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Maharajganj News: नाव पर आश्रित नाैनिहालों की जिंदगी को पुल देगा नई दिशा
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नाव से नदी पार करते बच्चे ।
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मूलभूत सुविधाओं से महरूम था दो नदियाें से घिरा सेमरहवा गांव, 26.82 करोड़ से बन रहा पुल
नौतनवा। तहसील क्षेत्र का गांव सेमरहवा मूलभूत सुविधाओं से महरूम था। रोहिन और बघेला नदी के बीच बसे इस गांव के लोगों को स्कूल और अस्पताल तक पहुंचने के लिए बांस-बल्ली के पुल और नाव का ही सहारा था। 26.82 करोड़ की लागत से शुरू हुए पुल के निर्माण से इन ग्रामीणों की जिंदगी बदलने की उम्मीद है।
आठ हजार की आबादी वाले इस गांव में 2000 से अधिक मतदाता हैं। यहां एक प्राथमिक विद्यालय तथा एक पूर्व माध्यमिक विद्यालय है। बारिश के मौसम में गांव में जाने के लिए एक मात्र सहारा नाव ही है। बरसात खत्म होने पर बांस बल्ली के सहारे लोग नदी पार करते हैं। लोगों को गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर पैदल चलकर कुंअहवा घाट तक आना पड़ता है। वहां से नाव से नदी पार कर धोतिअहवा गांव के चखनी चौराहा, रामनगर, अड्डा बाजार, नौतनवा आदि स्थानों को जाते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि जंगल से सटा गांव होने से जंगली जानवर का आतंक बना रहता है। हिंसक जानवरों के हमले से घायल होने पर या गंभीर रूप से बीमार होने पर इलाज के लिए चारपाई पर लादकर नदी पार करना पड़ता है तब जाकर साधन मिल पाता है। अब उम्मीद है कि पुल निर्माण होने से दुश्वारियां दूर होंगी।
ग्राम प्रधान उपेंद्र यादव ने बताया कि जब नदी में बाढ़ जा जाती है तो गांव में जाने के लिए नाव से ही नदी पार किया जाता है। गांव के बच्चे हाईस्कूल, इंटर व उच्च शिक्षा के अड्डा बाजार, नौतनवां व अन्य कस्बों, नगरों में पढ़ने के लिए जाते हैं। नदी पार करते समय हमेशा भय बना रहता है।
ग्रामीणों ने चुनाव का किया था बहिष्कार : सेमरहवा गांव में पुल की मांग को लेकर ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार किया था। अधिकारियों और विधायक के आश्वासन पर काफी प्रयास के बाद मतदाताओं ने मतदान किया था।
वर्जन
85 वर्ष की उम्र हो गई। नदी पर पुल न होने से काफी दुश्वारियां झेलनी पड़ती हैं। जरूरत पूरी करने के लिए बरसात में नाव और बांस-बल्ली पुल के सहारे नदी पार कर जाना पड़ता है। पुल का भूमि पूजन होने से उम्मीद जगी है कि आने-जाने की दुश्वारियां दूर होंगी।
-तीरथ यादव, सेमरहवा गांव
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पुल बनने से लोगों को आने-जाने में काफी राहत मिलेगी। पहले लोगों को काफी दिक्कतें होती थीं। बारिश में यह परेशानी बढ़ जाती थी।
महेंद्र यादव, सेमरहवा
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जब भी बेटी या बेटा की शादी होती है तो वाहन गांव में नहीं आ पाता तो बेटी की विदाई होने पर नाव से ही नदी पार करना पड़ता है। गत वर्ष बरसात माह में नदी का जलस्तर बढ़ गया था तो नाव से ही दुल्हन को नदी पार कराया गया।
-किरन देवी, सेमरहवा
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मेरी 70 वर्ष की उम्र हो गई। गांव में आने-जाने के लिए पुल न होने से किसी सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता था। पुल बनने से काफी राहत मिलेगी। पहले बहुत परेशानियां होती थीं।
-बिंद्रावती देवी, सेमरहवा
ग्रामीणों ने चुनाव का किया था बहिष्कार
सेमरहवा गांव में पुल पर की मांग को लेकर ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव में मतदान के दिन एक जून 2024 को चुनाव का बहिष्कार किया था। दोपहर करीब 12 बजे तक मतदान शुरू नहीं हुआ था। मतदान बहिष्कार की सूचना पर अधिकारियों में हड़कंप मच गया था। अधिकारियों और विधायक के आश्वासन पर काफी प्रयास के बाद मतदाताओं ने मतदान किया। विधायक ऋषि त्रिपाठी का कहना है कि दशकों से ग्रामीणों की पुल निर्माण की मांग थी। जनता की मांग को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाया। सदन में भी सेमरहवा के ग्रामीणों की मांग को उठाया। लोकसभा चुनाव के दिन भी ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया था। वहां जाकर ग्रामीणों को आश्वासन दिया था उसके बाद मतदान शुरू हुआ। मुख्यमंत्री से कई बार अनुरोध किया उन्होंने जनता के विश्वास को रखा और 26.82 करोड़ की लागत से पुल निर्माण की स्वीकृति दी है। पुल बनने से लोगों को काफी राहत मिलेगी। इससे विकास के द्वार भी खुलेंगे।
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नौतनवा। तहसील क्षेत्र का गांव सेमरहवा मूलभूत सुविधाओं से महरूम था। रोहिन और बघेला नदी के बीच बसे इस गांव के लोगों को स्कूल और अस्पताल तक पहुंचने के लिए बांस-बल्ली के पुल और नाव का ही सहारा था। 26.82 करोड़ की लागत से शुरू हुए पुल के निर्माण से इन ग्रामीणों की जिंदगी बदलने की उम्मीद है।
आठ हजार की आबादी वाले इस गांव में 2000 से अधिक मतदाता हैं। यहां एक प्राथमिक विद्यालय तथा एक पूर्व माध्यमिक विद्यालय है। बारिश के मौसम में गांव में जाने के लिए एक मात्र सहारा नाव ही है। बरसात खत्म होने पर बांस बल्ली के सहारे लोग नदी पार करते हैं। लोगों को गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर पैदल चलकर कुंअहवा घाट तक आना पड़ता है। वहां से नाव से नदी पार कर धोतिअहवा गांव के चखनी चौराहा, रामनगर, अड्डा बाजार, नौतनवा आदि स्थानों को जाते हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि जंगल से सटा गांव होने से जंगली जानवर का आतंक बना रहता है। हिंसक जानवरों के हमले से घायल होने पर या गंभीर रूप से बीमार होने पर इलाज के लिए चारपाई पर लादकर नदी पार करना पड़ता है तब जाकर साधन मिल पाता है। अब उम्मीद है कि पुल निर्माण होने से दुश्वारियां दूर होंगी।
ग्राम प्रधान उपेंद्र यादव ने बताया कि जब नदी में बाढ़ जा जाती है तो गांव में जाने के लिए नाव से ही नदी पार किया जाता है। गांव के बच्चे हाईस्कूल, इंटर व उच्च शिक्षा के अड्डा बाजार, नौतनवां व अन्य कस्बों, नगरों में पढ़ने के लिए जाते हैं। नदी पार करते समय हमेशा भय बना रहता है।
ग्रामीणों ने चुनाव का किया था बहिष्कार : सेमरहवा गांव में पुल की मांग को लेकर ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार किया था। अधिकारियों और विधायक के आश्वासन पर काफी प्रयास के बाद मतदाताओं ने मतदान किया था।
वर्जन
85 वर्ष की उम्र हो गई। नदी पर पुल न होने से काफी दुश्वारियां झेलनी पड़ती हैं। जरूरत पूरी करने के लिए बरसात में नाव और बांस-बल्ली पुल के सहारे नदी पार कर जाना पड़ता है। पुल का भूमि पूजन होने से उम्मीद जगी है कि आने-जाने की दुश्वारियां दूर होंगी।
-तीरथ यादव, सेमरहवा गांव
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पुल बनने से लोगों को आने-जाने में काफी राहत मिलेगी। पहले लोगों को काफी दिक्कतें होती थीं। बारिश में यह परेशानी बढ़ जाती थी।
महेंद्र यादव, सेमरहवा
जब भी बेटी या बेटा की शादी होती है तो वाहन गांव में नहीं आ पाता तो बेटी की विदाई होने पर नाव से ही नदी पार करना पड़ता है। गत वर्ष बरसात माह में नदी का जलस्तर बढ़ गया था तो नाव से ही दुल्हन को नदी पार कराया गया।
-किरन देवी, सेमरहवा
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मेरी 70 वर्ष की उम्र हो गई। गांव में आने-जाने के लिए पुल न होने से किसी सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता था। पुल बनने से काफी राहत मिलेगी। पहले बहुत परेशानियां होती थीं।
-बिंद्रावती देवी, सेमरहवा
ग्रामीणों ने चुनाव का किया था बहिष्कार
सेमरहवा गांव में पुल पर की मांग को लेकर ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव में मतदान के दिन एक जून 2024 को चुनाव का बहिष्कार किया था। दोपहर करीब 12 बजे तक मतदान शुरू नहीं हुआ था। मतदान बहिष्कार की सूचना पर अधिकारियों में हड़कंप मच गया था। अधिकारियों और विधायक के आश्वासन पर काफी प्रयास के बाद मतदाताओं ने मतदान किया। विधायक ऋषि त्रिपाठी का कहना है कि दशकों से ग्रामीणों की पुल निर्माण की मांग थी। जनता की मांग को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाया। सदन में भी सेमरहवा के ग्रामीणों की मांग को उठाया। लोकसभा चुनाव के दिन भी ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया था। वहां जाकर ग्रामीणों को आश्वासन दिया था उसके बाद मतदान शुरू हुआ। मुख्यमंत्री से कई बार अनुरोध किया उन्होंने जनता के विश्वास को रखा और 26.82 करोड़ की लागत से पुल निर्माण की स्वीकृति दी है। पुल बनने से लोगों को काफी राहत मिलेगी। इससे विकास के द्वार भी खुलेंगे।