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Kushinagar News: बीज संवर्धन कार्य लखीमपुर ले जाने की तैयारी..गन्ना अनुसंधान रहेगा जारी
Thu, 30 Jul 2026 02:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 30 Jul 2026 02:20 AM IST
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सेवरही के गन्ना शोध संस्थान का बदलेगा ढांचा, बदलेगी प्रशासनिक व्यवस्था
-गन्ने के अलावा दलहन, तिलहन, सब्जी तथा अन्य कृषि फसलों पर भी शोध शुरू करने की तैयारी
कुशीनगर। करीब पांच दशक से पूर्वी उत्तर प्रदेश की गन्ना खेती को नई प्रजाति देने वाला गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान में बड़े प्रशासनिक बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर के अधीन संचालित इस संस्थान का प्रशासनिक नियंत्रण प्रस्तावित गौतम बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को सौंपने की तैयारी है। नई व्यवस्था में सेवरही परिसर में गन्ने के अलावा दलहन, तिलहन, सब्जी सहित अन्य कृषि फसलों पर भी शोध होगा। यहां चल रहीं गन्ना बीज संवर्धन (सीड मल्टीप्लिकेशन) की प्रमुख गतिविधियाें को लखीमपुर स्थानांतरित करने की तैयारी है। इसके लिए पिछले सप्ताह लखनऊ में अनुसंधान संस्थान के अधिकारियों और कृषि विभाग सहित परिषद के अधिकारियों की बैठक हो चुकी है।
कुशीनगर के सेवरही में स्थापित गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान पूर्वांचल का सबसे बड़ा गन्ना शोध संस्थान है। वर्ष 1975 में इसकी स्थापना गन्ना बीज संवर्धन केंद्र के रूप में हुई थी और वर्ष 1988 में इसे पूर्ण गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान का दर्जा मिला। यहां अब तक 53 गन्ना प्रजातियां विकसित की जा चुकी हैं। पूर्वांचल के 16 जिलों में गन्ना अनुसंधान और गुणवत्तायुक्त बीज कार्यक्रम का संचालन भी यहीं से होता रहा है।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में लखनऊ में हुई बैठक में पुनर्गठन के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रस्ताव के तहत सेवरही के बभनौली स्थित परिसर को गौतम बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अधीन बहुविषयक कृषि अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। यहां गन्ना प्रजनन और नई किस्मों पर वैज्ञानिक अनुसंधान जारी रहेगा। साथ ही दलहन, तिलहन, सब्जी तथा अन्य कृषि फसलों पर भी शोध कार्य शुरू किए जाएंगे।
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इसी योजना के तहत गन्ना बीज संवर्धन की प्रमुख गतिविधियों को लखीमपुर में विकसित करने की तैयारी है। सूत्रों का कहना है कि अनुसंधान और बीज उत्पादन की जिम्मेदारियां अलग-अलग केंद्रों पर होने से दोनों व्यवस्थाएं अधिक प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेंगी। हालांकि, पूरी व्यवस्था शासनादेश जारी होने के बाद ही लागू होगी। संवाद
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विकास प्रस्ताव अटके, अब बदलेगी व्यवस्था
संस्थान के विकास, प्रयोगशालाओं के विस्तार और आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए कई साल से शासन को लगातार प्रस्ताव भेजे जाते रहे लेकिन उन्हें स्वीकृति नहीं मिल सकी। इसके कारण नए विकास कार्य शुरू नहीं हो पाए। अब पुनर्गठन के प्रस्ताव के जरिए परिसर को विश्वविद्यालय से जोड़कर नई भूमिका देने की तैयारी की जा रही है, जिससे गन्ना अनुसंधान के साथ अन्य कृषि फसलों पर भी वैज्ञानिक शोध का दायरा बढ़ाया जा सके।
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पहले भी बनी थी योजना पर कक्षाएं शुरू नहीं हो सकीं
गौतम बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की घोषणा के बाद वर्ष 2024-25 में गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान परिसर को विश्वविद्यालय की शुरुआती शैक्षणिक गतिविधियों के लिए चुना गया था। तत्कालीन प्रभारी कुलपति डॉ. विजेंद्र सिंह और जिला प्रशासन ने परिसर का निरीक्षण कर यहां बीएससी एग्रीकल्चर की कक्षाएं संचालित करने की संभावना तलाशते हुए प्रयोगशाला, प्रशासनिक भवन, गेस्ट हाउस, कृषक छात्रावास और आवासीय भवनों का जायजा लिया था। कक्षाओं के संचालन की तैयारियों के तहत प्रयोगशाला, छात्रावास, फैकल्टी कक्ष और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए दो करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान भी किया गया था। हालांकि, आवश्यक पदों का सृजन नहीं होने के कारण संस्थान का प्रशासनिक नियंत्रण विश्वविद्यालय को नहीं सौंपा जा सका और कक्षाएं शुरू करने की योजना अधूरी रह गई। सूत्रों ने बताया कि अब शासन स्तर पर विचाराधीन पुनर्गठन प्रस्ताव में फिर इसी परिसर को विश्वविद्यालय के अधीन लाकर बहुविषयक अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। शासन स्तर पर हुई बैठक में शामिल होने से पूर्व परिषद के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान का निरीक्षण कर चुके थे।
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संस्थान के पुनर्गठन और बहुविषयक स्वरूप को लेकर शासन स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। अंतिम निर्णय शासनादेश के बाद लागू होगा। सेवरही में गन्ना अनुसंधान जारी रहेगा तथा आगे की व्यवस्थाएं शासन के निर्देशों के अनुरूप तय की जाएंगी। शासन से जो भी जानकारी मांगी गई थी। उसे दे दिया गया है। पिछले सप्ताह शासन स्तर पर हुई बैठक में इस पर पहल की गई है। -सुभाष चंद्र सिंह, संयुक्त निदेशक, गन्ना अनुसंधान संस्थान सेवरही कुशीनगर
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-गन्ने के अलावा दलहन, तिलहन, सब्जी तथा अन्य कृषि फसलों पर भी शोध शुरू करने की तैयारी
कुशीनगर। करीब पांच दशक से पूर्वी उत्तर प्रदेश की गन्ना खेती को नई प्रजाति देने वाला गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान में बड़े प्रशासनिक बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर के अधीन संचालित इस संस्थान का प्रशासनिक नियंत्रण प्रस्तावित गौतम बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को सौंपने की तैयारी है। नई व्यवस्था में सेवरही परिसर में गन्ने के अलावा दलहन, तिलहन, सब्जी सहित अन्य कृषि फसलों पर भी शोध होगा। यहां चल रहीं गन्ना बीज संवर्धन (सीड मल्टीप्लिकेशन) की प्रमुख गतिविधियाें को लखीमपुर स्थानांतरित करने की तैयारी है। इसके लिए पिछले सप्ताह लखनऊ में अनुसंधान संस्थान के अधिकारियों और कृषि विभाग सहित परिषद के अधिकारियों की बैठक हो चुकी है।
कुशीनगर के सेवरही में स्थापित गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान पूर्वांचल का सबसे बड़ा गन्ना शोध संस्थान है। वर्ष 1975 में इसकी स्थापना गन्ना बीज संवर्धन केंद्र के रूप में हुई थी और वर्ष 1988 में इसे पूर्ण गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान का दर्जा मिला। यहां अब तक 53 गन्ना प्रजातियां विकसित की जा चुकी हैं। पूर्वांचल के 16 जिलों में गन्ना अनुसंधान और गुणवत्तायुक्त बीज कार्यक्रम का संचालन भी यहीं से होता रहा है।
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सूत्रों के अनुसार, हाल ही में लखनऊ में हुई बैठक में पुनर्गठन के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रस्ताव के तहत सेवरही के बभनौली स्थित परिसर को गौतम बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अधीन बहुविषयक कृषि अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। यहां गन्ना प्रजनन और नई किस्मों पर वैज्ञानिक अनुसंधान जारी रहेगा। साथ ही दलहन, तिलहन, सब्जी तथा अन्य कृषि फसलों पर भी शोध कार्य शुरू किए जाएंगे।
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इसी योजना के तहत गन्ना बीज संवर्धन की प्रमुख गतिविधियों को लखीमपुर में विकसित करने की तैयारी है। सूत्रों का कहना है कि अनुसंधान और बीज उत्पादन की जिम्मेदारियां अलग-अलग केंद्रों पर होने से दोनों व्यवस्थाएं अधिक प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेंगी। हालांकि, पूरी व्यवस्था शासनादेश जारी होने के बाद ही लागू होगी। संवाद
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विकास प्रस्ताव अटके, अब बदलेगी व्यवस्था
संस्थान के विकास, प्रयोगशालाओं के विस्तार और आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए कई साल से शासन को लगातार प्रस्ताव भेजे जाते रहे लेकिन उन्हें स्वीकृति नहीं मिल सकी। इसके कारण नए विकास कार्य शुरू नहीं हो पाए। अब पुनर्गठन के प्रस्ताव के जरिए परिसर को विश्वविद्यालय से जोड़कर नई भूमिका देने की तैयारी की जा रही है, जिससे गन्ना अनुसंधान के साथ अन्य कृषि फसलों पर भी वैज्ञानिक शोध का दायरा बढ़ाया जा सके।
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पहले भी बनी थी योजना पर कक्षाएं शुरू नहीं हो सकीं
गौतम बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की घोषणा के बाद वर्ष 2024-25 में गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान परिसर को विश्वविद्यालय की शुरुआती शैक्षणिक गतिविधियों के लिए चुना गया था। तत्कालीन प्रभारी कुलपति डॉ. विजेंद्र सिंह और जिला प्रशासन ने परिसर का निरीक्षण कर यहां बीएससी एग्रीकल्चर की कक्षाएं संचालित करने की संभावना तलाशते हुए प्रयोगशाला, प्रशासनिक भवन, गेस्ट हाउस, कृषक छात्रावास और आवासीय भवनों का जायजा लिया था। कक्षाओं के संचालन की तैयारियों के तहत प्रयोगशाला, छात्रावास, फैकल्टी कक्ष और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए दो करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान भी किया गया था। हालांकि, आवश्यक पदों का सृजन नहीं होने के कारण संस्थान का प्रशासनिक नियंत्रण विश्वविद्यालय को नहीं सौंपा जा सका और कक्षाएं शुरू करने की योजना अधूरी रह गई। सूत्रों ने बताया कि अब शासन स्तर पर विचाराधीन पुनर्गठन प्रस्ताव में फिर इसी परिसर को विश्वविद्यालय के अधीन लाकर बहुविषयक अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। शासन स्तर पर हुई बैठक में शामिल होने से पूर्व परिषद के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान का निरीक्षण कर चुके थे।
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संस्थान के पुनर्गठन और बहुविषयक स्वरूप को लेकर शासन स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। अंतिम निर्णय शासनादेश के बाद लागू होगा। सेवरही में गन्ना अनुसंधान जारी रहेगा तथा आगे की व्यवस्थाएं शासन के निर्देशों के अनुरूप तय की जाएंगी। शासन से जो भी जानकारी मांगी गई थी। उसे दे दिया गया है। पिछले सप्ताह शासन स्तर पर हुई बैठक में इस पर पहल की गई है। -सुभाष चंद्र सिंह, संयुक्त निदेशक, गन्ना अनुसंधान संस्थान सेवरही कुशीनगर