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Kushinagar News: पंपसेट से पानी निकाल बाढ़ बचाव कार्य पूरा करने पर जोर
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एपी बांध के जवही दयाल मे कार्य स्थल से पानी निकालने व कार्य पुरा करने में जुटा विभाग।संवाद
- फोटो : Samvad
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संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। एपी बांध के जवही दयाल में नारायणी (गंडक ) नदी के डिस्चार्ज में कमी आने के बाद भी परियोजना स्थल पर पानी भरा है। इससे परियोजना को पूरा कराने में दिक्कतें आ रही है, इसे देखते हुए बाढ़ खंड के अभियंताओं अब पंपसेट लगा कर पानी निकालने के साथ कार्य की गति बढ़ा दी है।
लोगों का कहना है कि एपी बांध का यह हिस्सा काफी संवेदनशील है। यदि इस कार्य को जल्द पूरा नहीं कराया गया तो नदी का जलस्तर बढ़ने पर स्थिति भयावह हो सकती है, क्योंकि लोगों ने आगे भी जलस्तर में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। नरवाजोत बांध और एपी बांध को नारायणी (गंडक) नदी के कटान व बाढ़ से बचाव को लेकर सुरक्षात्मक कार्य कराए जा रहे हैं। नरवाजोत के किमी 0.525 से किमी 1.000 के बीच पहली परियोजना पुरी की जा चुकी है।
नरवाजोत बांध पर किमी 1.700 पर ठोकर सुरक्षा कार्य भी अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जबकि नदी के डिस्चार्ज में कमी आने के बावजूद भी एपी बांध के जवही दयाल के किमी 3.500 से किमी 4.000 के बीच रिवेटमेंट कार्य स्थल पर पानी भरा होने से यहां कार्य पूरा नहीं कराया जा सका है। जलस्तर बढ़ने की आशंका में बाढ़ खंड ने अब यहां पूरा जोर लगा दिया है और परियोजना कार्य स्थल से अब पंपिंग सेट लगा कर पानी निकालने के साथ कार्य की गति तेज कर दी गई है।
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क्षेत्र के मथुरा सिंह,भरत साह,दिनेश जायसवाल, अर्जुन मंडल, ध्रुव निषाद आदि का कहना है कि एपी बांध का यह हिस्सा पिछले पिछले कई सालों से काफी संवेदनशील बना हुआ और इस क्षेत्र में नदी के किनारे की सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि को नदी काटती हुई, बांध के समीप आ चुकी है, लोगों को आशंका है कि नेपाल की पहाड़ियों पर बारिश शुरु होते ही नदी का जलस्तर बढ़ सकता है।
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तमकुहीरोड। एपी बांध के जवही दयाल में नारायणी (गंडक ) नदी के डिस्चार्ज में कमी आने के बाद भी परियोजना स्थल पर पानी भरा है। इससे परियोजना को पूरा कराने में दिक्कतें आ रही है, इसे देखते हुए बाढ़ खंड के अभियंताओं अब पंपसेट लगा कर पानी निकालने के साथ कार्य की गति बढ़ा दी है।
लोगों का कहना है कि एपी बांध का यह हिस्सा काफी संवेदनशील है। यदि इस कार्य को जल्द पूरा नहीं कराया गया तो नदी का जलस्तर बढ़ने पर स्थिति भयावह हो सकती है, क्योंकि लोगों ने आगे भी जलस्तर में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। नरवाजोत बांध और एपी बांध को नारायणी (गंडक) नदी के कटान व बाढ़ से बचाव को लेकर सुरक्षात्मक कार्य कराए जा रहे हैं। नरवाजोत के किमी 0.525 से किमी 1.000 के बीच पहली परियोजना पुरी की जा चुकी है।
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नरवाजोत बांध पर किमी 1.700 पर ठोकर सुरक्षा कार्य भी अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जबकि नदी के डिस्चार्ज में कमी आने के बावजूद भी एपी बांध के जवही दयाल के किमी 3.500 से किमी 4.000 के बीच रिवेटमेंट कार्य स्थल पर पानी भरा होने से यहां कार्य पूरा नहीं कराया जा सका है। जलस्तर बढ़ने की आशंका में बाढ़ खंड ने अब यहां पूरा जोर लगा दिया है और परियोजना कार्य स्थल से अब पंपिंग सेट लगा कर पानी निकालने के साथ कार्य की गति तेज कर दी गई है।
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क्षेत्र के मथुरा सिंह,भरत साह,दिनेश जायसवाल, अर्जुन मंडल, ध्रुव निषाद आदि का कहना है कि एपी बांध का यह हिस्सा पिछले पिछले कई सालों से काफी संवेदनशील बना हुआ और इस क्षेत्र में नदी के किनारे की सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि को नदी काटती हुई, बांध के समीप आ चुकी है, लोगों को आशंका है कि नेपाल की पहाड़ियों पर बारिश शुरु होते ही नदी का जलस्तर बढ़ सकता है।