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Lalitpur News: दो वर्ष तक सीओपी नंबर के बिना भी कर सकेंगे वकालत, नए अधिवक्ताओं को राहत
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। नए पंजीकृत अधिवक्ताओं को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने बड़ी राहत दी है। बीसीआई ने स्पष्ट किया है कि राज्य बार काउंसिल में नामांकित अधिवक्ता नामांकन के बाद निर्धारित दो वर्ष तक अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) उत्तीर्ण किए बिना भी पूर्ण रूप से विधि व्यवसाय कर सकेंगे। इस अवधि में उन्हें अलग से सीओपी (सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस) नंबर की अनिवार्यता नहीं होगी।
बीसीआई की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि अस्थायी रूप से नामांकित अधिवक्ता दो वर्ष की अवधि तक वकालतनामा पर हस्ताक्षर करने, उसे न्यायालय में दाखिल करने, न्यायालयों, अधिकरणों एवं अन्य सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष पेश होकर बहस करने तथा अन्य सभी प्रकार के वाद और गैर-वाद संबंधी विधिक कार्य करने के लिए अधिकृत होंगे।
हालांकि, बीसीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक अधिवक्ता एआईबीई परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर लेता, तब तक उसे बार एसोसिएशन के चुनाव में मतदान करने, चुनाव लड़ने और अधिवक्ता कल्याण योजनाओं का लाभ लेने का अधिकार नहीं मिलेगा। यह स्पष्टीकरण कर्नाटक उच्च न्यायालय में दायर एक रिट याचिका के संदर्भ में जारी किया गया है। याचिका में सात अस्थायी रूप से नामांकित अधिवक्ताओं ने एआईबीई परिणाम लंबित रहने के दौरान वकालतनामा दाखिल करने और न्यायालय में पेश होने की अनुमति देने की मांग की थी।
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दो वर्ष तक मिलेंगे ये अधिकार
दो वर्ष की अवधि में अधिवक्ता वकालतनामा पर हस्ताक्षर कर उसे दाखिल कर सकेगा। न्यायालयों, अधिकरणों और अन्य सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष बहस कर सकेगा। मुवक्किलों को विधिक परामर्श देने के साथ उनका प्रतिनिधित्व कर सकेगा। इसके अलावा वादपत्र, याचिकाएं, नोटिस, अनुबंध, विधिक राय, संपत्ति संबंधी दस्तावेज, मध्यस्थता, सुलह और अन्य वैधानिक कार्य भी कर सकेगा।
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दो वर्ष में एआईबीई पास नहीं किया तो स्वत: निलंबन
बीसीआई ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अधिवक्ता नामांकन की तिथि से दो वर्ष के भीतर एआईबीई परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करता है तो उसका लाइसेंस और विधि व्यवसाय करने का अधिकार स्वत: निलंबित हो जाएगा। यह निलंबन तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक वह परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर लेता।
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बीसीआई के इस निर्णय से नए अधिवक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। वे दो वर्ष तक बिना एआईबीई उत्तीर्ण किए न्यायालयों में विधि व्यवसाय कर सकेंगे। हालांकि, निर्धारित अवधि के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उनका लाइसेंस और विधि व्यवसाय का अधिकार स्वत: निलंबित हो जाएगा।
राजेश देवलिया,अध्यक्ष, जिला बार एसोसिएशन
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ललितपुर। नए पंजीकृत अधिवक्ताओं को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने बड़ी राहत दी है। बीसीआई ने स्पष्ट किया है कि राज्य बार काउंसिल में नामांकित अधिवक्ता नामांकन के बाद निर्धारित दो वर्ष तक अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) उत्तीर्ण किए बिना भी पूर्ण रूप से विधि व्यवसाय कर सकेंगे। इस अवधि में उन्हें अलग से सीओपी (सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस) नंबर की अनिवार्यता नहीं होगी।
बीसीआई की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि अस्थायी रूप से नामांकित अधिवक्ता दो वर्ष की अवधि तक वकालतनामा पर हस्ताक्षर करने, उसे न्यायालय में दाखिल करने, न्यायालयों, अधिकरणों एवं अन्य सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष पेश होकर बहस करने तथा अन्य सभी प्रकार के वाद और गैर-वाद संबंधी विधिक कार्य करने के लिए अधिकृत होंगे।
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हालांकि, बीसीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक अधिवक्ता एआईबीई परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर लेता, तब तक उसे बार एसोसिएशन के चुनाव में मतदान करने, चुनाव लड़ने और अधिवक्ता कल्याण योजनाओं का लाभ लेने का अधिकार नहीं मिलेगा। यह स्पष्टीकरण कर्नाटक उच्च न्यायालय में दायर एक रिट याचिका के संदर्भ में जारी किया गया है। याचिका में सात अस्थायी रूप से नामांकित अधिवक्ताओं ने एआईबीई परिणाम लंबित रहने के दौरान वकालतनामा दाखिल करने और न्यायालय में पेश होने की अनुमति देने की मांग की थी।
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दो वर्ष तक मिलेंगे ये अधिकार
दो वर्ष की अवधि में अधिवक्ता वकालतनामा पर हस्ताक्षर कर उसे दाखिल कर सकेगा। न्यायालयों, अधिकरणों और अन्य सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष बहस कर सकेगा। मुवक्किलों को विधिक परामर्श देने के साथ उनका प्रतिनिधित्व कर सकेगा। इसके अलावा वादपत्र, याचिकाएं, नोटिस, अनुबंध, विधिक राय, संपत्ति संबंधी दस्तावेज, मध्यस्थता, सुलह और अन्य वैधानिक कार्य भी कर सकेगा।
दो वर्ष में एआईबीई पास नहीं किया तो स्वत: निलंबन
बीसीआई ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अधिवक्ता नामांकन की तिथि से दो वर्ष के भीतर एआईबीई परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करता है तो उसका लाइसेंस और विधि व्यवसाय करने का अधिकार स्वत: निलंबित हो जाएगा। यह निलंबन तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक वह परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर लेता।
बीसीआई के इस निर्णय से नए अधिवक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। वे दो वर्ष तक बिना एआईबीई उत्तीर्ण किए न्यायालयों में विधि व्यवसाय कर सकेंगे। हालांकि, निर्धारित अवधि के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उनका लाइसेंस और विधि व्यवसाय का अधिकार स्वत: निलंबित हो जाएगा।
राजेश देवलिया,अध्यक्ष, जिला बार एसोसिएशन