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UP: हारी हुई सीटों को लेकर BJP ने बनाई रणनीति, रालोद के साथ से होगा लाभ; सपा के पीडीए फॉर्मूले को ऐसे देगी मात

Wed, 08 Jul 2026 10:31 AM IST
Sharukh Khan कुलदीप त्यागी, अमर उजाला, मेरठ
कुलदीप त्यागी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Sharukh Khan Updated Wed, 08 Jul 2026 10:31 AM IST
सार

पश्चिमी यूपी की हारी हुई सीटों को लेकर भाजपा ने रणनीति बनाई है। सपा के पीडीए फॉर्मूले को धरातल पर मात देने की पूरी तैयारी है। रालोद के साथ रहने से भाजपा को भी लाभ मिलेगा। भाजपा रिकॉर्ड गन्ना भुगतान को भी मजबूती से पेश करेगी।

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BJP formulates strategy for seats lost in Western UP Gearing counter Samajwadi Party PDA formula on ground
up election 2027 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भाजपा अपनी सारी रणनीति 2027 के मिशन यूपी को लेकर बना रही है। सपा ने जिस पीडीए फॉर्मूले के सहारे 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को कई स्थानों पर रोक दिया था, उसे मात देने के लिए भाजपा रणनीति बना रही है। पीडीए की अहम घटक जातियों के नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण पद देकर भाजपा पश्चिमी यूपी की हारी हुई सीटों पर फिर से कमल खिलाने की रणनीति बना रही है। प्रदेश में किसानों को किए गए रिकॉर्ड गन्ना भुगतान को भी मजबूती से पेश किया जाएगा।
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मेरठ की चार सीटों पर भाजपा को मिली थी हार
मेरठ जिले की चार विधानसभा सीटों पर 2022 के चुनावों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। सरधना विधानसभा सीट पर चर्चित संगीत सोम को सपा-रालोद गठबंधन के अतुल प्रधान ने मात दी थी। सिवाल खास सीट पर भाजपा के मनिंदरपाल सिंह को सपा-रालोद के गुलाम मुहम्मद ने पटखनी दी। इसी तरह से मेरठ शहर सीट पर सपा-रालोद के रफीक अंसारी ने भाजपा उम्मीदवार कमलदत्त शर्मा को हराकर दूसरी बार जीत हासिल की।
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भाजपा की चौथी हार किठौर विधानसभा क्षेत्र में हुई। यहां पर सपा-रालोद के शाहिद मंजूर ने भाजपा प्रत्याशी सत्यवीर त्यागी को हराकर विधानसभा की कुर्सी हासिल की। अब इन हारी हुई सीटों पर फिर कमल खिलाने की भाजपा ने रणनीति बनाई है।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई सीटों पर नहीं खिला था कमल
शामली जनपद की तीन सीटों शामली, कैराना और थानाभवन में से एक भी सीट पर भाजपा नहीं जीत पाई। इसी तरह मुजफ्फरनगर की छह सीटों में से सदर सीट और खतौली पर भाजपा जीती। मीरापुर, पुरकाजी, चरथावल और बुढ़ाना सीट पर निवर्तमान सभी चारों विधायक हार गएा।

उप चुनाव में खतौली सीट भी भाजपा हार गई। सहारनपुर में भी भाजपा की दुर्गति हुई, सात सीटो में से वहां बेहट और सहारनपुर देहात सीट पर हार मिली। बागपत में छपरौली सीट पर भाजपा को हारी। इसी तरह मुरादाबाद मंडल के जिलों में भी भाजपा को कई सीटों पर करारी हार का सामना करना पड़ा। गाजियाबाद, हापुड़ व बुलंदशहर जिलों में भाजपा का सम्मान बचा था।

पीडीए फॉर्मूले को मात देने की तैयारी
भाजपा ने सपा के पीडीए फॉर्मूले को मात देने के लिए विशेष रणनीति बनाई है। गुर्जर जाति के नवाब सिंह नागर को भाजपा ने पश्चिम क्षेत्र का अध्यक्ष बनाकर ओबीसी समुदाय को बड़ा संदेश दिया है। जाट समाज से आने वाले पुराने कैडर के नेता चौधरी देवेंद्र सिंह को किसान मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर किसानों को साधने की कोशिश की गई है।

प्रदेश सरकार द्वारा पिछले नौ वर्षों में किसानों को किए गए रिकॉर्ड गन्ना भुगतान की उपलिब्ध को भी भुनाया जाएगा। इसके लिए विशेष रिपोर्ट तैयार करके किसानों के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं को भेजा जाएगा।

रालोद के साथ रहने से मिलेगा भाजपा को भी लाभ
2022 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। अब रालोद का भाजपा के साथ गठबंधन है और वह केंद्र व राज्य सरकार में भी शामिल है। रालोद अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह इस समय केंद्र सरकार में मंत्री है।

जाहिर है कि भाजपा के साथ गठबंधन का फायदा राष्ट्रीय लोकदल को तो मिलेगा ही, भाजपा को भी रालोद के साथ होने से सियासी लाभ होगा। रालोद के साथ से भाजपा को 2022 में हारी सीटों पर जीत हासिल होने की उम्मीद है। हालांकि सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला चुनाव से ऐन पहले ही तय होगा।

रालोद भी खुद को मजबूत करने में जुटा
चौधरी अजित सिंह के निधन के बाद रालोद की कमान पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की तीसरी पीढ़ी चौधरी जयंत सिंह के हाथ में है। ऐसे में जयंत सिंह ने रालोद को मजबूत करने का बीड़ा उठाया हुआ है। रालोद ने पंचायत चुनाव भी अकेले दम पर ही लड़ने की घोषणा की हुई है।

अब रालोद ने भाजपा से नाराज त्यागी समाज को भी साधने का प्रयास करके बड़ा सियासी संदेश दिया है। जेडीयू छोड़ने वाले वरिष्ठ नेता केसी त्यागी को रालोद संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाकर अहम संदेश दिया है। केसी त्यागी के पुत्र अमरीश त्यागी को रालोद ने युवाओं को जमीनी स्तर पर संगठन से जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी है। इससे पहले अमरीश त्यागी ने भाजपा के लिए भी चुनावी रणनीति बनाने में योगदान दिया।
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