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Mau News: सरकारी कार्य में बाधा डालने और धमकी के मामले में रमेश सिंह काका को एक साल की सजा
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रमेश सिंह काका
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह ने सरकारी कार्य में अवरोध करने व धमकी देने के मामले में परदहां ब्लॉक के पूर्व प्रमुख रमेश सिंह काका को सुनवाई के बाद दोषी पाया।
उसे एक वर्ष की सजा के साथ ही कुल 7 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। मामला शहर कोतवाली क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार तत्कालीन पुलिस लाइन गोरखपुर में तैनात एसआई नेहरू प्रसाद की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई।
इसमें परदहां ब्लॉक के पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश सिंह काका पुत्र दिवंगत रामवृक्ष सिंह निवासी कैथवली, थाना सरायलखंसी को नामजद किया गया। वादी का कथन था कि वह 4 अप्रैल 2007 को दीवानी न्यायालय में पेशी के लिए रमेश सिंह काका को लेकर आया था।
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इस दौरान दोपहर 1.30 बजे रमेश सिंह काका ने उसके ऊपर आपराधिक बल का प्रयोग किया तथा गाली-गलौज की और साथी कर्मचारी विजय बहादुर यादव का कॉलर पकड़ लिया तथा धमकी दी और अदालत व जेल जाने से रोका।
पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। न्यायालय में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए अभियोजन अधिकारी ने पांच गवाहों को पेश कर पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है।
सीजेएम ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी रमेश सिंह काका को सरकारी कार्य में अवरोध करने व धमकी देने के मामले में दोषी पाया।
दोषी पाए जाने के बाद उसे सरकारी कार्य में अवरोध करने के मामले में एक वर्ष की सजा के साथ 5 हजार रुपये अर्थदंड तथा धमकी देने के मामले में छह माह की सजा के साथ 2 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया।
मामले में गवाहों को न्यायालय में पेश करने में पैरवीकार आरक्षी आशीष कुमार का विशेष योगदान रहा।
रमेश सिंह काका को लगातार सातवें मामले में सजा सुनाई गई
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह ने परदहां ब्लॉक के पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश सिंह काका को बृहस्पतिवार को शहर कोतवाली के मामले में सरकारी कार्य में अवरोध करने और धमकी देने के मामले में एक वर्ष की सजा के साथ 7 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
इस प्रकार बृहस्पतिवार को रमेश सिंह काका को सातवें मामले में दोषी पाते हुए सजा सुनाई गई। रमेश सिंह काका को दीवानी कचहरी से यह लगातार सातवीं बार दोषी पाते हुए सजा सुनाई गई है।
बता दें कि इसके पूर्व 8 अप्रैल को उपनिरीक्षक को धमकी देने के पांचवें मामले में 6 माह की सजा के साथ 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया था। जून 2025 में शहर कोतवाली के जालसाजी के मामले में 4 वर्ष की सजा का निर्णय सुनाया गया था।
वहीं सरायलखंसी थाना क्षेत्र के कुशमौर चौकी के पास उपनिरीक्षक भगत सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों को धमकी देने के मामले में 4 माह की सजा के साथ 3 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया था।
वहीं शहर कोतवाली के एक अन्य मामले में वाराणसी कारागार से दीवानी कचहरी मऊ में पेशी पर आए रमेश सिंह काका ने सुरक्षा में लगे उपनिरीक्षक राम बहादुर चौधरी का रिवॉल्वर छीनकर भागने का प्रयास किया और सरकारी कार्य में अवरोध उत्पन्न किया, जिसमें उन्हें 6 माह की सजा के साथ 5 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया था।
वहीं सरायलखंसी थाना क्षेत्र के कुशमौर में स्थित गन्ना बीज अनुसंधान के वैज्ञानिकों को धमकी देने के मामले में 6 माह की सजा का निर्णय सुनाया गया था। साथ ही गत 12 मई को शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला भीटी में रामकिशुन मल्लाह की हत्या के मामले में एडीजे प्रथम बाकर शमीम रिजवी ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
उसे एक वर्ष की सजा के साथ ही कुल 7 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। मामला शहर कोतवाली क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार तत्कालीन पुलिस लाइन गोरखपुर में तैनात एसआई नेहरू प्रसाद की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई।
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इसमें परदहां ब्लॉक के पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश सिंह काका पुत्र दिवंगत रामवृक्ष सिंह निवासी कैथवली, थाना सरायलखंसी को नामजद किया गया। वादी का कथन था कि वह 4 अप्रैल 2007 को दीवानी न्यायालय में पेशी के लिए रमेश सिंह काका को लेकर आया था।
इस दौरान दोपहर 1.30 बजे रमेश सिंह काका ने उसके ऊपर आपराधिक बल का प्रयोग किया तथा गाली-गलौज की और साथी कर्मचारी विजय बहादुर यादव का कॉलर पकड़ लिया तथा धमकी दी और अदालत व जेल जाने से रोका।
पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। न्यायालय में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए अभियोजन अधिकारी ने पांच गवाहों को पेश कर पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है।
सीजेएम ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी रमेश सिंह काका को सरकारी कार्य में अवरोध करने व धमकी देने के मामले में दोषी पाया।
दोषी पाए जाने के बाद उसे सरकारी कार्य में अवरोध करने के मामले में एक वर्ष की सजा के साथ 5 हजार रुपये अर्थदंड तथा धमकी देने के मामले में छह माह की सजा के साथ 2 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया।
मामले में गवाहों को न्यायालय में पेश करने में पैरवीकार आरक्षी आशीष कुमार का विशेष योगदान रहा।
रमेश सिंह काका को लगातार सातवें मामले में सजा सुनाई गई
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह ने परदहां ब्लॉक के पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश सिंह काका को बृहस्पतिवार को शहर कोतवाली के मामले में सरकारी कार्य में अवरोध करने और धमकी देने के मामले में एक वर्ष की सजा के साथ 7 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
इस प्रकार बृहस्पतिवार को रमेश सिंह काका को सातवें मामले में दोषी पाते हुए सजा सुनाई गई। रमेश सिंह काका को दीवानी कचहरी से यह लगातार सातवीं बार दोषी पाते हुए सजा सुनाई गई है।
बता दें कि इसके पूर्व 8 अप्रैल को उपनिरीक्षक को धमकी देने के पांचवें मामले में 6 माह की सजा के साथ 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया था। जून 2025 में शहर कोतवाली के जालसाजी के मामले में 4 वर्ष की सजा का निर्णय सुनाया गया था।
वहीं सरायलखंसी थाना क्षेत्र के कुशमौर चौकी के पास उपनिरीक्षक भगत सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों को धमकी देने के मामले में 4 माह की सजा के साथ 3 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया था।
वहीं शहर कोतवाली के एक अन्य मामले में वाराणसी कारागार से दीवानी कचहरी मऊ में पेशी पर आए रमेश सिंह काका ने सुरक्षा में लगे उपनिरीक्षक राम बहादुर चौधरी का रिवॉल्वर छीनकर भागने का प्रयास किया और सरकारी कार्य में अवरोध उत्पन्न किया, जिसमें उन्हें 6 माह की सजा के साथ 5 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया था।
वहीं सरायलखंसी थाना क्षेत्र के कुशमौर में स्थित गन्ना बीज अनुसंधान के वैज्ञानिकों को धमकी देने के मामले में 6 माह की सजा का निर्णय सुनाया गया था। साथ ही गत 12 मई को शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला भीटी में रामकिशुन मल्लाह की हत्या के मामले में एडीजे प्रथम बाकर शमीम रिजवी ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।