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Lalitpur: बहनोई की पहचान पर नौकरी, पत्नी के लिए बहन की डिग्री का इस्तेमाल, जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Tue, 10 Mar 2026 11:14 AM IST
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सार
जीजा की डिग्री पर फर्जी तरीके से कार्डियोलॉजिस्ट की नौकरी करने वाले अभिनव के मामले में पुलिस जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अभिनव ने अपनी बहन की मेडिकल डिग्री संबंधी दस्तावेजों को पत्नी के नाम से तैयार कराया था।
जीजा के नाम पर नौकरी करने वाले अभिनव सिंह
- फोटो : संवाद
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विस्तार
बहनोई की चिकित्सकीय डिग्री और पहचान चुराकर कार्डियोलॉजिस्ट की नौकरी करने के आरोप में जेल में बंद अभिनव सिंह के मामले में पुलिस जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि उसने अपनी बहन की मेडिकल डिग्री और पहचान संबंधी दस्तावेजों की कूटरचना कर उन्हें अपनी पत्नी लबीना सिंह के नाम से तैयार करा लिया था।
जेल में है अभिनव सिंह
जांच कर रही पुलिस टीम के अनुसार आरोपी ने न केवल अपने बहनोई की पहचान का इस्तेमाल कर मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट की नौकरी की, बल्कि अपनी पत्नी के लिए भी फर्जी तरीके से मेडिकल डिग्री और पहचान संबंधी कागजात बनवाए। बता दें कि शहर के तालाबपुरा मोहल्ला निवासी अभिनव सिंह के इस फर्जीवाड़े का खुलासा दिसंबर 2025 में हुआ था। वह मेडिकल कॉलेज में अपने बहनोई के नाम से ओपीडी और कार्डियोलॉजी विभाग में तैनात था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उसके पास से आधार कार्ड, पैन कार्ड समेत कई कूटरचित दस्तावेज बरामद हुए थे।
बहन की डिग्री और दस्तावेज से तैयार किये पत्नी के कागजात
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक मोहम्मद मुश्ताक ने क्षेत्राधिकारी सदर के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अभिनव सिंह ने अपनी दूसरी बहन दीपाली, जो अमेरिका के फ्लोरिडा में रहती हैं, की चिकित्सकीय डिग्री और पहचान संबंधी दस्तावेजों का भी दुरुपयोग किया। उसने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उन्हें अपनी पत्नी लबीना सिंह के नाम से बनवा लिया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक दीपाली ने करीब 15-20 वर्ष पहले आगरा से एमबीबीएस करने के बाद अमेरिका का रुख किया था। वहां जॉर्जिया से एमडी की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने लखनऊ निवासी युवक से विवाह कर लिया और अमेरिका में ही रहने लगीं। इसी का फायदा उठाकर अभिनव सिंह ने उनकी डिग्री और दस्तावेज हासिल कर पत्नी के नाम से फर्जी कागजात तैयार करा लिए।
जारी है पुलिस जांच
पुलिस के अनुसार जांच में यह तथ्य सामने आने के बाद मामले की पड़ताल का दायरा और बढ़ा दिया गया है। आवश्यक साक्ष्य जुटा लिए गए हैं और अब आरोप पत्र अदालत में दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। पुलिस अधीक्षक मोहम्मद मुश्ताक ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सीबीआई जांच से बचने के लिए 20 साल रहा भूमिगत
अभिनव सिंह ने आईआईटी रुड़की से बीटेक करने के बाद पुणे में कस्टम विभाग में नौकरी की थी। वर्ष 1999 में उसके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज हुआ था। बताया जाता है कि सीबीआई जांच से बचने के लिए वह करीब 20 वर्षों तक भूमिगत रहा। इस दौरान उसने अमेरिका में रहने वाले अपने बहनोई डॉ. राजीव गुप्ता की पहचान का इस्तेमाल कर आधार कार्ड, पैन कार्ड और चिकित्सकीय डिग्री समेत कई कूटरचित दस्तावेज बनवा लिए। शैक्षिक दस्तावेजों की तलाश में कई शहरों में पहुंच चुकी पुलिस : मामले की जांच के दौरान कोतवाली सदर पुलिस की पांच टीमें कोलकाता, मथुरा, रुड़की, फर्रुखाबाद और अलीगढ़ भेजी गई थीं। इन टीमों ने कई दिनों तक इन शहरों में रहकर अभिनव सिंह के शैक्षिक और अन्य दस्तावेजों की जानकारी जुटाई और महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए।
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जेल में है अभिनव सिंह
जांच कर रही पुलिस टीम के अनुसार आरोपी ने न केवल अपने बहनोई की पहचान का इस्तेमाल कर मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट की नौकरी की, बल्कि अपनी पत्नी के लिए भी फर्जी तरीके से मेडिकल डिग्री और पहचान संबंधी कागजात बनवाए। बता दें कि शहर के तालाबपुरा मोहल्ला निवासी अभिनव सिंह के इस फर्जीवाड़े का खुलासा दिसंबर 2025 में हुआ था। वह मेडिकल कॉलेज में अपने बहनोई के नाम से ओपीडी और कार्डियोलॉजी विभाग में तैनात था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उसके पास से आधार कार्ड, पैन कार्ड समेत कई कूटरचित दस्तावेज बरामद हुए थे।
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बहन की डिग्री और दस्तावेज से तैयार किये पत्नी के कागजात
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक मोहम्मद मुश्ताक ने क्षेत्राधिकारी सदर के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अभिनव सिंह ने अपनी दूसरी बहन दीपाली, जो अमेरिका के फ्लोरिडा में रहती हैं, की चिकित्सकीय डिग्री और पहचान संबंधी दस्तावेजों का भी दुरुपयोग किया। उसने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उन्हें अपनी पत्नी लबीना सिंह के नाम से बनवा लिया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक दीपाली ने करीब 15-20 वर्ष पहले आगरा से एमबीबीएस करने के बाद अमेरिका का रुख किया था। वहां जॉर्जिया से एमडी की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने लखनऊ निवासी युवक से विवाह कर लिया और अमेरिका में ही रहने लगीं। इसी का फायदा उठाकर अभिनव सिंह ने उनकी डिग्री और दस्तावेज हासिल कर पत्नी के नाम से फर्जी कागजात तैयार करा लिए।
जारी है पुलिस जांच
पुलिस के अनुसार जांच में यह तथ्य सामने आने के बाद मामले की पड़ताल का दायरा और बढ़ा दिया गया है। आवश्यक साक्ष्य जुटा लिए गए हैं और अब आरोप पत्र अदालत में दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। पुलिस अधीक्षक मोहम्मद मुश्ताक ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सीबीआई जांच से बचने के लिए 20 साल रहा भूमिगत
अभिनव सिंह ने आईआईटी रुड़की से बीटेक करने के बाद पुणे में कस्टम विभाग में नौकरी की थी। वर्ष 1999 में उसके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज हुआ था। बताया जाता है कि सीबीआई जांच से बचने के लिए वह करीब 20 वर्षों तक भूमिगत रहा। इस दौरान उसने अमेरिका में रहने वाले अपने बहनोई डॉ. राजीव गुप्ता की पहचान का इस्तेमाल कर आधार कार्ड, पैन कार्ड और चिकित्सकीय डिग्री समेत कई कूटरचित दस्तावेज बनवा लिए। शैक्षिक दस्तावेजों की तलाश में कई शहरों में पहुंच चुकी पुलिस : मामले की जांच के दौरान कोतवाली सदर पुलिस की पांच टीमें कोलकाता, मथुरा, रुड़की, फर्रुखाबाद और अलीगढ़ भेजी गई थीं। इन टीमों ने कई दिनों तक इन शहरों में रहकर अभिनव सिंह के शैक्षिक और अन्य दस्तावेजों की जानकारी जुटाई और महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए।
