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Kasganj News: वैद्य देवशरण पाराशरी ने हरिद्वार में यूनियन जैक उतारकर फहराया था तिरंगा
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फोटो 42 - पं. बल्लभराम मिश्र। स्रोत : संवाद
- फोटो : कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठे सपा नेता। स्रोतः स्वयं
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सोरोंजी। देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा देने वाले अमर सेनानियों का इतिहास हमेशा से प्रेरणादायी रहा है। तीर्थनगरी सोरोंजी के दो महान सपूतों स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देवशरण पाराशरी और पंडित बल्लभराम मिश्र का आजादी की लड़ाई में योगदान रहा है।
पाराशरी ने पढ़ाई के दौरान ही स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने हरिद्वार में अंग्रेज सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों में भाग लिया। वर्ष 1942 के दौरान देवशरण पाराशरी हरिद्वार के प्रसिद्ध ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज में छात्र थे। एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार से ताल्लुक रखने के कारण देशभक्ति की भावना पहले से ही थी।
13 अगस्त 1942 की रात उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर हर की पौड़ी पर तिरंगा फहराने का निर्णय लिया। अपनी योजना के तहत वे रात में चार किलोमीटर पैदल चलकर घंटाघर वाले घाट पर पहुंचे। जब छात्रों की इस टोली ने अंग्रेज सरकार के प्रतीक ''यूनियन जैक'' को उतारने का प्रयास किया, तो वहां मौजूद पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया।
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पुलिस की लाठियों की परवाह न करते हुए देवशरण पाराशरी और उनके साथी रामकुमार गुप्त हिम्मत जुटाकर पोल पर चढ़ गए और वहां तिरंगा फहरा दिया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर हरिद्वार कोतवाली में प्रताड़ित किया।
उन पर डाकखाना फूंकने और रेल पटरी उखाड़ने जैसे झूठे आरोप भी लगे, लेकिन मजिस्ट्रेट ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया। बाद में वे सोरोंजी आ गए और 1952 में एक प्रतिष्ठित वैद्य के रूप में ख्याति प्राप्त की। 26 अगस्त 2003 को उनका निधन हो गया। उनके पुत्र प्रभाकर पाराशरी आज क्षेत्र के जाने-माने वरिष्ठ साहित्यकार हैं।
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थानेदार को उठाकर जमीन पर पटक दिया था
तीर्थनगरी के वरिष्ठ अधिवक्ता उपेंद्र मिश्र के दादा पंडित बल्लभराम मिश्र ने भी स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई थी। जनवरी 1931 में उन्होंने अंग्रेजों द्वारा आयोजित ''अमन सभा'' का विरोध किया था। विरोध प्रदर्शन के दौरान जब एक थानेदार खुर्शीद अहमद ने एक मासूम बच्चे को झटककर फेंक दिया, तो पंडित बल्लभराम मिश्र का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने आक्रोश में आकर उस अंग्रेज-परस्त थानेदार को जमीन पर पटक दिया। इस घटना के बाद अंग्रेजी सेना ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें छह देशभक्त मौके पर ही शहीद हो गए। वर्तमान में यह जगह रानी लक्ष्मी बाई पार्क के नाम से प्रसिद्ध है।
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पाराशरी ने पढ़ाई के दौरान ही स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने हरिद्वार में अंग्रेज सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों में भाग लिया। वर्ष 1942 के दौरान देवशरण पाराशरी हरिद्वार के प्रसिद्ध ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज में छात्र थे। एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार से ताल्लुक रखने के कारण देशभक्ति की भावना पहले से ही थी।
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13 अगस्त 1942 की रात उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर हर की पौड़ी पर तिरंगा फहराने का निर्णय लिया। अपनी योजना के तहत वे रात में चार किलोमीटर पैदल चलकर घंटाघर वाले घाट पर पहुंचे। जब छात्रों की इस टोली ने अंग्रेज सरकार के प्रतीक ''यूनियन जैक'' को उतारने का प्रयास किया, तो वहां मौजूद पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया।
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पुलिस की लाठियों की परवाह न करते हुए देवशरण पाराशरी और उनके साथी रामकुमार गुप्त हिम्मत जुटाकर पोल पर चढ़ गए और वहां तिरंगा फहरा दिया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर हरिद्वार कोतवाली में प्रताड़ित किया।
उन पर डाकखाना फूंकने और रेल पटरी उखाड़ने जैसे झूठे आरोप भी लगे, लेकिन मजिस्ट्रेट ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया। बाद में वे सोरोंजी आ गए और 1952 में एक प्रतिष्ठित वैद्य के रूप में ख्याति प्राप्त की। 26 अगस्त 2003 को उनका निधन हो गया। उनके पुत्र प्रभाकर पाराशरी आज क्षेत्र के जाने-माने वरिष्ठ साहित्यकार हैं।
थानेदार को उठाकर जमीन पर पटक दिया था
तीर्थनगरी के वरिष्ठ अधिवक्ता उपेंद्र मिश्र के दादा पंडित बल्लभराम मिश्र ने भी स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई थी। जनवरी 1931 में उन्होंने अंग्रेजों द्वारा आयोजित ''अमन सभा'' का विरोध किया था। विरोध प्रदर्शन के दौरान जब एक थानेदार खुर्शीद अहमद ने एक मासूम बच्चे को झटककर फेंक दिया, तो पंडित बल्लभराम मिश्र का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने आक्रोश में आकर उस अंग्रेज-परस्त थानेदार को जमीन पर पटक दिया। इस घटना के बाद अंग्रेजी सेना ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें छह देशभक्त मौके पर ही शहीद हो गए। वर्तमान में यह जगह रानी लक्ष्मी बाई पार्क के नाम से प्रसिद्ध है।

फोटो 42 - पं. बल्लभराम मिश्र। स्रोत : संवाद- फोटो : कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठे सपा नेता। स्रोतः स्वयं