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Kushinagar News: कार्यस्थलों पर गठित की जाएगी आंतरिक परिवाद समिति
Wed, 22 Jul 2026 02:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 22 Jul 2026 02:27 AM IST
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जिला प्रोबेशन अधिकारी अरुण कुमार दूबे ने बताया कि कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम के तहत जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां आंतरिक परिवाद समिति का गठन करना अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि समिति की अध्यक्ष कार्यस्थल पर वरिष्ठ स्तर पर नियोजित महिला अधिकारी होंगी। यदि किसी संस्था की तरफ से समिति का गठन नहीं किया जाता है तो प्रथम बार 50,000 और दूसरी बार 1,00,000 रुपये तक का अर्थदंड लगाया जा सकता है।
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इसके बाद भी समिति का गठन नहीं कने पर संबंधित निजी संस्था का पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। उन्होंने बताया कि जिन संस्थानों में अभी तक आंतरिक परिवाद समिति का गठन नहीं किया गया है, वे 15 दिनों के भीतर इसका गठन का कार्य पूरा कर लें। उन्होंने बताया कि समिति को प्राप्त शिकायत में प्रथम दृष्टया यौन उत्पीड़न के प्रमाण पाए जाने पर सात दिनों के भीतर संबंधित प्रकरण पुलिस को भेजा जाएगा। वहीं समिति को सिविल न्यायालय के समान जांच संबंधी शक्तियां प्राप्त होंगी। इन शिकायताें में जांच की कार्यवाही 90 दिनों के भीतर पूर्ण की जाएगी।
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जिला प्रोबेशन अधिकारी अरुण कुमार दूबे ने बताया कि कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम के तहत जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां आंतरिक परिवाद समिति का गठन करना अनिवार्य है।
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उन्होंने बताया कि समिति की अध्यक्ष कार्यस्थल पर वरिष्ठ स्तर पर नियोजित महिला अधिकारी होंगी। यदि किसी संस्था की तरफ से समिति का गठन नहीं किया जाता है तो प्रथम बार 50,000 और दूसरी बार 1,00,000 रुपये तक का अर्थदंड लगाया जा सकता है।
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इसके बाद भी समिति का गठन नहीं कने पर संबंधित निजी संस्था का पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। उन्होंने बताया कि जिन संस्थानों में अभी तक आंतरिक परिवाद समिति का गठन नहीं किया गया है, वे 15 दिनों के भीतर इसका गठन का कार्य पूरा कर लें। उन्होंने बताया कि समिति को प्राप्त शिकायत में प्रथम दृष्टया यौन उत्पीड़न के प्रमाण पाए जाने पर सात दिनों के भीतर संबंधित प्रकरण पुलिस को भेजा जाएगा। वहीं समिति को सिविल न्यायालय के समान जांच संबंधी शक्तियां प्राप्त होंगी। इन शिकायताें में जांच की कार्यवाही 90 दिनों के भीतर पूर्ण की जाएगी।