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Lalitpur News: भौंरट बांध के विस्थापित किसानों ने मुख्यमंत्री जनता दरबार में मांगा मुआवजा
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- ग्राम छपरट के ग्रामीणों ने जलसंसाधन मंत्री को लखनऊ में दिया ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
महरौनी। भौंरट बांध डूब क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने उनकी परिसंपत्तियों का मुआवजा नहीं मिलने से निराश होकर मुख्यमंत्री जनता दरबार में मुआवजा दिलाए जाने और 40 ग्राम पंचायतों में जल जीवन मिशन योजना से पानी दिलाए जाने की मांग की है।
महरौनी तहसील के ग्राम पंचायत छपरट में उन ग्रामीणों की जोत का मुआवजा पूर्ण रूप से नहीं दिया है और आवासीय पुनर्वास भी नहीं दिए गए। उनकी परिसंपत्तियों में बोर, हैंडपंप, फल या इमारती पेड़, बगीचों का मुआवजा भी नहीं दिया गया है। उनके रहने वाले मकानों का भी मुआवजा नहीं दिया गया, जिससे उनके रहने के लिए घर नहीं बना पा रहे हैं। ग्रामीणों के पुराने मकान क्षतिग्रस्त हो रहे हैं और विभाग वाले गिरने वाले मकानों का मुआवजा दिलाए जाने में बहाना कर रहे हैं। प्रदेश सरकार ने 300 करोड़ रुपये बजट का प्रावधान किया है। यदि इसमें से कुछ पैसा मिल जाता है तो किसानों का भला हो जाएगा। यदि वन विभाग का पैसा सिंचाई विभाग देता है तो उनके छह महीने में इसका उद्घाटन हो सकता है। यदि वह तैयार हो जाएगा तो 40 ग्राम पंचायतों को जल जीवन मिशन के अंतर्गत पीने का पानी मिल जाएगा। पिछली बार वर्ष 2022-23 में बढ़े हुए नए सर्किल रेट डूब क्षेत्र में लागू किए जाने की मांग भी की। आगे बताया कि जिले के कृषि क्षेत्र में वर्तमान में 15 लाख रुपये प्रति एकड़ जमीन मिल रही, लेकिन भौरट बांध डूब क्षेत्र वालों को लगभग 08 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया रहा है। यह उनके साथ दुर्व्यवहार है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से ग्राम पंचायत छपरट में भौंरट बांध परियोजना में अधिग्रहण की गई भूमि और घर, मकानों, बाग बगीचा, हैंडपंप, कूप, बोर, फलदार, इमारती पेड आदि परिसंपत्तियों का मुआवजा दिलाए जाने व मकान बनाने के लिए कालोनी में आवास आवंटन की मांग की है। ज्ञापन पर पूर्व जिला मंत्री जगदीश सिंह निरंजन, मुरलीधर, अमना, जगदीश, दीपक, जानकी, चंद्रभान, मानकुंवर, गुड्डी, जखौराबाई, गज्जू, काशीराम, ग्यासीराम आदि के हस्ताक्षर हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
महरौनी। भौंरट बांध डूब क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने उनकी परिसंपत्तियों का मुआवजा नहीं मिलने से निराश होकर मुख्यमंत्री जनता दरबार में मुआवजा दिलाए जाने और 40 ग्राम पंचायतों में जल जीवन मिशन योजना से पानी दिलाए जाने की मांग की है।
महरौनी तहसील के ग्राम पंचायत छपरट में उन ग्रामीणों की जोत का मुआवजा पूर्ण रूप से नहीं दिया है और आवासीय पुनर्वास भी नहीं दिए गए। उनकी परिसंपत्तियों में बोर, हैंडपंप, फल या इमारती पेड़, बगीचों का मुआवजा भी नहीं दिया गया है। उनके रहने वाले मकानों का भी मुआवजा नहीं दिया गया, जिससे उनके रहने के लिए घर नहीं बना पा रहे हैं। ग्रामीणों के पुराने मकान क्षतिग्रस्त हो रहे हैं और विभाग वाले गिरने वाले मकानों का मुआवजा दिलाए जाने में बहाना कर रहे हैं। प्रदेश सरकार ने 300 करोड़ रुपये बजट का प्रावधान किया है। यदि इसमें से कुछ पैसा मिल जाता है तो किसानों का भला हो जाएगा। यदि वन विभाग का पैसा सिंचाई विभाग देता है तो उनके छह महीने में इसका उद्घाटन हो सकता है। यदि वह तैयार हो जाएगा तो 40 ग्राम पंचायतों को जल जीवन मिशन के अंतर्गत पीने का पानी मिल जाएगा। पिछली बार वर्ष 2022-23 में बढ़े हुए नए सर्किल रेट डूब क्षेत्र में लागू किए जाने की मांग भी की। आगे बताया कि जिले के कृषि क्षेत्र में वर्तमान में 15 लाख रुपये प्रति एकड़ जमीन मिल रही, लेकिन भौरट बांध डूब क्षेत्र वालों को लगभग 08 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया रहा है। यह उनके साथ दुर्व्यवहार है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से ग्राम पंचायत छपरट में भौंरट बांध परियोजना में अधिग्रहण की गई भूमि और घर, मकानों, बाग बगीचा, हैंडपंप, कूप, बोर, फलदार, इमारती पेड आदि परिसंपत्तियों का मुआवजा दिलाए जाने व मकान बनाने के लिए कालोनी में आवास आवंटन की मांग की है। ज्ञापन पर पूर्व जिला मंत्री जगदीश सिंह निरंजन, मुरलीधर, अमना, जगदीश, दीपक, जानकी, चंद्रभान, मानकुंवर, गुड्डी, जखौराबाई, गज्जू, काशीराम, ग्यासीराम आदि के हस्ताक्षर हैं।
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