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दूसरों का सुख देखकर दुखी होना अशांति का कारण : मुनि भाव भूषण
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर स्थित भव्य स्वर्णमयी त्रिमूर्ति जिनालय में विराजमान भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा के समक्ष आयोजित 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान में बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। भगवान शांतिनाथ का मोक्ष कल्याणक उत्साहपूर्वक मनाया गया।
मुख्य वेदी पर विराजमान त्रय तीर्थंकरों के जलाभिषेक से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने त्रिमूर्ति जिनालय में विधान की मांगलिक क्रियाओं के अंतर्गत दिग्बंधन, पात्र शुद्धि, जल शुद्धि और सकलीकरण की विधियां संपन्न कराई गईं। शांतिधारा की बोली प्रारंभ हुई। शांतिधारा करने का सौभाग्य चंद जैन, धनवती जैन, अंशुल, विराज, निकिता, नरेश जैन और उर्मिला जैन को प्राप्त हुआ।
प्रमुख पात्रों और पुण्यार्जकों का समिति की ओर से मंगल तिलक और माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। भगवान शांतिनाथ का मोक्ष कल्याणक धूमधाम से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान की विशेष पूजा-अर्चना कर सामूहिक रूप से निर्वाण लाडू समर्पित किए। निर्वाण लाडू समर्पित करने का सौभाग्य नरेश जैन और उर्मिला जैन को मिला।
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मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि संसार में मनुष्य अपने दुखों से उतना परेशान नहीं होता, जितना दूसरों के सुख को देखकर दुखी होता है। उन्होंने कहा कि आत्मा स्वभाव से शुद्ध और पवित्र है, लेकिन संसार के मोह, राग, द्वेष, ईर्ष्या और लालच के कारण जीव अशांति का अनुभव करता है। यदि व्यक्ति अपने कर्मों और उपलब्धियों में संतोष रखना सीख ले तो उसके जीवन में शांति और सुख का संचार हो सकता है।
उन्होंने कहा कि असंतोषी व्यक्ति को तीनों लोकों की अपार संपदा भी मिल जाए तो भी वह कभी सुखी नहीं हो सकता। त्याग, संतोष और आत्मचिंतन ही जीवन को सार्थक बनाते हैं। मुनि श्री ने श्रद्धालुओं के कल्याण की मंगलकामना करते हुए धर्म मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ की आराधना की और 120 अर्घ्य मंडप पर समर्पित किए।
इस मौके पर क्षेत्र अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, अजीत प्रसाद जैन, राजीव जैन, विधान संयोजक विजय कुमार जैन, सुशील कुमार जैन, कपिल जैन, मुकेश कुमार जैन, उमेश जैन, अतुल जैन सहित अन्य श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर स्थित भव्य स्वर्णमयी त्रिमूर्ति जिनालय में विराजमान भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा के समक्ष आयोजित 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान में बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। भगवान शांतिनाथ का मोक्ष कल्याणक उत्साहपूर्वक मनाया गया।
मुख्य वेदी पर विराजमान त्रय तीर्थंकरों के जलाभिषेक से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने त्रिमूर्ति जिनालय में विधान की मांगलिक क्रियाओं के अंतर्गत दिग्बंधन, पात्र शुद्धि, जल शुद्धि और सकलीकरण की विधियां संपन्न कराई गईं। शांतिधारा की बोली प्रारंभ हुई। शांतिधारा करने का सौभाग्य चंद जैन, धनवती जैन, अंशुल, विराज, निकिता, नरेश जैन और उर्मिला जैन को प्राप्त हुआ।
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प्रमुख पात्रों और पुण्यार्जकों का समिति की ओर से मंगल तिलक और माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। भगवान शांतिनाथ का मोक्ष कल्याणक धूमधाम से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान की विशेष पूजा-अर्चना कर सामूहिक रूप से निर्वाण लाडू समर्पित किए। निर्वाण लाडू समर्पित करने का सौभाग्य नरेश जैन और उर्मिला जैन को मिला।
मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि संसार में मनुष्य अपने दुखों से उतना परेशान नहीं होता, जितना दूसरों के सुख को देखकर दुखी होता है। उन्होंने कहा कि आत्मा स्वभाव से शुद्ध और पवित्र है, लेकिन संसार के मोह, राग, द्वेष, ईर्ष्या और लालच के कारण जीव अशांति का अनुभव करता है। यदि व्यक्ति अपने कर्मों और उपलब्धियों में संतोष रखना सीख ले तो उसके जीवन में शांति और सुख का संचार हो सकता है।
उन्होंने कहा कि असंतोषी व्यक्ति को तीनों लोकों की अपार संपदा भी मिल जाए तो भी वह कभी सुखी नहीं हो सकता। त्याग, संतोष और आत्मचिंतन ही जीवन को सार्थक बनाते हैं। मुनि श्री ने श्रद्धालुओं के कल्याण की मंगलकामना करते हुए धर्म मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ की आराधना की और 120 अर्घ्य मंडप पर समर्पित किए।
इस मौके पर क्षेत्र अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, अजीत प्रसाद जैन, राजीव जैन, विधान संयोजक विजय कुमार जैन, सुशील कुमार जैन, कपिल जैन, मुकेश कुमार जैन, उमेश जैन, अतुल जैन सहित अन्य श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।

प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद