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Kaushambi News: अस्पताल में न कैशलेस सुविधा, न छुट्टे का हिसाब
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प्रदीप कुमार, पिपरी, मरीज
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स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, मंझनपुर के अस्पताल में रजिस्ट्रेशन काउंटर पर ऑनलाइन भुगतान की सुविधा न होने से मरीजों और तीमारदारों को रोजाना भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
एक रुपये के पर्चे के लिए नकद और फुटकर पैसों की अनिवार्यता के बीच, काउंटर पर बचे हुए पैसे वापस न किए जाने के आरोप मरीज और तीमारदार लगा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को रजिस्ट्रेशन काउंटर पर केवल नकद भुगतान ही करना पड़ता है। काउंटर पर एक रुपया नकद जमा करें का बोर्ड तो लगा है, लेकिन अक्सर मरीजों के पास फुटकर पैसे न होने पर उन्हें 5 या 10 रुपये का नोट देना पड़ता है।
आरोप है कि काउंटर कर्मचारी भीड़ का फायदा उठाकर बाकी बचे रुपये वापस नहीं करते। इस प्रकार प्रतिदिन छोटी-छोटी रकम मिलकर हजारों रुपये की अनियमित वसूली होने की चर्चा है। कई बार बचे हुए पैसे मांगने पर कर्मचारियों और तीमारदारों के बीच तीखी बहस भी हो जाती है।
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मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि ओपीडी पर्चे की मामूली राशि तो किसी तरह नकद में दे दी जाती है, लेकिन 400 से 500 रुपये तक की ऑपरेशन फीस भी केवल नकद जमा कराने की बाध्यता बड़ी मुसीबत खड़ी करती है।
खासकर इमरजेंसी के समय तीमारदार अक्सर पर्याप्त नकदी लेकर नहीं पहुंच पाते, और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा न होने के कारण उन्हें ऐन वक्त पर इधर-उधर भटककर पैसों का इंतजाम करना पड़ता है।
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एक रुपये के पर्चे के लिए नकद और फुटकर पैसों की अनिवार्यता के बीच, काउंटर पर बचे हुए पैसे वापस न किए जाने के आरोप मरीज और तीमारदार लगा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को रजिस्ट्रेशन काउंटर पर केवल नकद भुगतान ही करना पड़ता है। काउंटर पर एक रुपया नकद जमा करें का बोर्ड तो लगा है, लेकिन अक्सर मरीजों के पास फुटकर पैसे न होने पर उन्हें 5 या 10 रुपये का नोट देना पड़ता है।
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आरोप है कि काउंटर कर्मचारी भीड़ का फायदा उठाकर बाकी बचे रुपये वापस नहीं करते। इस प्रकार प्रतिदिन छोटी-छोटी रकम मिलकर हजारों रुपये की अनियमित वसूली होने की चर्चा है। कई बार बचे हुए पैसे मांगने पर कर्मचारियों और तीमारदारों के बीच तीखी बहस भी हो जाती है।
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मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि ओपीडी पर्चे की मामूली राशि तो किसी तरह नकद में दे दी जाती है, लेकिन 400 से 500 रुपये तक की ऑपरेशन फीस भी केवल नकद जमा कराने की बाध्यता बड़ी मुसीबत खड़ी करती है।
खासकर इमरजेंसी के समय तीमारदार अक्सर पर्याप्त नकदी लेकर नहीं पहुंच पाते, और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा न होने के कारण उन्हें ऐन वक्त पर इधर-उधर भटककर पैसों का इंतजाम करना पड़ता है।

प्रदीप कुमार, पिपरी, मरीज

प्रदीप कुमार, पिपरी, मरीज