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मां के प्रति कृतज्ञ रहकर रखें सेवा भाव : सौरभ सागर
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- श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर असौड़ा हाउस में हुआ कार्यक्रम
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर असौड़ा हाउस में आयोजित वेदी शिलान्यास समारोह में आचार्य सौरभ सागर मुनिराज ने कहा कि मां के प्रति कृतज्ञ रहकर सेवा भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को श्रेष्ठ संस्कार देकर समाज को भी श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करना चाहिए।
समारोह में ओम एवं श्रुत स्कंध वेदियों का विधिवत शिलान्यास वैदिक एवं जैन परंपराओं के अनुसार किया गया। सभी मांगलिक द्रव्यों को वेदी की नींव में स्थापित कर विधिपूर्वक पूजन सम्पन्न हुआ। प्रतिष्ठित परिवारों ने मुख्य शिला, स्वर्ण शिला, रजत शिला, ताम्र शिला, पारे की स्थापना, अचल यंत्र, कलश, स्वास्तिक एवं अन्य मांगलिक सामग्रियों के माध्यम से अपनी श्रद्धा अर्पित की। मंदिर समिति ने सभी दानदाताओं एवं सहयोगियों का आभार जताया गया।
आचार्य सौरभ ने महान शक्ति मां और ॐ शब्द का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मां संपूर्ण सृष्टि की आधारशिला है। मां केवल एक शब्द नहीं बल्कि सृजन, वात्सल्य, त्याग और करुणा का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि आध्यात्मिक जगत में ओम एक ऐसा पवित्र मंत्र है जो पंच परमेष्ठी अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय एवं साधु का सार रूप है। यह आत्मा को शुद्धि, शांति एवं मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करता है। इस अवसर पर मंदिर परिसर में रमेश चंद जैन परिवार, नवीन जैन, विनोद जैन, दयांचल, रचित जैन, रमाकांत जैन, कमल जैन, अनुबंध जैन, पंकज जैन, सचिन जैन, उमेश जैन रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर असौड़ा हाउस में आयोजित वेदी शिलान्यास समारोह में आचार्य सौरभ सागर मुनिराज ने कहा कि मां के प्रति कृतज्ञ रहकर सेवा भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को श्रेष्ठ संस्कार देकर समाज को भी श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करना चाहिए।
समारोह में ओम एवं श्रुत स्कंध वेदियों का विधिवत शिलान्यास वैदिक एवं जैन परंपराओं के अनुसार किया गया। सभी मांगलिक द्रव्यों को वेदी की नींव में स्थापित कर विधिपूर्वक पूजन सम्पन्न हुआ। प्रतिष्ठित परिवारों ने मुख्य शिला, स्वर्ण शिला, रजत शिला, ताम्र शिला, पारे की स्थापना, अचल यंत्र, कलश, स्वास्तिक एवं अन्य मांगलिक सामग्रियों के माध्यम से अपनी श्रद्धा अर्पित की। मंदिर समिति ने सभी दानदाताओं एवं सहयोगियों का आभार जताया गया।
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आचार्य सौरभ ने महान शक्ति मां और ॐ शब्द का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मां संपूर्ण सृष्टि की आधारशिला है। मां केवल एक शब्द नहीं बल्कि सृजन, वात्सल्य, त्याग और करुणा का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि आध्यात्मिक जगत में ओम एक ऐसा पवित्र मंत्र है जो पंच परमेष्ठी अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय एवं साधु का सार रूप है। यह आत्मा को शुद्धि, शांति एवं मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करता है। इस अवसर पर मंदिर परिसर में रमेश चंद जैन परिवार, नवीन जैन, विनोद जैन, दयांचल, रचित जैन, रमाकांत जैन, कमल जैन, अनुबंध जैन, पंकज जैन, सचिन जैन, उमेश जैन रहे।