मोदी लहर का जादू ही कहा जायेगा कि मेरठ सीट पर तमाम अंतर विरोध और विपरीत समीकरण के बावजूद भाजपा ने कड़े मुकाबले में जीत दर्ज की। पूर्व में मेरठ सीट पर सबसे बड़ी जीत का रिकार्ड बनाने वाले राजेंद्र अग्रवाल के साथ इस बार सबसे कम अंतर से जीत का रिकॉर्ड भी जुड़ गया। उन्होंने मात्र 4729 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। तीन घंटे चली हार-जीत की कशमकश के बीच आखिरी वक्त में किसी ने हाजी याकूब के जीतने की अफवाह फैला दी जिसके बाद उनके समर्थक जश्न मनाने लगे।
तस्वीरें: 'हार गए तो हार गए...' आपको जीत मुबारक, याकूब कुरैशी के जीतने की अफवाह उड़ते ही मना जश्न
दोपहर तक बढ़ने पिछड़ने का सिलसिला चलता रहा। शाम को भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल ने बढ़त बना ली और जीत हासिल की। अहम बात ये रही कि पिछले चुनाव में सभी विधानसभाओं से बढ़त बनाने वाले राजेंद्र अग्रवाल इस बार सिर्फ कैंट में मिली बढ़त के सहारे ही जीत हासिल कर सके। इस सीट पर बसपा से हाजी याकूब कुरैशी ने भाजपा को रोमांचकारी टक्कर दी।
मेरठ-हापुड़ सीट भाजपा के लिए सुरक्षित मानी जाती रही है। लेकिन इस बार सपा, बसपा और रालोद गठबंधन ने भाजपा के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। जिस तरह मुस्लिम-एससी मतदाताओं का बसपा प्रत्याशी के पक्ष में ध्रुवीकरण हुआ, उससे इस सीट पर एक नये समीकरण बन गए।
हाल ये रहा कि भाजपा हापुड़, किठौर, दक्षिण और शहर विधानसभा में बड़े अंतर से हारी। इन चारों विधानसभाओं में भाजपा की हार का अंतर एक लाख के आसपास था। लेकिन कैंट में मिली 1.02 लाख से ज्यादा की लीड और पोस्टल बैलेट से मिली बढ़त से राजेंद्र अग्रवाल मात्र 4729 वोटों से जीत हासिल कर पाए। मेरठ सीट पर मतदाताओं ने कांग्रेस को हाशिये पर रखा, जबकि 1989 से पहले इस सीट पर कांग्रेस का वर्चस्व रहता था। कांग्रेस को अब तक के सबसे कम वोट मिले। प्रत्याशी हरेंद्र अग्रवाल 34,479 वोट ही हासिल कर पाए।
हाजी याकूब के जीतने की अफवाह पर मनाया जश्न
मतगणना के दौरान शाम को यह अफवाह फैल गई कि गठबंधन के प्रत्याशी हाजी याकूब 2800 वोटों से जीत गए हैं। यह सुनना था कि जली कोठी, खैरनगर, बुढ़ाना गेट और भूमिया पुल पर ढोल बजने लगे। बसपा समर्थक आतिशबाजी करते हुए नारेबाजी करने लगे। बसपा के झंडे लेकर जुलूस निकालना शुरू कर दिया।