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Maharajganj News: स्कूलों के पांच वर्षों का शुल्क विवरण, ड्रेस व पुस्तकों की टीम करेगी जांच
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जिलाधिकारी ने विद्यालय प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के साथ की बैठक
तीन सदस्यीय टीम का जिलाधिकारी ने किया गठन
महराजगंज। विद्यालयों में पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं अभिभावकों के हितों के संरक्षण और फीस नियमन के संदर्भ में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट सभागार में विद्यालय प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के साथ बैठक हुई। इस दौरान शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा की गई।
बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि जनपद के सभी वित्तविहीन प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 एवं उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) (संशोधन) अधिनियम, 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने पांच वर्षों का शुल्क विवरण, ड्रेस एवं पुस्तकों आदि की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करने का निर्देश दिया। इस समिति में उपजिलाधिकारी में नामित नायब तहसीलदार, खंड शिक्षा अधिकारी और राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक शामिल होंगे। समिति द्वारा की गई जांच की विस्तृत आख्या जिलाधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी।
जिलाधिकारी ने सर्वसाधारण को सूचित करने हेतु सभी विद्यालयों को निर्देशित किया। कहा कि वेबसाइट एवं सूचना पट्ट पर विगत पांच वर्षों का शुल्क विवरण, ड्रेस एवं पुस्तकों की जानकारी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें। जिलाधिकारी ने कहा कि ब्लॉक स्तरीय समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर ऐसे विद्यालय, जिन्होंने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) + 5 प्रतिशत से अधिक शुल्क वृद्धि की है। उनसे जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण लिया जाएगा। साथ ही, शुल्क को निर्धारित सीमा के अनुरूप कम कराते हुए भविष्य की फीस में समायोजन सुनिश्चित किया जाएगा।
पांच वर्ष के पहले स्कूल ड्रेस न बदलें जाएं
जिलाधिकारी ने कहा कि जांच के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाए कि विद्यालयों में निर्धारित ड्रेस में अनावश्यक परिवर्तन न किया जाए। साथ ही यह भी निर्देशित किया कि किसी भी विद्यालय में पांच लगातार शैक्षणिक वर्षों के भीतर ड्रेस में बदलाव नहीं किया जाएगा। सभी माध्यमिक एवं बेसिक विद्यालयों को अपने फीस स्ट्रक्चर को विद्यालय के सूचना पट्ट एवं आधिकारिक वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि कोई भी विद्यालय स्टेशनरी, पुस्तक, कॉपी, गणवेश आदि के लिए किसी विशेष दुकान को निर्धारित नहीं करेगा और न ही स्वयं इनका विक्रय करेगा। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाए कि विद्यालयों में केवल मान्यता प्राप्त पुस्तकों का ही संचालन हो। जिन सुविधाओं का संचालन विद्यालय द्वारा नहीं किया जा रहा है, उनका शुल्क किसी भी स्थिति में अभिभावकों से न वसूला जाए।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए, जिससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं अभिभावकों का विश्वास बना रहे। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक पीके शर्मा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ऋद्धि पांडेय, एआरटीओ मनोज सिंह मौजूद रहे।
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तीन सदस्यीय टीम का जिलाधिकारी ने किया गठन
महराजगंज। विद्यालयों में पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं अभिभावकों के हितों के संरक्षण और फीस नियमन के संदर्भ में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट सभागार में विद्यालय प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के साथ बैठक हुई। इस दौरान शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा की गई।
बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि जनपद के सभी वित्तविहीन प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 एवं उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) (संशोधन) अधिनियम, 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने पांच वर्षों का शुल्क विवरण, ड्रेस एवं पुस्तकों आदि की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करने का निर्देश दिया। इस समिति में उपजिलाधिकारी में नामित नायब तहसीलदार, खंड शिक्षा अधिकारी और राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक शामिल होंगे। समिति द्वारा की गई जांच की विस्तृत आख्या जिलाधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी।
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जिलाधिकारी ने सर्वसाधारण को सूचित करने हेतु सभी विद्यालयों को निर्देशित किया। कहा कि वेबसाइट एवं सूचना पट्ट पर विगत पांच वर्षों का शुल्क विवरण, ड्रेस एवं पुस्तकों की जानकारी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें। जिलाधिकारी ने कहा कि ब्लॉक स्तरीय समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर ऐसे विद्यालय, जिन्होंने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) + 5 प्रतिशत से अधिक शुल्क वृद्धि की है। उनसे जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण लिया जाएगा। साथ ही, शुल्क को निर्धारित सीमा के अनुरूप कम कराते हुए भविष्य की फीस में समायोजन सुनिश्चित किया जाएगा।
पांच वर्ष के पहले स्कूल ड्रेस न बदलें जाएं
जिलाधिकारी ने कहा कि जांच के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाए कि विद्यालयों में निर्धारित ड्रेस में अनावश्यक परिवर्तन न किया जाए। साथ ही यह भी निर्देशित किया कि किसी भी विद्यालय में पांच लगातार शैक्षणिक वर्षों के भीतर ड्रेस में बदलाव नहीं किया जाएगा। सभी माध्यमिक एवं बेसिक विद्यालयों को अपने फीस स्ट्रक्चर को विद्यालय के सूचना पट्ट एवं आधिकारिक वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि कोई भी विद्यालय स्टेशनरी, पुस्तक, कॉपी, गणवेश आदि के लिए किसी विशेष दुकान को निर्धारित नहीं करेगा और न ही स्वयं इनका विक्रय करेगा। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाए कि विद्यालयों में केवल मान्यता प्राप्त पुस्तकों का ही संचालन हो। जिन सुविधाओं का संचालन विद्यालय द्वारा नहीं किया जा रहा है, उनका शुल्क किसी भी स्थिति में अभिभावकों से न वसूला जाए।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए, जिससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं अभिभावकों का विश्वास बना रहे। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक पीके शर्मा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ऋद्धि पांडेय, एआरटीओ मनोज सिंह मौजूद रहे।