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Mahoba News: बाहरी युवक ने इमरजेंसी में मरीज को लिखे 480 रुपये के इंजेक्शन, हंगामा
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फोटो 17 एमएएचपी 16 परिचय-जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती फल विक्रेता मूरत। संवाद
- फोटो : विकास भवन।
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महोबा। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में रविवार को इलाज के लिए आए मरीज को बाहरी युवक ने 480 रुपये के इंजेक्शन लिख दिए। इस पर मरीज के परिजन ने हंगामा किया। तब इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने युवक को फटकार लगाई।
शहर के निकट स्थित दिसरापुर गांव निवासी मूरत (37) फल विक्रेता है। वह रविवार को फलों की बिक्री के लिए ठेली लेकर शहर के हमीरपुर सड़क स्थित कांशीराम कॉलोनी पहुंचा। तभी अचानक चक्कर आने की वजह से उसकी हालत बिगड़ गई। कॉलोनीवासियों ने इसकी सूचना मूरत के परिजन को दी। भतीजा नीतेश व बहन शांति मौके पर पहुंचे और उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड लाए। इमरजेंसी में तैनात डॉ. पंकज राजपूत ने उसका उपचार किया। इसी दाैरान इमरजेंसी में मौजूद एक बाहरी युवक ने इलाज के नाम पर मरीज को बाहर का इंजेक्शन लिख दिया।
परिजन 480 रुपये के दो इंजेक्शन खरीदने के बाद इमरजेंसी वार्ड पहुंचे। इंजेक्शन लगाने की बात कहने पर डॉ. पंकज राजपूत ने पूछा कि यह इंजेक्शन किसने लिखा। तब परिजन ने बताया कि यहां मौजूद एक युवक ने इंजेक्शन लिखा और युवक की पहचान कराई। इस बात को लेकर परिजन ने हंगामा भी किया। डॉक्टर ने युवक फटकार लगाते हुए मामला शांत कराया। सीएमएस डॉ. सुरेश कुमार का कहना है कि इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक की जिम्मेदारी रहती है कि कौन क्या कर रहा है। मरीज को इंजेक्शन लिखने वाला युवक अस्पताल का कर्मचारी नहीं है। शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी।
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शहर के निकट स्थित दिसरापुर गांव निवासी मूरत (37) फल विक्रेता है। वह रविवार को फलों की बिक्री के लिए ठेली लेकर शहर के हमीरपुर सड़क स्थित कांशीराम कॉलोनी पहुंचा। तभी अचानक चक्कर आने की वजह से उसकी हालत बिगड़ गई। कॉलोनीवासियों ने इसकी सूचना मूरत के परिजन को दी। भतीजा नीतेश व बहन शांति मौके पर पहुंचे और उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड लाए। इमरजेंसी में तैनात डॉ. पंकज राजपूत ने उसका उपचार किया। इसी दाैरान इमरजेंसी में मौजूद एक बाहरी युवक ने इलाज के नाम पर मरीज को बाहर का इंजेक्शन लिख दिया।
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परिजन 480 रुपये के दो इंजेक्शन खरीदने के बाद इमरजेंसी वार्ड पहुंचे। इंजेक्शन लगाने की बात कहने पर डॉ. पंकज राजपूत ने पूछा कि यह इंजेक्शन किसने लिखा। तब परिजन ने बताया कि यहां मौजूद एक युवक ने इंजेक्शन लिखा और युवक की पहचान कराई। इस बात को लेकर परिजन ने हंगामा भी किया। डॉक्टर ने युवक फटकार लगाते हुए मामला शांत कराया। सीएमएस डॉ. सुरेश कुमार का कहना है कि इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक की जिम्मेदारी रहती है कि कौन क्या कर रहा है। मरीज को इंजेक्शन लिखने वाला युवक अस्पताल का कर्मचारी नहीं है। शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी।