{"_id":"6a0cae8e44f8de2b190afe84","slug":"a-teenage-girl-lies-on-the-railway-track-insisting-on-marrying-a-boy-the-train-is-stopped-by-emergency-brakes-mau-news-c-295-1-svns1028-145724-2026-05-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: किशोर से शादी की जिद पर रेलवे ट्रैक पर लेटी किशोरी, इमरजेंसी ब्रेक लगाकर रोकी गई ट्रेन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: किशोर से शादी की जिद पर रेलवे ट्रैक पर लेटी किशोरी, इमरजेंसी ब्रेक लगाकर रोकी गई ट्रेन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
मुहम्मदाबाद गोहना रेलवे स्टेशन के पूर्वी फाटक के पास मंगलवार को एक किशोरी (16) शादी की जिद पर रेलवे ट्रैक पर लेट गई। उसी समय वहां से गुजर रही शाहगंज-बलिया पैसेंजर ट्रेन के चालक ने स्थिति देखकर इमरजेंसी ब्रेक लगाया। ट्रेन रुक गई और किशोरी की जान बच गई।
घटना के दौरान जिस किशोर(16) से शादी की जिद कर रही थी वह भी मौके पर मौजूद था। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। परिजनों के विरोध के बाद किशोरी ने दोबारा आत्महत्या का प्रयास करने की कोशिश की, लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों ने उसे रोक लिया। घटना के कारण ट्रेन लगभग 15 मिनट तक प्रभावित रही।
कोतवाल केके वर्मा ने बताया कि, मंगलवार सुबह लगभग 7:30 बजे शाहगंज से बलिया जाने वाली पैसेंजर ट्रेन स्थानीय स्टेशन से रवाना होकर लगभग 300 मीटर आगे पूर्वी फाटक के पास पहुंची थी। इसी दौरान ट्रैक किनारे एक किशोर और किशोरी मौजूद थे।
विज्ञापन
ट्रेन नजदीक पहुंचने पर किशोरी पटरियों के बीच चली गई। चालक ने तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी। इसके बाद गेटमैन मौके पर पहुंचा और किशोरी को सुरक्षित बाहर निकाला।
सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को अपने साथ ले गई। किशोरी कस्बे के एक मोहल्ले की रहने वाली है, जबकि किशोर कोतवाली क्षेत्र के पूर्वी हिस्से के एक गांव का निवासी है।
कोतवाल केके वर्मा ने बताया कि मामला जीआरपी क्षेत्र का है। सूचना पर स्थानीय पुलिस को मौके पर भेजा गया था। बाद में जीआरपी ने दोनों किशोरों को उनके परिजनों को सौंप दिया।
किशोरावस्था में अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण
डीसीएसके कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. योगेंद्रनाथ चौबे ने बताया कि किशोरावस्था में अभिभावकों को बच्चों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है। इस उम्र में किशोर स्वयं निर्णय लेने की प्रवृत्ति विकसित करने लगते हैं और कई बार भावनात्मक संबंधों को अलग दृष्टि से देखने लगते हैं। उन्होंने कहा कि भावनात्मक झटके, अस्वीकार किए जाने की भावना और सामाजिक दबाव कुछ किशोरों को मानसिक तनाव की ओर धकेल सकते हैं। ऐसे मामलों में संवाद, परामर्श और पारिवारिक सहयोग जरूरी है। एनसीडी क्लीनिक के नोडल अधिकारी डॉ. बीके यादव ने बताया कि किशोरावस्था में हार्मोनल बदलाव, भावनात्मक उतार-चढ़ाव और सामाजिक प्रभाव मानसिक दबाव बढ़ा सकते हैं। समय रहते परिवार और विशेषज्ञों की मदद मिलना जरूरी होता है।
घटना के दौरान जिस किशोर(16) से शादी की जिद कर रही थी वह भी मौके पर मौजूद था। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। परिजनों के विरोध के बाद किशोरी ने दोबारा आत्महत्या का प्रयास करने की कोशिश की, लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों ने उसे रोक लिया। घटना के कारण ट्रेन लगभग 15 मिनट तक प्रभावित रही।
विज्ञापन
विज्ञापन
कोतवाल केके वर्मा ने बताया कि, मंगलवार सुबह लगभग 7:30 बजे शाहगंज से बलिया जाने वाली पैसेंजर ट्रेन स्थानीय स्टेशन से रवाना होकर लगभग 300 मीटर आगे पूर्वी फाटक के पास पहुंची थी। इसी दौरान ट्रैक किनारे एक किशोर और किशोरी मौजूद थे।
Trending Videos
ट्रेन नजदीक पहुंचने पर किशोरी पटरियों के बीच चली गई। चालक ने तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी। इसके बाद गेटमैन मौके पर पहुंचा और किशोरी को सुरक्षित बाहर निकाला।
सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को अपने साथ ले गई। किशोरी कस्बे के एक मोहल्ले की रहने वाली है, जबकि किशोर कोतवाली क्षेत्र के पूर्वी हिस्से के एक गांव का निवासी है।
कोतवाल केके वर्मा ने बताया कि मामला जीआरपी क्षेत्र का है। सूचना पर स्थानीय पुलिस को मौके पर भेजा गया था। बाद में जीआरपी ने दोनों किशोरों को उनके परिजनों को सौंप दिया।
किशोरावस्था में अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण
डीसीएसके कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. योगेंद्रनाथ चौबे ने बताया कि किशोरावस्था में अभिभावकों को बच्चों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है। इस उम्र में किशोर स्वयं निर्णय लेने की प्रवृत्ति विकसित करने लगते हैं और कई बार भावनात्मक संबंधों को अलग दृष्टि से देखने लगते हैं। उन्होंने कहा कि भावनात्मक झटके, अस्वीकार किए जाने की भावना और सामाजिक दबाव कुछ किशोरों को मानसिक तनाव की ओर धकेल सकते हैं। ऐसे मामलों में संवाद, परामर्श और पारिवारिक सहयोग जरूरी है। एनसीडी क्लीनिक के नोडल अधिकारी डॉ. बीके यादव ने बताया कि किशोरावस्था में हार्मोनल बदलाव, भावनात्मक उतार-चढ़ाव और सामाजिक प्रभाव मानसिक दबाव बढ़ा सकते हैं। समय रहते परिवार और विशेषज्ञों की मदद मिलना जरूरी होता है।