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Lakhimpur Kheri News: युद्ध के असर से कोलतार महंगा, सड़क निर्माण पर संकट के आसार
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 23 Mar 2026 11:21 PM IST
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नौरंगाबाद से सौजन्या चौक जाने वाला डामर मार्ग। संवाद
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लखीमपुर खीरी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब स्थानीय बाजारों में भी दिखने लगा है। पेट्रोलियम उत्पादों के महंगे होने से कोलतार (बिटुमेन) के दामों में भारी उछाल आया है, जिससे सड़क निर्माण और विकास कार्यों की लागत बढ़ गई है।
फरवरी में कोलतार करीब 42,800 रुपये प्रति टन मिल रहा था, जो अब महंगा हो गया है। कोलतार की आपूर्ति मुख्य रूप से पानीपत और मथुरा रिफाइनरी से होती है, जहां बढ़े दामों का असर सीधे जिलों तक पहुंच रहा है।
इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर उन ठेकेदारों पर पड़ रहा है, जिन्होंने पुराने रेट पर टेंडर लिए थे। अब महंगे दामों पर कोलतार खरीदना उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। ईरान और ओमान जैसे देशों से आयात प्रभावित होने के कारण बाजार में इसकी कमी भी देखी जा रही है।
तकनीकी जानकारों के मुताबिक एक किलोमीटर लंबी और तीन मीटर चौड़ी सड़क बनाने में कई टन कोलतार लगता है। ऐसे में दाम बढ़ने से परियोजनाओं की लागत और बढ़ सकती है।
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फिलहाल जिले में चल रहे कार्यों पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। ठेकेदारों के पास स्टॉक मौजूद है और सामग्री की आपूर्ति भी हो रही है। पुराने टेंडरों पर काम जारी है।
-तरुणेंद्र त्रिपाठी, अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग
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अभी काम प्रभावित नहीं हुआ है, लेकिन आगे दिक्कत की आशंका है। यदि यही स्थिति रही तो काम करना मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल, स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
-विजेंद्र सिंह, ठेकेदार, नगर पालिका
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पुराने टेंडरों के काम मौजूदा महंगे दामों पर करने पड़ रहे हैं, जिससे काफी ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है। नए टेंडरों में बढ़े रेट शामिल होने पर ही राहत मिलेगी।
-हरपाल सिंह, ठेकेदार, पीडब्ल्यूडी
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फरवरी में कोलतार करीब 42,800 रुपये प्रति टन मिल रहा था, जो अब महंगा हो गया है। कोलतार की आपूर्ति मुख्य रूप से पानीपत और मथुरा रिफाइनरी से होती है, जहां बढ़े दामों का असर सीधे जिलों तक पहुंच रहा है।
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इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर उन ठेकेदारों पर पड़ रहा है, जिन्होंने पुराने रेट पर टेंडर लिए थे। अब महंगे दामों पर कोलतार खरीदना उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। ईरान और ओमान जैसे देशों से आयात प्रभावित होने के कारण बाजार में इसकी कमी भी देखी जा रही है।
तकनीकी जानकारों के मुताबिक एक किलोमीटर लंबी और तीन मीटर चौड़ी सड़क बनाने में कई टन कोलतार लगता है। ऐसे में दाम बढ़ने से परियोजनाओं की लागत और बढ़ सकती है।
फिलहाल जिले में चल रहे कार्यों पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। ठेकेदारों के पास स्टॉक मौजूद है और सामग्री की आपूर्ति भी हो रही है। पुराने टेंडरों पर काम जारी है।
-तरुणेंद्र त्रिपाठी, अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग
अभी काम प्रभावित नहीं हुआ है, लेकिन आगे दिक्कत की आशंका है। यदि यही स्थिति रही तो काम करना मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल, स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
-विजेंद्र सिंह, ठेकेदार, नगर पालिका
पुराने टेंडरों के काम मौजूदा महंगे दामों पर करने पड़ रहे हैं, जिससे काफी ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है। नए टेंडरों में बढ़े रेट शामिल होने पर ही राहत मिलेगी।
-हरपाल सिंह, ठेकेदार, पीडब्ल्यूडी