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Lalitpur News: होम्योपैथी की ओर मरीजों का बढ़ा रुझान
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विश्व होम्योपैथी दिवस आज...
- होम्योपैथी चिकित्सालय में चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टॉफ की कमी से हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। होम्योपैथी चिकित्सा की ओर वर्तमान में मरीजों का रुझान बढ़ रहा है, जहां एक दशक पहले तीन से चार हजार मरीज प्रतिमाह इलाज कराने आते थे, तो वहीं, वर्तमान में इन मरीजों की संख्या 12 हजार से अधिक प्रतिमाह हो गई है।
जिले में वर्तमान में 24 होम्योपैथिक चिकित्सालय संचालित हैं, जबकि इनके सापेक्ष 21 चिकित्सकों की ही तैनाती है। चिकित्सकों की कमी के बावजूद अस्पतालों में रोजाना मरीजों की भीड़ देखी जा रही है। कई स्थानों पर एक-एक चिकित्सक को बड़ी संख्या में मरीजों का उपचार करना पड़ रहा है। होम्योपैथी में दवाएं किफायती होती हैं और इनके दुष्प्रभाव भी बेहद कम होते हैं। यही कारण है कि पथरी, त्वचा रोग, एलर्जी, जोड़ों के दर्द, अस्थमा, माइग्रेन और पुरानी बीमारियों के मरीज इस पद्धति की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी होम्योपैथी का विस्तार हुआ है, जिससे लोगों को स्थानीय स्तर पर इलाज की सुविधा मिल रही है। जिला होम्योपैथिक अधिकारी डॉ. आरएस यादव का कहना है कि होम्योपैथी पद्धति धीरे-धीरे लेकिन स्थायी रूप से बीमारी को जड़ से खत्म करने में सहायक होती है। उन्होंने बताया कि यदि समय पर सही उपचार लिया जाए तो कई पुरानी बीमारियों में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। भविष्य में चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने और सुविधाओं को और सुदृढ़ करने की योजना पर काम किया जा रहा है, ताकि बढ़ती मरीजों की संख्या के अनुरूप बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
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विश्व होम्योपैथी दिवस का महत्व
होम्योपैथी के जनक डॉ. सैमुअल हैनिमैन की जयंती के रूप में 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर देशभर में जागरुकता कार्यक्रम, स्वास्थ्य शिविर और संगोष्ठियों का आयोजन किया जाता है, ताकि लोगों को इस चिकित्सा पद्धति के लाभों के बारे में जानकारी मिल सके।
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फैक्ट फाइल
होम्योपैथी चिकित्सा की यह स्थिति
चिकित्सालय - 24
चिकित्सक - 21
फार्मासिस्ट - 16
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी- 11
उपचार ले रहे मरीज- प्रतिमाह 11 से 12 हजार
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। होम्योपैथी चिकित्सा की ओर वर्तमान में मरीजों का रुझान बढ़ रहा है, जहां एक दशक पहले तीन से चार हजार मरीज प्रतिमाह इलाज कराने आते थे, तो वहीं, वर्तमान में इन मरीजों की संख्या 12 हजार से अधिक प्रतिमाह हो गई है।
जिले में वर्तमान में 24 होम्योपैथिक चिकित्सालय संचालित हैं, जबकि इनके सापेक्ष 21 चिकित्सकों की ही तैनाती है। चिकित्सकों की कमी के बावजूद अस्पतालों में रोजाना मरीजों की भीड़ देखी जा रही है। कई स्थानों पर एक-एक चिकित्सक को बड़ी संख्या में मरीजों का उपचार करना पड़ रहा है। होम्योपैथी में दवाएं किफायती होती हैं और इनके दुष्प्रभाव भी बेहद कम होते हैं। यही कारण है कि पथरी, त्वचा रोग, एलर्जी, जोड़ों के दर्द, अस्थमा, माइग्रेन और पुरानी बीमारियों के मरीज इस पद्धति की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में भी होम्योपैथी का विस्तार हुआ है, जिससे लोगों को स्थानीय स्तर पर इलाज की सुविधा मिल रही है। जिला होम्योपैथिक अधिकारी डॉ. आरएस यादव का कहना है कि होम्योपैथी पद्धति धीरे-धीरे लेकिन स्थायी रूप से बीमारी को जड़ से खत्म करने में सहायक होती है। उन्होंने बताया कि यदि समय पर सही उपचार लिया जाए तो कई पुरानी बीमारियों में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। भविष्य में चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने और सुविधाओं को और सुदृढ़ करने की योजना पर काम किया जा रहा है, ताकि बढ़ती मरीजों की संख्या के अनुरूप बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
विश्व होम्योपैथी दिवस का महत्व
होम्योपैथी के जनक डॉ. सैमुअल हैनिमैन की जयंती के रूप में 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर देशभर में जागरुकता कार्यक्रम, स्वास्थ्य शिविर और संगोष्ठियों का आयोजन किया जाता है, ताकि लोगों को इस चिकित्सा पद्धति के लाभों के बारे में जानकारी मिल सके।
फैक्ट फाइल
होम्योपैथी चिकित्सा की यह स्थिति
चिकित्सालय - 24
चिकित्सक - 21
फार्मासिस्ट - 16
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी- 11
उपचार ले रहे मरीज- प्रतिमाह 11 से 12 हजार