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Maharajganj News: गज-ग्राह की कथा सुनाकर भाव विभोर हुए श्रोता
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 10 Mar 2026 02:41 AM IST
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बांसी। खेसरहा विकास खंड के कोटिया पांडेय गांव में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को कथा व्यास पं. इंद्रदेव महाराज ने गज-ग्राह की मार्मिक कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। कथा के दौरान पूरा पंडाल हरि बोल और जय श्रीहरि के जयकारों से गूंज उठा।
कथा व्यास ने बताया कि प्राचीन समय में एक विशाल और पराक्रमी हाथी गजराज अपने परिवार के साथ वन में विचरण करता था। एक दिन वह अपने दल के साथ प्यास बुझाने के लिए एक सुंदर सरोवर में पहुंचा। सरोवर में उतरकर जैसे ही गजराज पानी पीने लगा, तभी वहां छिपे एक शक्तिशाली ग्राह (मगरमच्छ) ने उसका पैर पकड़ लिया। गजराज ने पूरी शक्ति लगाकर खुद को छुड़ाने का प्रयास किया, लेकिन ग्राह की पकड़ बहुत मजबूत थी। कथा के अनुसार गजराज और ग्राह के बीच यह संघर्ष लंबे समय तक चलता रहा। धीरे-धीरे गजराज की ताकत क्षीण होने लगी और उसे लगा कि अब उसके प्राण संकट में पड़ गए हैं। तब उसने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान विष्णु को पुकारा और करुण स्वर में प्रार्थना किया कि हे प्रभु अब आपकी ही शरण है, मुझे इस संकट से उबारिए। भक्त की पीड़ा देखकर भगवान विष्णु तुरंत गरुड़ पर सवार होकर वहां पहुंचे और अपने सुदर्शन चक्र से ग्राह का वध कर गजराज को मुक्त कराया।
पं. इंद्रदेव ने कहा कि गज-ग्राह की यह कथा हमें यह शिक्षा देती है कि जीवन में चाहे कितना भी बड़ा संकट क्यों न आए, यदि मनुष्य श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान का स्मरण करता है तो उसे अवश्य ही संकट से मुक्ति मिलती है।
इस दौरान मुख्य यजमान ब्रह्मदेव यादव, नंगा यादव, फौजदार साहनी, अर्जुन यादव, रामलाल चौधरी, टिर्रू मौर्य आदि मौजूद रहे।
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कथा व्यास ने बताया कि प्राचीन समय में एक विशाल और पराक्रमी हाथी गजराज अपने परिवार के साथ वन में विचरण करता था। एक दिन वह अपने दल के साथ प्यास बुझाने के लिए एक सुंदर सरोवर में पहुंचा। सरोवर में उतरकर जैसे ही गजराज पानी पीने लगा, तभी वहां छिपे एक शक्तिशाली ग्राह (मगरमच्छ) ने उसका पैर पकड़ लिया। गजराज ने पूरी शक्ति लगाकर खुद को छुड़ाने का प्रयास किया, लेकिन ग्राह की पकड़ बहुत मजबूत थी। कथा के अनुसार गजराज और ग्राह के बीच यह संघर्ष लंबे समय तक चलता रहा। धीरे-धीरे गजराज की ताकत क्षीण होने लगी और उसे लगा कि अब उसके प्राण संकट में पड़ गए हैं। तब उसने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान विष्णु को पुकारा और करुण स्वर में प्रार्थना किया कि हे प्रभु अब आपकी ही शरण है, मुझे इस संकट से उबारिए। भक्त की पीड़ा देखकर भगवान विष्णु तुरंत गरुड़ पर सवार होकर वहां पहुंचे और अपने सुदर्शन चक्र से ग्राह का वध कर गजराज को मुक्त कराया।
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पं. इंद्रदेव ने कहा कि गज-ग्राह की यह कथा हमें यह शिक्षा देती है कि जीवन में चाहे कितना भी बड़ा संकट क्यों न आए, यदि मनुष्य श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान का स्मरण करता है तो उसे अवश्य ही संकट से मुक्ति मिलती है।
इस दौरान मुख्य यजमान ब्रह्मदेव यादव, नंगा यादव, फौजदार साहनी, अर्जुन यादव, रामलाल चौधरी, टिर्रू मौर्य आदि मौजूद रहे।
