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Mau News: सर्जिकल वार्ड में लगा कूलर खराब, इमरजेंसी वार्ड में एक ही कूलर... बदइंतजामी को मिल रही हवा
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भीषण गर्मी के बीच जिला अस्पताल का सर्जिकल वार्ड का कूलर खराब होने के कारण पंखे की हवा के बीच अ
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जिले में पिछले तापमान में एक बार फिर वृद्धि हुई है। ऐसे में गर्म हवाओं के थपेड़ों से डिहाइड्रेशन, उल्टी और दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ी है। जिला अस्पताल में सर्जिकल वार्ड में लगा कूलर खराब है। वहीं इमरजेंसी वार्ड में केवल एक कूलर लगा है जिसकी हवा केवल एक मरीज तक पहुंच पा रही थी।
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि भीषण गर्मी से निपटने के लिए जिला अस्पताल में 10 तथा प्रत्येक सीएचसी पर छह-छह बेड का लू वार्ड बनाया गया है। दावे के विपरीत मंगलवार को वार्डों की पड़ताल में केवल तीन स्थानों पर एक-एक मरीज भर्ती मिले, जबकि निजी अस्पतालों में डायरिया, पेट दर्द और मौसम परिवर्तन से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या अधिक है।
मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लू से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया। जिला अस्पताल में बनाए गए 10 बेड के विशेष लू वार्ड में एसी लगा मिला, लेकिन वहां केवल बलिया जिले के रसड़ा क्षेत्र की निवासी मुनेश्वरी भर्ती मिलीं।
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वहीं, अन्य वार्डों की पड़ताल में इमरजेंसी वार्ड में एक कूलर लगा मिला, लेकिन उसकी हवा केवल एक मरीज तक पहुंचती दिखी। सर्जिकल वार्ड में भी एक कूलर लगा मिला, लेकिन यहां भर्ती गाजीपुर जिले के उरैनी निवासी सोनमती ने बताया कि कूलर कई दिनों से खराब पड़ा है। उन्होंने बताया कि 14 मई को बच्चेदानी का ऑपरेशन होने के बाद से वह यहां भर्ती हैं।
गाजीपुर के हैदरा निवासी चिंतादेवी ने बताया कि वह भी ऑपरेशन के बाद बीते तीन दिनों से भर्ती हैं। इस संबंध में कई बार शिकायत की गई, लेकिन केवल आश्वासन मिला। वहीं डेंगू वार्ड में सात मरीज भर्ती मिले, लेकिन वहां भी कूलर नहीं लगा मिला।
सीएचसी में वार्ड बने, कूलर लगे, फिर भी मरीजों ने बनाई दूरी
जिले के रतनपुरा, मुहम्मदाबाद गोहना, घोसी, कोपागंज, बड़रांव, दोहरीघाट सहित सभी 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर छह-छह बेड के लू वार्ड बनाए गए हैं। घोसी सीएचसी में एसी लगाया गया है, जबकि अन्य सीएचसी के वार्डों में कूलर की व्यवस्था की गई है। पड़ताल के दौरान दोहरीघाट में बने वार्ड में केवल एक मरीज भर्ती मिला। इसके अलावा किसी भी सीएचसी में ओआरएस कॉर्नर नहीं मिला। वहीं, लू से निपटने के लिए जरूरी जीवनरक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक भी उपलब्ध नहीं मिला।
कोल्ड रूम में होनी चाहिए ये सुविधाएं
कमरे में पर्याप्त संख्या में एयर कंडीशनर, कूलर और पंखे लगे होने चाहिए, ताकि कमरा ठंडा बना रहे। लू से प्रभावित मरीजों के उपचार के लिए सभी जीवनरक्षक दवाएं, इंजेक्शन और मॉनिटरिंग मशीनें उपलब्ध रहनी चाहिए। शरीर में पानी की कमी रोकने के लिए ओआरएस घोल, ग्लूकोज और ठंडे पानी की व्यवस्था रहनी चाहिए। शरीर का तापमान नियंत्रित करने के लिए कोल्ड कंप्रेस, आइस पैक और ठंडे स्पंज भी उपलब्ध होने चाहिए।
ओपीडी में डायरिया-पेट दर्द के मरीज बढ़े
जिला अस्पताल की ओपीडी मंगलवार को 900 से अधिक रही। इनमें 250 से अधिक मरीज मौसम में बदलाव के कारण बीमार होकर पहुंचे थे। इनमें डायरिया, बुखार और पेट दर्द के मरीज शामिल थे। इनमें लगभग 50 प्रतिशत बुजुर्ग मरीज थे। इसी तरह जिले की 10 सीएचसी की करीब 500 से अधिक ओपीडी में लगभग 20 प्रतिशत मरीज इन बीमारियों से प्रभावित मिले। इसके बावजूद जिला अस्पताल और सीएचसी में भर्ती मरीजों की संख्या बेहद कम रही। दूसरी ओर निजी अस्पतालों में इन्हीं बीमारियों के मरीजों के कारण बेड भरे होने की बात सामने आई।
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि भीषण गर्मी से निपटने के लिए जिला अस्पताल में 10 तथा प्रत्येक सीएचसी पर छह-छह बेड का लू वार्ड बनाया गया है। दावे के विपरीत मंगलवार को वार्डों की पड़ताल में केवल तीन स्थानों पर एक-एक मरीज भर्ती मिले, जबकि निजी अस्पतालों में डायरिया, पेट दर्द और मौसम परिवर्तन से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या अधिक है।
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मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लू से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया। जिला अस्पताल में बनाए गए 10 बेड के विशेष लू वार्ड में एसी लगा मिला, लेकिन वहां केवल बलिया जिले के रसड़ा क्षेत्र की निवासी मुनेश्वरी भर्ती मिलीं।
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वहीं, अन्य वार्डों की पड़ताल में इमरजेंसी वार्ड में एक कूलर लगा मिला, लेकिन उसकी हवा केवल एक मरीज तक पहुंचती दिखी। सर्जिकल वार्ड में भी एक कूलर लगा मिला, लेकिन यहां भर्ती गाजीपुर जिले के उरैनी निवासी सोनमती ने बताया कि कूलर कई दिनों से खराब पड़ा है। उन्होंने बताया कि 14 मई को बच्चेदानी का ऑपरेशन होने के बाद से वह यहां भर्ती हैं।
गाजीपुर के हैदरा निवासी चिंतादेवी ने बताया कि वह भी ऑपरेशन के बाद बीते तीन दिनों से भर्ती हैं। इस संबंध में कई बार शिकायत की गई, लेकिन केवल आश्वासन मिला। वहीं डेंगू वार्ड में सात मरीज भर्ती मिले, लेकिन वहां भी कूलर नहीं लगा मिला।
सीएचसी में वार्ड बने, कूलर लगे, फिर भी मरीजों ने बनाई दूरी
जिले के रतनपुरा, मुहम्मदाबाद गोहना, घोसी, कोपागंज, बड़रांव, दोहरीघाट सहित सभी 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर छह-छह बेड के लू वार्ड बनाए गए हैं। घोसी सीएचसी में एसी लगाया गया है, जबकि अन्य सीएचसी के वार्डों में कूलर की व्यवस्था की गई है। पड़ताल के दौरान दोहरीघाट में बने वार्ड में केवल एक मरीज भर्ती मिला। इसके अलावा किसी भी सीएचसी में ओआरएस कॉर्नर नहीं मिला। वहीं, लू से निपटने के लिए जरूरी जीवनरक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक भी उपलब्ध नहीं मिला।
कोल्ड रूम में होनी चाहिए ये सुविधाएं
कमरे में पर्याप्त संख्या में एयर कंडीशनर, कूलर और पंखे लगे होने चाहिए, ताकि कमरा ठंडा बना रहे। लू से प्रभावित मरीजों के उपचार के लिए सभी जीवनरक्षक दवाएं, इंजेक्शन और मॉनिटरिंग मशीनें उपलब्ध रहनी चाहिए। शरीर में पानी की कमी रोकने के लिए ओआरएस घोल, ग्लूकोज और ठंडे पानी की व्यवस्था रहनी चाहिए। शरीर का तापमान नियंत्रित करने के लिए कोल्ड कंप्रेस, आइस पैक और ठंडे स्पंज भी उपलब्ध होने चाहिए।
ओपीडी में डायरिया-पेट दर्द के मरीज बढ़े
जिला अस्पताल की ओपीडी मंगलवार को 900 से अधिक रही। इनमें 250 से अधिक मरीज मौसम में बदलाव के कारण बीमार होकर पहुंचे थे। इनमें डायरिया, बुखार और पेट दर्द के मरीज शामिल थे। इनमें लगभग 50 प्रतिशत बुजुर्ग मरीज थे। इसी तरह जिले की 10 सीएचसी की करीब 500 से अधिक ओपीडी में लगभग 20 प्रतिशत मरीज इन बीमारियों से प्रभावित मिले। इसके बावजूद जिला अस्पताल और सीएचसी में भर्ती मरीजों की संख्या बेहद कम रही। दूसरी ओर निजी अस्पतालों में इन्हीं बीमारियों के मरीजों के कारण बेड भरे होने की बात सामने आई।

भीषण गर्मी के बीच जिला अस्पताल का सर्जिकल वार्ड का कूलर खराब होने के कारण पंखे की हवा के बीच अ