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Mau News: 23 चिकित्सकों की तैनाती, साढ़े नौ बजे तक केवल एक डॉक्टर इलाज करते मिले
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जिला अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सक के इंतजार में बैठे मरीज,चिकित्सक नही पहुंचे।संवाद
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इलाज के अभाव में मंगलवार को मरीज की मौत के बाद अस्पताल में डॉक्टरों की उपस्थिति की पड़ताल करने बुधवार को टीम पहुंची।साढ़े नौ बजे तक 23 में से केवल एक डॉक्टर इलाज करते मिले।
जिला अस्पताल में हलधरपुर थाना क्षेत्र के देवदह गांव से पेट की समस्या को लेकर सुब्बन ने अपनी पीड़ा सुनाई। उन्होंने कहा कि हमरे पेटवा में कई दिन से गैस बनत रहे, पैसा न रहे, बाकी उधार लेकर 22 किलो मीटर देवदह गांव से भोर में ही निकल गईनी की डॉक्टर साहब के समय से दिखा देईब।
आठ बजे से साढ़े नौ बज गईल लेकिन डॉक्टर साहब अब तक ना भेंटाइना। बाकी एक दलाल मिलल और हमरा के बहकाकर बाहर अल्ट्रासाउंड की जांच कराए खातिर एक दूसर अस्पताल लेकर पहुंचल। यहां हमरा से 800 रुपया मांगल गईल, जेकरा सुनले के बाद हम वापस आ गईने।
सुबह आठ बजे पहुंची टीम को गेट बंद मिला, जो कि थोड़ी देर बाद खुला। यहां सबसे पहले रजिस्ट्रेशन काउंटर पर तैनात कर्मचारी पहुंचे, जहां कुछ देर में मरीजों ने पर्चा भी कटवा लिया।
इस बीच साढ़े नौ बजे तक 23 में से एक डॉक्टर राकेश चौधरी अपने चेंबर में पहुंचे दिखे जबकि अन्य डॉक्टरों का चेंबर खाली या बंद मिला। टीम सुबह आठ बजे से साढ़े नौ बजे तक रही।
इस दौरान इलाज के लिए डॉक्टरों का इंतजार में बैठे मरीजों से बात की। ओपीडी का समय आठ बजे भले हो लेकिन यहां तैनात डॉक्टर समय से नहीं पहुंचते, इस दौरान लिखापढ़ी होने पर राउंड करने का तर्क देकर अपना बचाव करते हैं।
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वह सुबह आठ बजे ओपीडी के खुलने से पहले आ गई थी, लेकिन डॉक्टर नहीं मिलने पर वह इंतजार में है। कई बार डॉक्टर के आने की सूचना पर अस्पताल के दूसरे कर्मचारी गुस्सा होने पर वह चुपचाप डॉक्टर के आने का इंतजार कर रही है। - रूबी सिंह, शाहूपुर
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हमारे पेट में कई दिनों से गैस बन रही थी। उधार लेकर 22 किलोमीटर दूर से सुबह ही निकल पड़े ताकि समय से डॉक्टर साहब को दिखा सकूं। अस्पताल पहुंचने के बाद सुबह आठ बजे से साढ़े नौ बजे तक डॉक्टर साहब नहीं आए। - सुब्बन, देवदह
हम बुखार से पीड़ित हैं, पहले इलाज पाने के इंतजार में सुबह छह बजे से ही घर से निकल साढ़े सात बजे अस्पताल आ गए थे। दस किमी दूर से आए हैं अभी तक डॉक्टर नहीं आए हैं।- शंभू, मरीज
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अपनी मौसी का सिटी स्कैन कराने के लिए दो दिन से चक्कर काट रहे हैं। मंगलवार को डॉक्टर के समय से पहले उठ जाने के चलते उसका सिटी स्कैन नहीं हो सका। आज जब वह कराने पहुंचा तो महिला स्वास्थ्यकर्मी ने सर्वर ठप होने की बात कही। - स्वामीनाथ, कोपागंज
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कोट
सीएमएस डॉ. धनज्जय कुमार ने बताया कि ओपीडी समय में डॉक्टरों की उपस्थिति अनिवार्य है, गायब डॉक्टरों से जानकारी ली जाएगी। वहीं मंगलवार को रूना राजभर की मौत को संज्ञान में लेकर ड्यूटी पर तैनात इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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मरीज की मौत पर, ईएमओ से मांगा गया स्पष्टीकरण
मऊ। ओपीडी समय में डॉक्टर गायब न रहे उसके लिए डीएम प्रवीण मिश्रा, तत्कालीन सीडीओ प्रशांत नागर ने कई बार निरीक्षण कर चुके हैं। बावजूद इसमें सुधार होते नहीं दिख रहा है। मंगलवार को गाजीपुर जिले के सुरवपाली निवासी रूना राजभर को चार घंटे तक उपचार नहीं मिलने से अस्पताल में मौत हो गई थी। इस मामले में ईएमओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
बेहतर उपचार और नजदीक समझकर गाजीपुर के जिला अस्पताल के बजाए उसे मऊ जिला अस्पताल वीर बहादुर अपने भाई रूना को लेकर पहुंचा था। वीर बहादूर ने बताया कि अस्पताल आने के बाद वह पहले इमरजेंसी में गया, जहां चिकित्सक ने ओपीडी में उपचार कराने को कहा।
ओपीडी में आने के बाद चिकित्सक उसे कई चेंबरों का चक्कर लगवाया। इस दौरान भाई की हालत और भी गंभीर होती गई। बताया कि इमरजेंसी से लेकर ओपीडी का चक्कर वह भाई को गोद में लेकर काटता रहा।
अस्पताल की तरफ से उसे किसी ने स्ट्रेचर नहीं दिया। उपचार के लिए जिस चेंबर में गया किसी चिकित्सक ने भाई को छूना तक नहीं चाहा। दूर से देखकर वहां चले जाओ कहते रहे। सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक चक्कर लगाते समय ही भाई ने दम तोड़ दिया। संवाद
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जिला अस्पताल में हलधरपुर थाना क्षेत्र के देवदह गांव से पेट की समस्या को लेकर सुब्बन ने अपनी पीड़ा सुनाई। उन्होंने कहा कि हमरे पेटवा में कई दिन से गैस बनत रहे, पैसा न रहे, बाकी उधार लेकर 22 किलो मीटर देवदह गांव से भोर में ही निकल गईनी की डॉक्टर साहब के समय से दिखा देईब।
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आठ बजे से साढ़े नौ बज गईल लेकिन डॉक्टर साहब अब तक ना भेंटाइना। बाकी एक दलाल मिलल और हमरा के बहकाकर बाहर अल्ट्रासाउंड की जांच कराए खातिर एक दूसर अस्पताल लेकर पहुंचल। यहां हमरा से 800 रुपया मांगल गईल, जेकरा सुनले के बाद हम वापस आ गईने।
सुबह आठ बजे पहुंची टीम को गेट बंद मिला, जो कि थोड़ी देर बाद खुला। यहां सबसे पहले रजिस्ट्रेशन काउंटर पर तैनात कर्मचारी पहुंचे, जहां कुछ देर में मरीजों ने पर्चा भी कटवा लिया।
इस बीच साढ़े नौ बजे तक 23 में से एक डॉक्टर राकेश चौधरी अपने चेंबर में पहुंचे दिखे जबकि अन्य डॉक्टरों का चेंबर खाली या बंद मिला। टीम सुबह आठ बजे से साढ़े नौ बजे तक रही।
इस दौरान इलाज के लिए डॉक्टरों का इंतजार में बैठे मरीजों से बात की। ओपीडी का समय आठ बजे भले हो लेकिन यहां तैनात डॉक्टर समय से नहीं पहुंचते, इस दौरान लिखापढ़ी होने पर राउंड करने का तर्क देकर अपना बचाव करते हैं।
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वह सुबह आठ बजे ओपीडी के खुलने से पहले आ गई थी, लेकिन डॉक्टर नहीं मिलने पर वह इंतजार में है। कई बार डॉक्टर के आने की सूचना पर अस्पताल के दूसरे कर्मचारी गुस्सा होने पर वह चुपचाप डॉक्टर के आने का इंतजार कर रही है। - रूबी सिंह, शाहूपुर
हमारे पेट में कई दिनों से गैस बन रही थी। उधार लेकर 22 किलोमीटर दूर से सुबह ही निकल पड़े ताकि समय से डॉक्टर साहब को दिखा सकूं। अस्पताल पहुंचने के बाद सुबह आठ बजे से साढ़े नौ बजे तक डॉक्टर साहब नहीं आए। - सुब्बन, देवदह
हम बुखार से पीड़ित हैं, पहले इलाज पाने के इंतजार में सुबह छह बजे से ही घर से निकल साढ़े सात बजे अस्पताल आ गए थे। दस किमी दूर से आए हैं अभी तक डॉक्टर नहीं आए हैं।- शंभू, मरीज
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अपनी मौसी का सिटी स्कैन कराने के लिए दो दिन से चक्कर काट रहे हैं। मंगलवार को डॉक्टर के समय से पहले उठ जाने के चलते उसका सिटी स्कैन नहीं हो सका। आज जब वह कराने पहुंचा तो महिला स्वास्थ्यकर्मी ने सर्वर ठप होने की बात कही। - स्वामीनाथ, कोपागंज
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सीएमएस डॉ. धनज्जय कुमार ने बताया कि ओपीडी समय में डॉक्टरों की उपस्थिति अनिवार्य है, गायब डॉक्टरों से जानकारी ली जाएगी। वहीं मंगलवार को रूना राजभर की मौत को संज्ञान में लेकर ड्यूटी पर तैनात इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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मरीज की मौत पर, ईएमओ से मांगा गया स्पष्टीकरण
मऊ। ओपीडी समय में डॉक्टर गायब न रहे उसके लिए डीएम प्रवीण मिश्रा, तत्कालीन सीडीओ प्रशांत नागर ने कई बार निरीक्षण कर चुके हैं। बावजूद इसमें सुधार होते नहीं दिख रहा है। मंगलवार को गाजीपुर जिले के सुरवपाली निवासी रूना राजभर को चार घंटे तक उपचार नहीं मिलने से अस्पताल में मौत हो गई थी। इस मामले में ईएमओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
बेहतर उपचार और नजदीक समझकर गाजीपुर के जिला अस्पताल के बजाए उसे मऊ जिला अस्पताल वीर बहादुर अपने भाई रूना को लेकर पहुंचा था। वीर बहादूर ने बताया कि अस्पताल आने के बाद वह पहले इमरजेंसी में गया, जहां चिकित्सक ने ओपीडी में उपचार कराने को कहा।
ओपीडी में आने के बाद चिकित्सक उसे कई चेंबरों का चक्कर लगवाया। इस दौरान भाई की हालत और भी गंभीर होती गई। बताया कि इमरजेंसी से लेकर ओपीडी का चक्कर वह भाई को गोद में लेकर काटता रहा।
अस्पताल की तरफ से उसे किसी ने स्ट्रेचर नहीं दिया। उपचार के लिए जिस चेंबर में गया किसी चिकित्सक ने भाई को छूना तक नहीं चाहा। दूर से देखकर वहां चले जाओ कहते रहे। सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक चक्कर लगाते समय ही भाई ने दम तोड़ दिया। संवाद
