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Mahoba News: किसान की मौत पर बीमा कंपनी को क्लेम के भुगतान का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Wed, 18 Mar 2026 12:13 AM IST
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महोबा। किसान की मौत के बाद उसे दिमागी कमजोर बताकर बीमा कंपनी ने क्लेम का दावा खारिज कर दिया। इस मामले में सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मृतक के पिता को उसका हक दिलाते हुए न्याय किया गया। आयोग ने बीमा कंपनी को बीमा क्लेम का भुगतान करने का आदेश दिया है।
थाना श्रीनगर के बसौरा निवासी रामआसरे के बेटे रामकरन की नौ दिसंबर 2016 को गांव में बने तालाब में डूबने से मौत हो गई थी। रामकरन के नाम पर खेती थी और वह किसानी करता था। साथ ही घर पर दुकान भी चलाता था। ऐसे में पिता रामआसरे ने किसान सर्वहित बीमा योजना के तहत द ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी महोबा को सूचना दी। इसके बाद कंपनी की ओर से बीमा क्लेम के लिए फार्म भरवाकर एक महीने के बाद निस्तारण करने का आश्वासन दिया गया। रामआसरे ने एक महीने के बाद जब पता किया तो उसे बताया गया कि उसका क्लेम का दावा निरस्त कर दिया गया है।
कोई रास्ता न देख रामआसरे ने 31 अगस्त 2017 को बीमा कम्पनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दाखिल किया। इस पर सुनवाई शुरू हुई। बीमा कंपनी की ओर से बताया गया कि रामकरन दिमागी रूप से कमजोर था और वह परिवार का मुखिया नहीं था। ऐसे में नियमों के अनुसार उसे बीमा लाभ नहीं दिया जा सकता था और इसलिए यह दावा खारिज किया गया है।
परिवाद की सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि किसान की मौत डूबने से हुई है और यह बीमा ऐसी घटनाओं को कवर करता है जबकि दिमागी रूप से कमजोर होने के संबंध में बीमा कंपनी की ओर से कोई ठोस चिकित्सीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के प्रधान न्यायाधीश राघवेंद्र और न्यायाधीश विनोद कुमार तिवारी ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को सुनने व साक्ष्यों के आधार पर बीमा कंपनी को रामकरन के पिता रामआसरे को बीमा की धनराशि पांच लाख रुपये सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ और 10 हजार रुपये मानसिक क्षति व पांच हजार रुपये वाद व्यय दो महीने के अंदर अदा करने का आदेश दिया है।
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थाना श्रीनगर के बसौरा निवासी रामआसरे के बेटे रामकरन की नौ दिसंबर 2016 को गांव में बने तालाब में डूबने से मौत हो गई थी। रामकरन के नाम पर खेती थी और वह किसानी करता था। साथ ही घर पर दुकान भी चलाता था। ऐसे में पिता रामआसरे ने किसान सर्वहित बीमा योजना के तहत द ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी महोबा को सूचना दी। इसके बाद कंपनी की ओर से बीमा क्लेम के लिए फार्म भरवाकर एक महीने के बाद निस्तारण करने का आश्वासन दिया गया। रामआसरे ने एक महीने के बाद जब पता किया तो उसे बताया गया कि उसका क्लेम का दावा निरस्त कर दिया गया है।
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कोई रास्ता न देख रामआसरे ने 31 अगस्त 2017 को बीमा कम्पनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दाखिल किया। इस पर सुनवाई शुरू हुई। बीमा कंपनी की ओर से बताया गया कि रामकरन दिमागी रूप से कमजोर था और वह परिवार का मुखिया नहीं था। ऐसे में नियमों के अनुसार उसे बीमा लाभ नहीं दिया जा सकता था और इसलिए यह दावा खारिज किया गया है।
परिवाद की सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि किसान की मौत डूबने से हुई है और यह बीमा ऐसी घटनाओं को कवर करता है जबकि दिमागी रूप से कमजोर होने के संबंध में बीमा कंपनी की ओर से कोई ठोस चिकित्सीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के प्रधान न्यायाधीश राघवेंद्र और न्यायाधीश विनोद कुमार तिवारी ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को सुनने व साक्ष्यों के आधार पर बीमा कंपनी को रामकरन के पिता रामआसरे को बीमा की धनराशि पांच लाख रुपये सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ और 10 हजार रुपये मानसिक क्षति व पांच हजार रुपये वाद व्यय दो महीने के अंदर अदा करने का आदेश दिया है।