सीमा पर युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। देश में पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब देने की मांग उठ रही है। ऐसे में रिटायर्ड कैप्टन जेपीएस राणा (80) का जोश और जज्बा आज भी ऐसा ही है, जैसा आर्मी ज्वाइन करते समय था। कैप्टन की पांचवीं पीढ़ी सेना में सेवा दे रही है-
#airstrike: उम्र 80 की... जंग का जज्बा आज भी बरकरार, पांचवीं पीढ़ी सेना में दे रही सेवा
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मूल रूप से बुलंदशहर के गांव अलखारहीमपुर निवासी कैप्टन जेपीएस राणा रिटायर्ड वर्तमान में पल्लवपुरम फेज दो में रहते हैं। वह 1990 में सेना से रिटायर्ड हुए थे। कैप्टन राणा ने बताया कि उनके दादा दीवान सिंह आर्मी में सिपाही थे। इसके बाद उनके बेटे मुख्यत्यार सिंह मेजर बने। महताब सिंह के बेटे कैप्टन जेपीएस राणा और दूसरे बेटे वीरपाल सिंह सेना में कर्नल बने। बीरपाल सिंह का बेटा भूपेंद्र सिंह भी फौज में कर्नल है और वर्तमान में गुवाहाटी में तैनात है।
भारत की तकनीक से डर रहा पाक
कैप्टन राणा ने कहा कि भारत की तकनीकी से पाकिस्तान डर रहा है। 21 मिनट में मिराज ने पाकिस्तान की सीमा में 80 किमी अंदर घुसकर दिखा दिया कि वह टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में पाकिस्तान से कई गुना आगे है।
अब कर रहे समाज सेवा
कैप्टन अब समाज सेवा में लगे हैं। सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन पल्लवपुरम के संरक्षक हैं और स्वाभिमान कल्याण समिति के अध्यक्ष हैं। हर साल मेधावियों को सम्मानित करना और गरीब कन्याओं के विवाह कराने के अलावा कांवड़ यात्रा में सहयोग करते हैं।
पिता के साथ बेटों ने संभाला था मोर्चा
कैप्टन जेपीएस राणा ने बताया कि 1965 की लड़ाई में वह अपने पिता मेजर महताब सिंह और भाई बीरपाल सिंह के साथ अखनूर सेक्टर में मोर्चो पर थे। कमांड कर रहे अधिकारी ने यह कहा था कि तीनों एक साथ नहीं जाएंगे, लेकिन वह नहीं माने और लड़ाई में सबसे आगे रहे। 1962 की लड़ाई में उनके पिता मेजर महताब सिंह ने हिस्सा लिया था, उस समय वह अंडर ट्रेनिंग थे, ट्रेनिंग के दौरान भी उन्हें युद्ध के बारे में जानकारी दी जा रही थी।