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Mainpuri News: अनुदेशकों को जागी नौ साल के एरियर की उम्मीद
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मैनपुरी। जिले के जूनियर हाईस्कूल में कार्यरत 190 अनुदेशकों को पिछले नौ साल का एरियर मिलने व नियमितीकरण की उम्मीद बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार की पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) व सभी मॉडिफिकेशन आवेदन खारिज होने से अनुदेशकों में खुशी की लहर है। अनुदेशक सरकार से जल्द एरियर दिलाने की मांग कर रहे हैं। अनुदेशक संघ के अनुसार इससे लगभग नौ-नौ लाख रुपये एरियर प्राप्त होगा।
अनुदेशक एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को अपने आदेश में कहा कि इस मामले में 4 फरवरी 2026 को पारित निर्णय में पुनर्विचार की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है। अतः राज्य सरकार द्वारा दाखिल समीक्षा याचिका निरस्त की जाती है। तत्संबंधी सभी लंबित संशोधन-स्थगन अर्जियां स्वतः निस्तारित मानी जाती हैं। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व के आदेश में कहा था कि एक दशक से अधिक समय से अनुबंधित अनुदेशकों को मात्र 7000 रुपये मासिक मानदेय पर रखना अनुचित है। साथ ही 2017-18 से 17 हजार रुपये मासिक मानदेय देने और उस समय से देय अंतर की राशि (एरियर) भुगतान के आदेश दिए थे। उन्होंने कहा कि इस आदेश के अनुसार जिले के 192 अनुदेशकों को जल्द एरियर मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
सरकार उच्चतम न्यायालय द्वारा चार फरवरी को दिए गए फैसले के क्रम में अनुदेशकों के स्थायीकरण व मानदेय संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुपालन के लिए जल्द शासनादेश जारी करें। साथ ही अनुदेशकों के बकाया मानदेय-एरियर का नियमसंगत भुगतान सुनिश्चित किया जाए। - भानु प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष, अनुदेशक संघ
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न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप सरकार स्थायी नीति तैयार करे। इससे कि लंबे समय से मात्र 7000 के मानदेय पर नौकरी करने वाले अनुदेशकों को राहत मिल सके। सरकार को न्यायालय के आदेश का जल्द पालन करना चाहिए।
आशीष सक्सेना, अनुदेशक
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अनुदेशक एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को अपने आदेश में कहा कि इस मामले में 4 फरवरी 2026 को पारित निर्णय में पुनर्विचार की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है। अतः राज्य सरकार द्वारा दाखिल समीक्षा याचिका निरस्त की जाती है। तत्संबंधी सभी लंबित संशोधन-स्थगन अर्जियां स्वतः निस्तारित मानी जाती हैं। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व के आदेश में कहा था कि एक दशक से अधिक समय से अनुबंधित अनुदेशकों को मात्र 7000 रुपये मासिक मानदेय पर रखना अनुचित है। साथ ही 2017-18 से 17 हजार रुपये मासिक मानदेय देने और उस समय से देय अंतर की राशि (एरियर) भुगतान के आदेश दिए थे। उन्होंने कहा कि इस आदेश के अनुसार जिले के 192 अनुदेशकों को जल्द एरियर मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
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सरकार उच्चतम न्यायालय द्वारा चार फरवरी को दिए गए फैसले के क्रम में अनुदेशकों के स्थायीकरण व मानदेय संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुपालन के लिए जल्द शासनादेश जारी करें। साथ ही अनुदेशकों के बकाया मानदेय-एरियर का नियमसंगत भुगतान सुनिश्चित किया जाए। - भानु प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष, अनुदेशक संघ
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न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप सरकार स्थायी नीति तैयार करे। इससे कि लंबे समय से मात्र 7000 के मानदेय पर नौकरी करने वाले अनुदेशकों को राहत मिल सके। सरकार को न्यायालय के आदेश का जल्द पालन करना चाहिए।
आशीष सक्सेना, अनुदेशक