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Lalitpur News: पत्नी और मासूम बेटे को 20 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने के आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश नंदप्रताप ओझा की अदालत ने दहेज की मांग को लेकर पत्नी को छह माह के मासूम बेटे सहित घर से निकालने के मामले में पति को दोनों के भरण-पोषण के लिए 20 हजार रुपये प्रतिमाह देने के आदेश दिए हैं।
कोतवाली क्षेत्र के सिद्धन रोड स्थित कुरैशी फार्म हाउस, सिविल लाइन निवासी रिमशा ने कुटुंब न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थनापत्र में बताया कि उसका विवाह 15 दिसंबर 2020 को मुस्लिम रीति-रिवाज से गोविंदनगर निवासी मोहम्मद फहीम पुत्र तारिक के साथ हुआ था। विवाह में उसके माता-पिता ने लगभग 20 लाख रुपये खर्च किए थे।
आरोप है कि विवाह के बाद पति फहीम तथा उसके परिजन वसीम, सगीर, समीर, नईम, नसीम, शबनम, पम्मी, रोजी, गुल्लो, सोनू, अनम और रूबीना अतिरिक्त दहेज के रूप में 20 लाख रुपये की मांग करने लगे। मांग पूरी न होने पर उसके साथ मारपीट की जाती थी। प्रार्थनापत्र के अनुसार, 14 अप्रैल 2022 को वह ससुराल पहुंची तो उससे दहेज में रुपये लाने के बारे में पूछा गया। इसके अगले दिन 15 अप्रैल की रात करीब एक बजे पति ने उसे जगा लिया। उस समय अन्य ससुरालीजन भी मौजूद थे। आरोप है कि सभी ने मिलकर उससे अतिरिक्त दहेज की मांग की, उसके स्त्रीधन के जेवर उतरवा लिए और उसे घर से निकाल दिया। साथ ही दहेज की रकम लाए बिना ससुराल नहीं आने की चेतावनी दी। वह किसी तरह अपने मासूम बेटे को साथ लेकर मायके पहुंची, जहां परिजन उसे अपने साथ ले गए।
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मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और पक्षकारों की दलीलों पर विचार करने के बाद प्रधान न्यायाधीश ने भरण-पोषण की मांग को उचित माना। न्यायालय ने आदेश दिया कि पति मोहम्मद फहीम अपनी पत्नी को 15 हजार रुपये तथा पुत्र को पांच हजार रुपये, कुल 20 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण राशि के रूप में प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में अदा करेगा।
ललितपुर। कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश नंदप्रताप ओझा की अदालत ने दहेज की मांग को लेकर पत्नी को छह माह के मासूम बेटे सहित घर से निकालने के मामले में पति को दोनों के भरण-पोषण के लिए 20 हजार रुपये प्रतिमाह देने के आदेश दिए हैं।
कोतवाली क्षेत्र के सिद्धन रोड स्थित कुरैशी फार्म हाउस, सिविल लाइन निवासी रिमशा ने कुटुंब न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थनापत्र में बताया कि उसका विवाह 15 दिसंबर 2020 को मुस्लिम रीति-रिवाज से गोविंदनगर निवासी मोहम्मद फहीम पुत्र तारिक के साथ हुआ था। विवाह में उसके माता-पिता ने लगभग 20 लाख रुपये खर्च किए थे।
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आरोप है कि विवाह के बाद पति फहीम तथा उसके परिजन वसीम, सगीर, समीर, नईम, नसीम, शबनम, पम्मी, रोजी, गुल्लो, सोनू, अनम और रूबीना अतिरिक्त दहेज के रूप में 20 लाख रुपये की मांग करने लगे। मांग पूरी न होने पर उसके साथ मारपीट की जाती थी। प्रार्थनापत्र के अनुसार, 14 अप्रैल 2022 को वह ससुराल पहुंची तो उससे दहेज में रुपये लाने के बारे में पूछा गया। इसके अगले दिन 15 अप्रैल की रात करीब एक बजे पति ने उसे जगा लिया। उस समय अन्य ससुरालीजन भी मौजूद थे। आरोप है कि सभी ने मिलकर उससे अतिरिक्त दहेज की मांग की, उसके स्त्रीधन के जेवर उतरवा लिए और उसे घर से निकाल दिया। साथ ही दहेज की रकम लाए बिना ससुराल नहीं आने की चेतावनी दी। वह किसी तरह अपने मासूम बेटे को साथ लेकर मायके पहुंची, जहां परिजन उसे अपने साथ ले गए।
मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और पक्षकारों की दलीलों पर विचार करने के बाद प्रधान न्यायाधीश ने भरण-पोषण की मांग को उचित माना। न्यायालय ने आदेश दिया कि पति मोहम्मद फहीम अपनी पत्नी को 15 हजार रुपये तथा पुत्र को पांच हजार रुपये, कुल 20 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण राशि के रूप में प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में अदा करेगा।