{"_id":"6a6ce13a08db3f172b0116b6","slug":"ghaghra-river-erosion-threatens-population-rescue-work-begins-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1002-181393-2026-07-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: घाघरा की कटान से आबादी पर खतरा, बचाव कार्य शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: घाघरा की कटान से आबादी पर खतरा, बचाव कार्य शुरू
Fri, 31 Jul 2026 11:24 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 31 Jul 2026 11:24 PM IST
विज्ञापन
शिवशंकर लाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धौरहरा। ईसानगर विकासखंड के बहेलियनपुरवा मजरा चकदहा में घाघरा नदी का भू-कटान तेज हो रहा है। 15 दिनों में नदी कई बीघा उपजाऊ कृषि भूमि को अपने आगोश में ले चुकी है और अब आबादी की ओर बढ़ रही है। इससे ग्रामीणों में दहशत है।
मामले को लेकर अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद बाढ़ खंड के कर्मचारी गांव पहुंचे और कटान रोकने का काम शुरू कराया। नदी किनारे कुछ दूरी पर खेतों की मिट्टी खोदकर बोरियों में भरवाई और रस्सियों से बांधकर नदी में डलवाई जा रही हैं। ग्रामीण इस व्यवस्था को नाकाफी बताते हुए खानापूरी का आरोप लगा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि तेज कटान रोकने के लिए जियो बैग, एसी बैग और जियो ट्यूब जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। आरोप है कि स्थायी और प्रभावी इंतजाम नहीं होने से कटान का खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभावी बचाव कार्य कराने की मांग की। उनका कहना है कि समय रहते मजबूत इंतजाम नहीं हुए तो घाघरा आबादी तक पहुंच सकती है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
ग्रामीण बोले-कटान रोकने के इंतजाम नाकाफी
खेती ही जीवनयापन का एकमात्र सहारा है, उसे भी घाघरा काट रही है। सरकार जल्द कटान रोकने की व्यवस्था करे, नहीं तो रोजी-रोटी का संकट पैदा हो जाएगा। जो बचाव कार्य हो रहा है, वह केवल खानापूरी है।
-राजेश कुमार, निवासी बहेलियनपुरवा
-- -- -- -- -- -- -- -
नदी का प्रकोप हर साल झेलना पड़ता है, फिर भी कटान रोकने का कोई स्थायी कदम नहीं उठाया जा रहा। हर साल जमीन और फसलें नदी में समा रही हैं। राहत सामग्री के नाम पर प्रशासन खानापूर्ति कर इतिश्री कर लेता है।
-शिवशंकर लाल, निवासी चकदहा
-- -- -- -- -- --
पानी कम होने के बाद नदी तेजी से कटान कर रही है। बाढ़ खंड के ठेकेदार किसानों के खेतों से मिट्टी निकालकर प्लास्टिक की बोरियों में भरकर नदी में डाल रहे हैं। इससे कटान नहीं रुका और नदी गांव की तरफ बढ़ रही है।
-सोहनलाल, निवासी बहेलियनपुरवा
-- -- -- -- --
जिस तेजी से नदी कटान कर रही है, उससे गांव के कटने का भी खतरा है। समाधान नहीं हुआ तो दर्जनों गांवों की तरह बहेलियनपुरवा का भी नामोनिशान नक्शे से मिट जाएगा।
-समाई, निवासी बहेलियनपुरवा
-- -- -- -- -
आबादी को बचाने के लिए फ्लड फाइटिंग कराई जा रही है। इसमें जो सामग्री उपलब्ध होती है, उससे कार्य किया जाता है। कार्योत्तर बजट जिलाधिकारी के विवेक पर होता है। अभी परियोजना नहीं बनी है।
-अजय कुमार, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड शारदानगर
विज्ञापन
मामले को लेकर अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद बाढ़ खंड के कर्मचारी गांव पहुंचे और कटान रोकने का काम शुरू कराया। नदी किनारे कुछ दूरी पर खेतों की मिट्टी खोदकर बोरियों में भरवाई और रस्सियों से बांधकर नदी में डलवाई जा रही हैं। ग्रामीण इस व्यवस्था को नाकाफी बताते हुए खानापूरी का आरोप लगा रहे हैं।
विज्ञापन
ग्रामीणों का कहना है कि तेज कटान रोकने के लिए जियो बैग, एसी बैग और जियो ट्यूब जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। आरोप है कि स्थायी और प्रभावी इंतजाम नहीं होने से कटान का खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभावी बचाव कार्य कराने की मांग की। उनका कहना है कि समय रहते मजबूत इंतजाम नहीं हुए तो घाघरा आबादी तक पहुंच सकती है।
विज्ञापन
ग्रामीण बोले-कटान रोकने के इंतजाम नाकाफी
खेती ही जीवनयापन का एकमात्र सहारा है, उसे भी घाघरा काट रही है। सरकार जल्द कटान रोकने की व्यवस्था करे, नहीं तो रोजी-रोटी का संकट पैदा हो जाएगा। जो बचाव कार्य हो रहा है, वह केवल खानापूरी है।
-राजेश कुमार, निवासी बहेलियनपुरवा
नदी का प्रकोप हर साल झेलना पड़ता है, फिर भी कटान रोकने का कोई स्थायी कदम नहीं उठाया जा रहा। हर साल जमीन और फसलें नदी में समा रही हैं। राहत सामग्री के नाम पर प्रशासन खानापूर्ति कर इतिश्री कर लेता है।
-शिवशंकर लाल, निवासी चकदहा
पानी कम होने के बाद नदी तेजी से कटान कर रही है। बाढ़ खंड के ठेकेदार किसानों के खेतों से मिट्टी निकालकर प्लास्टिक की बोरियों में भरकर नदी में डाल रहे हैं। इससे कटान नहीं रुका और नदी गांव की तरफ बढ़ रही है।
-सोहनलाल, निवासी बहेलियनपुरवा
जिस तेजी से नदी कटान कर रही है, उससे गांव के कटने का भी खतरा है। समाधान नहीं हुआ तो दर्जनों गांवों की तरह बहेलियनपुरवा का भी नामोनिशान नक्शे से मिट जाएगा।
-समाई, निवासी बहेलियनपुरवा
आबादी को बचाने के लिए फ्लड फाइटिंग कराई जा रही है। इसमें जो सामग्री उपलब्ध होती है, उससे कार्य किया जाता है। कार्योत्तर बजट जिलाधिकारी के विवेक पर होता है। अभी परियोजना नहीं बनी है।
-अजय कुमार, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड शारदानगर

शिवशंकर लाल

शिवशंकर लाल

शिवशंकर लाल

शिवशंकर लाल