मऊ। जल निकायों के लिए समस्या मानी जाने वाली जलकुंभी अब बड़रांव ब्लॉक की ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का जरिया बन रही है। जलजीविका संस्था से जुड़ी महिला समूहों की सदस्य जलकुंभी के रेशों से लेडीज पर्स, हैंडबैग, ढोलची, पेन होल्डर, योगा मैट, पूजा आसनी, फाइल कवर, टोकरियां, सजावटी सामान और पारंपरिक राखियां तैयार कर रही हैं।
इससे जहां महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिला है, वहीं जल निकायों की सफाई और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। जलजीविका संस्था पिछले तीन वर्षों से बड़रांव ब्लॉक के विभिन्न गांवों में महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन के लिए काम कर रही है। पकड़ी बुजुर्ग स्थित जलजीविका महिला स्वरोजगार समूह की महिलाओं को जलकुंभी के व्यावसायिक उपयोग का चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया गया। प्रसंस्करण के बाद जलकुंभी के रेशों से तैयार उत्पादों की गुणवत्ता जांच कर उन्हें स्थानीय और व्यापक बाजार में बिक्री के लिए तैयार किया गया है। इस पहल को बजाज सीएसआर और हर्बालाइफ का सहयोग मिल रहा है।