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Mau News: आम के पेड़ पर फल आने के बाद कीटनाशक के छिड़काव से बचें
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कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अध्यक्ष डॉ. विनय सिंह के नेतृत्व में बुधवार को विज्ञान केंद्र की बागवानी का निरीक्षण किया गया।
केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र कुशवाहा ने बताया कि फूल आने के दौरान पाउडरी फफूंद रोग नियंत्रण के लिए घुलनशील सल्फर दो ग्राम प्रति लीटर का पहला छिड़काव फरवरी महीने में करना चाहिए और उसके 10-12 दिन बाद डाइनोकैप 1 मिली प्रति लीटर कैराथेन का दूसरा छिड़काव करें।
एक ही रसायन का बार-बार प्रयोग करने में सावधानी बरतनी चाहिए। पूरा फूल आने के दौरान कीटनाशकों के छिड़काव से बचना चाहिए। इससे परागण में मदद करने वाले लाभदायक कीटों की आबादी कम हो सकती है।
फरवरी माह में पौधों को नियमित रूप से 5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें। गर्म मौसम में छाल छेदक और तना छेदक लगने की संभावना बढ़ जाती है।
प्रत्येक पौधे का नियमित रूप से निरीक्षण करें और यदि दिखे तो क्षतिग्रस्त छिद्रों में डाइक्लोरोवास 10 मिली प्रति लीटर पानी में डालकर और उन्हें चिपचिपी मिट्टी से बंद करके नियंत्रित करें। दीमक और अन्य फफूंद रोगों के बार-बार होने से बचने के लिए तने पर 30 से 45 सेमी की ऊंचाई तक बोर्डो पेस्ट लगाएं।
मार्च में उर्वरकों के प्रयोग के तुरंत बाद गड्ढों की सिंचाई करें। अप्रैल माह में ड्रिप या कम से कम 5 दिनों के अंतराल पर बेसिन सिंचाई के माध्यम से नियमित सिंचाई सुनिश्चित करें। अप्रैल महीने में फलों का गिरना बहुत आम है।
जब फल मटर के आकार के हो जाएं तो नेफथलीन एसिटिक एसिड एनएए दो ग्राम प्रति 100 लीटर पानी का छिड़काव करके इस समस्या का प्रबंधन किया जा सकता है।
कुछ आम के पेड़ों पर दीमक भी देखी जाती है। जब फल मटर के आकार के हो जाएं तो सिंचाई शुरू कर देनी चाहिए और 10-15 दिन के अंतराल पर जारी रखनी चाहिए।
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केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र कुशवाहा ने बताया कि फूल आने के दौरान पाउडरी फफूंद रोग नियंत्रण के लिए घुलनशील सल्फर दो ग्राम प्रति लीटर का पहला छिड़काव फरवरी महीने में करना चाहिए और उसके 10-12 दिन बाद डाइनोकैप 1 मिली प्रति लीटर कैराथेन का दूसरा छिड़काव करें।
एक ही रसायन का बार-बार प्रयोग करने में सावधानी बरतनी चाहिए। पूरा फूल आने के दौरान कीटनाशकों के छिड़काव से बचना चाहिए। इससे परागण में मदद करने वाले लाभदायक कीटों की आबादी कम हो सकती है।
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फरवरी माह में पौधों को नियमित रूप से 5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें। गर्म मौसम में छाल छेदक और तना छेदक लगने की संभावना बढ़ जाती है।
प्रत्येक पौधे का नियमित रूप से निरीक्षण करें और यदि दिखे तो क्षतिग्रस्त छिद्रों में डाइक्लोरोवास 10 मिली प्रति लीटर पानी में डालकर और उन्हें चिपचिपी मिट्टी से बंद करके नियंत्रित करें। दीमक और अन्य फफूंद रोगों के बार-बार होने से बचने के लिए तने पर 30 से 45 सेमी की ऊंचाई तक बोर्डो पेस्ट लगाएं।
मार्च में उर्वरकों के प्रयोग के तुरंत बाद गड्ढों की सिंचाई करें। अप्रैल माह में ड्रिप या कम से कम 5 दिनों के अंतराल पर बेसिन सिंचाई के माध्यम से नियमित सिंचाई सुनिश्चित करें। अप्रैल महीने में फलों का गिरना बहुत आम है।
जब फल मटर के आकार के हो जाएं तो नेफथलीन एसिटिक एसिड एनएए दो ग्राम प्रति 100 लीटर पानी का छिड़काव करके इस समस्या का प्रबंधन किया जा सकता है।
कुछ आम के पेड़ों पर दीमक भी देखी जाती है। जब फल मटर के आकार के हो जाएं तो सिंचाई शुरू कर देनी चाहिए और 10-15 दिन के अंतराल पर जारी रखनी चाहिए।
