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Mau News: 30 फीसदी महंगे हुए प्लास्टिक के उत्पाद, रसोई से लेकर बच्चों के प्ले-रूम तक प्रभावित
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नगर के बालनिकेतन स्थित दुकान पर बिकती प्लास्टिक की कुर्सी।संवाद
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पश्चिम एशिया में युद्ध का असर अब देश में कई सामान की कीमतों पर दिखना शुरू हो गया है। खाद्य पदार्थ महंगे होने के साथ ही अब कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने से उत्पाद भी महंगे होने लगे हैं।
प्लास्टिक के कच्चे माल (पॉलीमर और दाना) की कीमतों में बढ़ोतरी ने प्लास्टिक उद्योग की कमर तोड़ दी है। इसका सीधा असर रसोई से लेकर बच्चों के प्ले-रूम तक पड़ रहा है।
प्लास्टिक दाने की आपूर्ति प्रभावित होने से इनसे बनने वाले उत्पादों की कमी हो गई है। इनमें प्लास्टिक से बनी बाल्टी, केतली, डस्टबिन, रसोई में प्रयोग होने वाली प्लास्टिक की वस्तुएं समेत बच्चों के खेल-खिलौने भी महंगे होने लगे हैं।
उत्पादन कम होने से इनके दाम 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। घरों में उपयोग होने वाले प्लास्टिक के बर्तन, टब, ड्रम महंगे हुए हैं और इसका असर शहर से लेकर गांवों में देखने को मिल रहा है।
सहादतपुरा के दुकानदार विनोद ने बताया कि 400 रुपये वाली कुर्सी अब 428 रुपये की, प्लास्टिक की 115 रुपये की छह बोतलों का सेट 140 रुपये, 250 रुपये वाला डस्टबिन 280 रुपये में बेचा जा रहा है। इस प्रकार 150 रुपये की बाल्टी भी 165 रुपये में बिक रही है।
किचन से लेकर कंस्ट्रक्शन तक असर
खुरहट बाजार निवासी दुकानदार रमेश ने बताया कि प्लास्टिक पाइप, फिटिंग, बाल्टी, टब और किचन के डिब्बों की कीमतों में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हो चुकी है। जो पानी की टंकी पहले 2000 रुपये में मिल रही थी, उसकी कीमत अब 3000 से 3500 रुपये के पार हो गई है। भवन निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पीवीसी पाइपों के दाम बढ़ने से घर बनाना भी महंगा हो गया है।
खिलौना बाजार भी हुआ प्रभावित
दुकानदार मनोज राय ने बताया कि प्लास्टिक से बनने वाले खेल-खिलौने, झूले और अन्य एजुकेशनल किट्स के दाम बढ़ने से अभिभावकों को अब अधिक जेब ढीली करनी पड़ेगी। व्यापारियों का मानना है कि यदि कच्चे माल की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो आगामी त्योहारों के सीजन में ये कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।
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प्लास्टिक के कच्चे माल (पॉलीमर और दाना) की कीमतों में बढ़ोतरी ने प्लास्टिक उद्योग की कमर तोड़ दी है। इसका सीधा असर रसोई से लेकर बच्चों के प्ले-रूम तक पड़ रहा है।
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प्लास्टिक दाने की आपूर्ति प्रभावित होने से इनसे बनने वाले उत्पादों की कमी हो गई है। इनमें प्लास्टिक से बनी बाल्टी, केतली, डस्टबिन, रसोई में प्रयोग होने वाली प्लास्टिक की वस्तुएं समेत बच्चों के खेल-खिलौने भी महंगे होने लगे हैं।
उत्पादन कम होने से इनके दाम 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। घरों में उपयोग होने वाले प्लास्टिक के बर्तन, टब, ड्रम महंगे हुए हैं और इसका असर शहर से लेकर गांवों में देखने को मिल रहा है।
सहादतपुरा के दुकानदार विनोद ने बताया कि 400 रुपये वाली कुर्सी अब 428 रुपये की, प्लास्टिक की 115 रुपये की छह बोतलों का सेट 140 रुपये, 250 रुपये वाला डस्टबिन 280 रुपये में बेचा जा रहा है। इस प्रकार 150 रुपये की बाल्टी भी 165 रुपये में बिक रही है।
किचन से लेकर कंस्ट्रक्शन तक असर
खुरहट बाजार निवासी दुकानदार रमेश ने बताया कि प्लास्टिक पाइप, फिटिंग, बाल्टी, टब और किचन के डिब्बों की कीमतों में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हो चुकी है। जो पानी की टंकी पहले 2000 रुपये में मिल रही थी, उसकी कीमत अब 3000 से 3500 रुपये के पार हो गई है। भवन निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पीवीसी पाइपों के दाम बढ़ने से घर बनाना भी महंगा हो गया है।
खिलौना बाजार भी हुआ प्रभावित
दुकानदार मनोज राय ने बताया कि प्लास्टिक से बनने वाले खेल-खिलौने, झूले और अन्य एजुकेशनल किट्स के दाम बढ़ने से अभिभावकों को अब अधिक जेब ढीली करनी पड़ेगी। व्यापारियों का मानना है कि यदि कच्चे माल की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो आगामी त्योहारों के सीजन में ये कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।