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Lakhimpur Kheri News: निडर बनने की पाठशाला में बेटियां
Wed, 15 Jul 2026 11:13 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 15 Jul 2026 11:13 PM IST
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अक्षिता
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लखीमपुर खीरी। महिलाओं और युवतियों के खिलाफ बढ़ती घटनाओं के बीच जिले की छात्राएं आत्मरक्षा के प्रति पहले से अधिक जागरूक हो रही हैं। स्कूलों, कॉलेजों और प्रशिक्षण केंद्रों में बड़ी संख्या में छात्राएं मार्शल आर्ट और सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण लेकर खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बना रही हैं।
छात्राओं का कहना है कि यह प्रशिक्षण संकट के समय आत्मरक्षा करने के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाता है। प्रशिक्षण ले रहीं छात्राओं के अनुसार, बदलते समय में पढ़ाई के साथ आत्मरक्षा का कौशल भी जरूरी है। यदि कोई छेड़छाड़ या हमला करने का प्रयास करे तो घबराने के बजाय उसका सामना करने का साहस होना चाहिए। प्रशिक्षकों का कहना है कि मार्शल आर्ट शरीर को मजबूत बनाने के साथ अनुशासन, संयम और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है।
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आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दे रहे अनुदेशक
समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिले के उच्च प्राथमिक (जूनियर) विद्यालयों में तैनात अंशकालिक अनुदेशक छात्र-छात्राओं को कराटे और अन्य खेलों का प्रशिक्षण दे रहे हैं। पहले इन अनुदेशकों को 9 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता था, जिसे बढ़ाकर 17 हजार रुपये कर दिया गया है।
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जिले में अनुदेशक व कोच जितेंद्र बरनवाल करीब 15 प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों में नियमित रूप से छात्राओं को आत्मरक्षा और कराटे का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशिक्षण का उद्देश्य छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ाना और विपरीत परिस्थितियों में खुद की सुरक्षा के लिए तैयार करना है। विद्यालयों के अलावा काशीनगर स्थित शिक्षक भवन में भी प्रतिदिन शाम को प्रशिक्षण शिविर संचालित होता है, जहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कराटे और सेल्फ डिफेंस की बारीकियां सीख रहे हैं।
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जूडो सीखने के बाद मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। अब किसी भी विपरीत परिस्थिति में घबराने के बजाय खुद का बचाव करना आता है।
-अक्षिता
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पहले अकेले कहीं आने-जाने में डर लगता था, लेकिन जूडो प्रशिक्षण से अब मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत महसूस करती हूं। यह प्रशिक्षण हर छात्रा के लिए जरूरी है।
-एंजल
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छात्राओं का कहना है कि यह प्रशिक्षण संकट के समय आत्मरक्षा करने के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाता है। प्रशिक्षण ले रहीं छात्राओं के अनुसार, बदलते समय में पढ़ाई के साथ आत्मरक्षा का कौशल भी जरूरी है। यदि कोई छेड़छाड़ या हमला करने का प्रयास करे तो घबराने के बजाय उसका सामना करने का साहस होना चाहिए। प्रशिक्षकों का कहना है कि मार्शल आर्ट शरीर को मजबूत बनाने के साथ अनुशासन, संयम और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है।
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आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दे रहे अनुदेशक
समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिले के उच्च प्राथमिक (जूनियर) विद्यालयों में तैनात अंशकालिक अनुदेशक छात्र-छात्राओं को कराटे और अन्य खेलों का प्रशिक्षण दे रहे हैं। पहले इन अनुदेशकों को 9 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता था, जिसे बढ़ाकर 17 हजार रुपये कर दिया गया है।
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जिले में अनुदेशक व कोच जितेंद्र बरनवाल करीब 15 प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों में नियमित रूप से छात्राओं को आत्मरक्षा और कराटे का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशिक्षण का उद्देश्य छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ाना और विपरीत परिस्थितियों में खुद की सुरक्षा के लिए तैयार करना है। विद्यालयों के अलावा काशीनगर स्थित शिक्षक भवन में भी प्रतिदिन शाम को प्रशिक्षण शिविर संचालित होता है, जहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कराटे और सेल्फ डिफेंस की बारीकियां सीख रहे हैं।
जूडो सीखने के बाद मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। अब किसी भी विपरीत परिस्थिति में घबराने के बजाय खुद का बचाव करना आता है।
-अक्षिता
पहले अकेले कहीं आने-जाने में डर लगता था, लेकिन जूडो प्रशिक्षण से अब मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत महसूस करती हूं। यह प्रशिक्षण हर छात्रा के लिए जरूरी है।
-एंजल

अक्षिता

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