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Kushinagar News: फर्जी डिग्री पर चल रहा था अस्पताल...संचालिका पर धोखाधड़ी की प्राथमिकी
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 20 May 2026 02:37 AM IST
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पडरौना/रामकोला। गीतांजलि हॉस्पिटल की संचालिका डॉ. मीरा शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना समेत गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच में उनकी मेडिकल की डिग्री फर्जी मिलने के बाद एसपी के आदेश पर पुलिस ने कार्रवाई की। मामला डिलीवरी के दौरान महिला की मौत से जुड़ा है। इसके पहले डॉ. मीरा शर्मा के पति अरविंद और ऑपरेशन करने वाले डाॅ. विकास मंडलोई के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
रामकोला थाना क्षेत्र के सोहरौना निवासी महेंद्र कुशवाहा ने एसपी को पत्र देकर आरोप लगाया था कि 21 नवंबर 2025 की रात करीब नौ बजे वह अपनी पत्नी पूनम देवी को प्रसव के लिए आशा कार्यकर्ता महजहरू निशा के कहने पर गीतांजलि हॉस्पिटल लेकर गए थे। वहां भर्ती के दौरान उनके भाई से 40 हजार रुपये जमा करा लिए गए। आरोप है कि ऑपरेशन के बाद अस्पताल संचालक की पत्नी डॉ. मीरा शर्मा की लापरवाही से पूनम देवी की हालत बिगड़ गई और बाद में उनकी मौत हो गई। पीड़ित का आरोप है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद मरीज से मिलने नहीं दिया गया और केवल रुपये की मांग की जाती रही। महेंद्र कुशवाहा ने आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अस्पताल का पंजीकरण कराया गया और मरीज की जिंदगी से खिलवाड़ किया गया। उन्होंने कहा कि पत्नी की मौत के बाद उनके तीन छोटे बच्चों का जीवन भी प्रभावित हो गया है।
डॉ. शेष कुमार विश्वकर्मा, डॉ. आनंद प्रकाश गुप्ता और डॉ. अवधेश प्रसाद की संयुक्त जांच रिपोर्ट में डॉ. मीरा शर्मा की डिग्री फर्जी होने का दावा किया गया है। जांच टीम की रिपोर्ट और उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल से आरटीआई के जरिए मिली जानकारी में यह स्पष्ट हुआ कि मीरा शर्मा के नाम से दर्शाई गई एमबीबीएस की डिग्री और पंजीकरण संख्या विभाग की ओर से जारी ही नहीं की गई थी। उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल की ओर से 21 जनवरी 2026 को जारी पत्र में भी संबंधित पंजीकरण संख्या को फर्जी बताया गया है।
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इस संबंध में थाना प्रभारी धनवीर सिंह ने बताया कि महेंद्र कुशवाहा की तहरीर पर डॉ. मीरा शर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस पुराने प्राथमिकी को भी जोड़कर जांच कर रही है।
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रामकोला थाना क्षेत्र के सोहरौना निवासी महेंद्र कुशवाहा ने एसपी को पत्र देकर आरोप लगाया था कि 21 नवंबर 2025 की रात करीब नौ बजे वह अपनी पत्नी पूनम देवी को प्रसव के लिए आशा कार्यकर्ता महजहरू निशा के कहने पर गीतांजलि हॉस्पिटल लेकर गए थे। वहां भर्ती के दौरान उनके भाई से 40 हजार रुपये जमा करा लिए गए। आरोप है कि ऑपरेशन के बाद अस्पताल संचालक की पत्नी डॉ. मीरा शर्मा की लापरवाही से पूनम देवी की हालत बिगड़ गई और बाद में उनकी मौत हो गई। पीड़ित का आरोप है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद मरीज से मिलने नहीं दिया गया और केवल रुपये की मांग की जाती रही। महेंद्र कुशवाहा ने आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अस्पताल का पंजीकरण कराया गया और मरीज की जिंदगी से खिलवाड़ किया गया। उन्होंने कहा कि पत्नी की मौत के बाद उनके तीन छोटे बच्चों का जीवन भी प्रभावित हो गया है।
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डॉ. शेष कुमार विश्वकर्मा, डॉ. आनंद प्रकाश गुप्ता और डॉ. अवधेश प्रसाद की संयुक्त जांच रिपोर्ट में डॉ. मीरा शर्मा की डिग्री फर्जी होने का दावा किया गया है। जांच टीम की रिपोर्ट और उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल से आरटीआई के जरिए मिली जानकारी में यह स्पष्ट हुआ कि मीरा शर्मा के नाम से दर्शाई गई एमबीबीएस की डिग्री और पंजीकरण संख्या विभाग की ओर से जारी ही नहीं की गई थी। उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल की ओर से 21 जनवरी 2026 को जारी पत्र में भी संबंधित पंजीकरण संख्या को फर्जी बताया गया है।
इस संबंध में थाना प्रभारी धनवीर सिंह ने बताया कि महेंद्र कुशवाहा की तहरीर पर डॉ. मीरा शर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस पुराने प्राथमिकी को भी जोड़कर जांच कर रही है।