसी समझौते के आधार पर यह तय हुआ कि बच्चे का लालन-पालन उसके बाबा ही करेंगे और पिता समय-समय पर उससे मिलने आ सकेंगे।
पोते ने जताई बाबा के साथ रहने की इच्छा
वर्ष 2021 में कोरोना से पत्नी और वर्ष 2009 में सड़क हादसे में बड़े बेटे राजेश की मौत के बाद बाबूराम का अपने पोते दिग्विजय से विशेष लगाव हो गया था। दिग्विजय की मां ममता देवी की मृत्यु उसकी डिलीवरी के दौरान ही हो गई थी जिसके बाद अविनाश ने दूसरी शादी कर ली। वर्तमान में वह जयपुर में एक निजी कंपनी में प्लांट मैनेजर हैं। बाबूराम अपने पोते को फर्रुखाबाद के एक स्कूल के हॉस्टल में पढ़ा रहे थे और कुछ समय पहले ही उसे घर लाए थे। उन्होंने अपनी संपत्ति का एक हिस्सा भी पोते के नाम कर रखा है।
वर्जन
बुजुर्ग को समझाकर दरवाजा खुलवाया गया। पोते ने भी बाबा के साथ रहने की इच्छा जताई है। बच्चे को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया।
- ओपी सिंह, एसपी