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Lakhimpur Kheri News: कला और गृह विज्ञान विषय से खुल रहे कॅरिअर के नए द्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 19 Feb 2026 11:48 PM IST
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सृष्टि माहेश्वरी
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लखीमपुर खीरी। बदलते समय में जहां तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर युवाओं का रुझान तेजी से बढ़ा है, वहीं कला और गृह विज्ञान जैसे पारंपरिक विषय छात्राओं के लिए सशक्त कॅरिअर विकल्प बनकर उभर रहे हैं।
कभी सीमित दायरे में देखे जाने वाले ये विषय अब बेटियों को शिक्षण, शोध, प्रतियोगिताओं और सरकारी सेवाओं तक पहुंचाने का माध्यम बन रहे हैं। जिले की कई छात्राएं इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर परिवार और जनपद का नाम रोशन कर रही हैं। शहर के रामनगर निवासी शिवांगी राज ने आर्य कन्या कॉलेज से स्नातक और डीएवी कॉलेज कानपुर से परास्नातक किया। दृश्य कला विषय से वर्ष 2019 में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर वह वर्तमान में बहराइच के महाराज सिंह इंटर कॉलेज में कला प्रवक्ता के रूप में कार्यरत हैं। वर्ष 2026 में भारत सरकार की जिला स्तरीय प्रतियोगिता में नकद पुरस्कार जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
ग्राम खजुहा (बेहजम) निवासी शिवा अवस्थी ने दृश्य कला में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा और जूनियर शोधवृत्ति प्राप्त कर शोध कार्य जारी रखा है। उनके चार शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं और वह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सम्मानित हो चुकी हैं। जिले की 20 से अधिक युवतियां कला शिक्षिका और अनुदेशक के रूप में कार्यरत हैं।
गृह विज्ञान विषय भी छात्राओं के लिए व्यापक संभावनाओं का द्वार खोल रहा है। इंदिरा नगर कॉलोनी पलिया की निवासी सृष्टि माहेश्वरी मधुमेह और मानसिक स्वास्थ्य पर शोध कर रही हैं, जबकि लखीमपुर की अनीता कुदेशिया कई वर्षों से शहर के कुंवर खुशवक्त राय बालिका इंटर कॉलेज लखीमपुर में प्रवक्ता पद पर कार्यरत हैं। उनका कहना है कि गृह विज्ञान केवल पाक-कला तक सीमित नहीं, बल्कि आहार-पोषण, मानव विकास, संसाधन प्रबंधन, वस्त्र विज्ञान और प्रसार शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण आयामों को समेटे हुए है।
कल्पना वर्मा और प्रतिमा शुक्ला सहित कई छात्राएं विश्वविद्यालय स्तर पर शोध और शैक्षिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। यह विषय छात्राओं को आहार विशेषज्ञ, परिधान विशेषज्ञ, बाल परामर्शदाता और उद्यमी बनने के अवसर प्रदान कर रहा है। संवाद
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दृश्य कला केवल चित्र बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति और सृजन की शक्ति है। प्रवक्ता पद तक पहुंचना गर्व की बात है।
-शिवांगी राज, कला प्रवक्ता
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कला के क्षेत्र में शोध की अपार संभावनाएं हैं। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो तो यह विषय अंतरराष्ट्रीय मंच तक सफलतापूर्वक पहुंचा सकता है।
-शिवा अवस्थी, शोधार्थी, दृश्य कला
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गृह विज्ञान जीवन से जुड़ा व्यावहारिक विज्ञान है। मधुमेह व मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर शोध समाज के लिए बेहद उपयोगी है।
-सृष्टि माहेश्वरी, शोधार्थी, गृह विज्ञान
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गृह विज्ञान विषय छात्राओं को आत्मनिर्भर और पेशेवर दोनों ही बनाता है। इसे अन्य के मुकाबले कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।
-अनीता कुदेशिया, प्रवक्ता, गृह विज्ञान
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कभी सीमित दायरे में देखे जाने वाले ये विषय अब बेटियों को शिक्षण, शोध, प्रतियोगिताओं और सरकारी सेवाओं तक पहुंचाने का माध्यम बन रहे हैं। जिले की कई छात्राएं इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर परिवार और जनपद का नाम रोशन कर रही हैं। शहर के रामनगर निवासी शिवांगी राज ने आर्य कन्या कॉलेज से स्नातक और डीएवी कॉलेज कानपुर से परास्नातक किया। दृश्य कला विषय से वर्ष 2019 में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर वह वर्तमान में बहराइच के महाराज सिंह इंटर कॉलेज में कला प्रवक्ता के रूप में कार्यरत हैं। वर्ष 2026 में भारत सरकार की जिला स्तरीय प्रतियोगिता में नकद पुरस्कार जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
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ग्राम खजुहा (बेहजम) निवासी शिवा अवस्थी ने दृश्य कला में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा और जूनियर शोधवृत्ति प्राप्त कर शोध कार्य जारी रखा है। उनके चार शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं और वह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सम्मानित हो चुकी हैं। जिले की 20 से अधिक युवतियां कला शिक्षिका और अनुदेशक के रूप में कार्यरत हैं।
गृह विज्ञान विषय भी छात्राओं के लिए व्यापक संभावनाओं का द्वार खोल रहा है। इंदिरा नगर कॉलोनी पलिया की निवासी सृष्टि माहेश्वरी मधुमेह और मानसिक स्वास्थ्य पर शोध कर रही हैं, जबकि लखीमपुर की अनीता कुदेशिया कई वर्षों से शहर के कुंवर खुशवक्त राय बालिका इंटर कॉलेज लखीमपुर में प्रवक्ता पद पर कार्यरत हैं। उनका कहना है कि गृह विज्ञान केवल पाक-कला तक सीमित नहीं, बल्कि आहार-पोषण, मानव विकास, संसाधन प्रबंधन, वस्त्र विज्ञान और प्रसार शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण आयामों को समेटे हुए है।
कल्पना वर्मा और प्रतिमा शुक्ला सहित कई छात्राएं विश्वविद्यालय स्तर पर शोध और शैक्षिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। यह विषय छात्राओं को आहार विशेषज्ञ, परिधान विशेषज्ञ, बाल परामर्शदाता और उद्यमी बनने के अवसर प्रदान कर रहा है। संवाद
दृश्य कला केवल चित्र बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति और सृजन की शक्ति है। प्रवक्ता पद तक पहुंचना गर्व की बात है।
-शिवांगी राज, कला प्रवक्ता
कला के क्षेत्र में शोध की अपार संभावनाएं हैं। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो तो यह विषय अंतरराष्ट्रीय मंच तक सफलतापूर्वक पहुंचा सकता है।
-शिवा अवस्थी, शोधार्थी, दृश्य कला
गृह विज्ञान जीवन से जुड़ा व्यावहारिक विज्ञान है। मधुमेह व मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर शोध समाज के लिए बेहद उपयोगी है।
-सृष्टि माहेश्वरी, शोधार्थी, गृह विज्ञान
गृह विज्ञान विषय छात्राओं को आत्मनिर्भर और पेशेवर दोनों ही बनाता है। इसे अन्य के मुकाबले कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।
-अनीता कुदेशिया, प्रवक्ता, गृह विज्ञान

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