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Lalitpur News: तय दुकानों से किताबें खरीदने का दबाव बनाना पड़ा महंगा, स्कूल पर एक लाख का जुर्माना
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। विद्यार्थियों और अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से ही पाठ्यपुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य करना संस्कार वैली विद्यालय प्रबंधन को महंगा पड़ गया। शिकायत की जांच में आरोप सही पाए जाने पर जनपदीय शुल्क नियामक समिति ने विद्यालय प्रबंधन पर एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है।
नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों पर निर्धारित दुकानों से पुस्तकें और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने का दबाव बनाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी क्रम में अप्रैल माह में पिसनारी बाग निवासी राजाराम साहू ने जिलाधिकारी एवं जनपदीय शुल्क नियामक समिति से शिकायत की थी कि संस्कार वैली विद्यालय के प्रबंधक और प्रधानाचार्य द्वारा कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों को निर्धारित दुकानों से ही पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है।
शिकायत पर 21 अप्रैल को जिलाधिकारी एवं जनपदीय शुल्क नियामक समिति की बैठक में विचार किया गया। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन उसका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। जांच के दौरान विद्यालय के नाम से वितरित पंपलेट में लकी बुक डिपो और राजीव बुक डिपो का नाम स्पष्ट रूप से अंकित मिला, जिससे यह प्रमाणित हुआ कि अभिभावकों को इन्हीं दुकानों से पुस्तकें खरीदने के लिए निर्देशित किया जा रहा था।
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जांच में आरोप सही पाए जाने पर समिति ने उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) संबंधी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए विद्यालय प्रबंधन पर एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया।
जिला विद्यालय निरीक्षक एवं सदस्य सचिव, जनपदीय शुल्क नियामक समिति ओमप्रकाश ने बताया कि जांच में विद्यालय प्रबंधन द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया गया। इसके चलते समिति के निर्णय के अनुसार एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
ललितपुर। विद्यार्थियों और अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से ही पाठ्यपुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य करना संस्कार वैली विद्यालय प्रबंधन को महंगा पड़ गया। शिकायत की जांच में आरोप सही पाए जाने पर जनपदीय शुल्क नियामक समिति ने विद्यालय प्रबंधन पर एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है।
नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों पर निर्धारित दुकानों से पुस्तकें और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने का दबाव बनाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी क्रम में अप्रैल माह में पिसनारी बाग निवासी राजाराम साहू ने जिलाधिकारी एवं जनपदीय शुल्क नियामक समिति से शिकायत की थी कि संस्कार वैली विद्यालय के प्रबंधक और प्रधानाचार्य द्वारा कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों को निर्धारित दुकानों से ही पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है।
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शिकायत पर 21 अप्रैल को जिलाधिकारी एवं जनपदीय शुल्क नियामक समिति की बैठक में विचार किया गया। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन उसका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। जांच के दौरान विद्यालय के नाम से वितरित पंपलेट में लकी बुक डिपो और राजीव बुक डिपो का नाम स्पष्ट रूप से अंकित मिला, जिससे यह प्रमाणित हुआ कि अभिभावकों को इन्हीं दुकानों से पुस्तकें खरीदने के लिए निर्देशित किया जा रहा था।
जांच में आरोप सही पाए जाने पर समिति ने उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) संबंधी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए विद्यालय प्रबंधन पर एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया।
जिला विद्यालय निरीक्षक एवं सदस्य सचिव, जनपदीय शुल्क नियामक समिति ओमप्रकाश ने बताया कि जांच में विद्यालय प्रबंधन द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया गया। इसके चलते समिति के निर्णय के अनुसार एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।