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Meerut: एनएच -58 पर घटे यात्री, 220 होटलों में धंधा मंदा, 17 करोड़ का कारोबार चार करोड़ पर सिमटा; ये है वजह

आशुतोष भारद्वाज, मेरठ Published by: Mohd Mustakim Updated Wed, 13 May 2026 03:30 PM IST
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सार

दिल्ली वाया बागपत होकर बने देहरादून हाईवे के कारण एनएच 58 पर यात्रियों की संख्या कम हो गई है। इस कारण होटलों व रेस्टोरेंट में कारोबार चौथाई रह गया है। इसके अलावा सिलिंडरों की दिक्कत होने से पहले से ही कारोबार को झटका लगा था। 

Meerut: Passengers decreased on NH-58, 220 hotels on the highway, business reduced
नेशनल हाईवे 58
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विस्तार

राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच -58) पर यात्रियों की आवाजाही में कमी की वजह से होटल कारोबार पिछले पांच साल में घटकर सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। बीते दो माह में 220 से अधिक ढाबों पर 17 करोड़ का औसत कारोबार सिमट कर चार करोड़ रह गया है। इसकी वजह दिल्ली वाया बागपत होकर बना देहरादून हाईवे हैं। इस हाईवे के कारण अब बड़ी संख्या में वाहन मेरठ शहर से होकर नहीं गुजर रहे हैं। इसका सीधा असर परतापुर से मोदीपुरम और दौराला क्षेत्र के होटल-ढाबों और छोटे रेस्टोरेंट पर पड़ा है।
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होटल रेस्तरां एसोसिएशन के महामंत्री विपुल सिंघल बताते हैं कि मेरठ राजमार्ग पर 220 से अधिक ढाबा और होटल प्रभावित हुए हैं। कारोबार में लगभग 45 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। वलीदपुर मामा ढाबा के संचालक अनिल के मुताबिक पहले छोटे ढाबों का मासिक कारोबार जहां चार से 10 लाख रुपये तक पहुंच जाता था, वहीं अब यह घटकर करीब दो से चार लाख रुपये के बीच रह गया है। 
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पंडित ढाबा के संचालक बंटी इसे लेकर चिंतित हैं। वह कहते हैं कि पहले देहरादून, हरिद्वार और उत्तराखंड जाने वाले अधिकांश यात्री मेरठ होकर गुजरते थे, ऐसे में अच्छा कारोबार होता था। लेकिन अब नए हाईवे के शुरू होने के बाद ट्रैफिक वैकल्पिक मार्ग पर चला गया है। इससे कारोबार प्रभावित हो गया है।
 

दिल्ली-हरिद्वार हाइवे की बाईं पटरी वाले होटल भी नहीं बचा पा रहे अस्तित्व
नेशनल हाईवे पर दिल्ली से हरिद्वार जाते समय 80 फीसदी ढाबे, होटल बाईं पटरी पर हैं। होटल संचालक शेखर भल्ला बताते हैं कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण सैलानियों की सोच का है। जब दिल्ली के लोग देहरादून के लिए जाते हैं तो खाते-पीते आराम से जाते हैं। छुट्टी खत्म होने के बाद घर लौटने की जल्दी होती है। ऐसे में होटल या ढाबों पर रुकते भी नहीं हैं।
 

होटलों पर बनी है सिलिंडर की समस्या
हाईवे पर बहुतायत होटलों में पीएनजी कनेक्शन हैं। झिलमिल होटल के साथ संचालक अंकित के मुताबिक कॉमर्शियल सिलिंडर की बहुत अधिक दिक्कत बनी हुई है। घरेलू उपयोग वाले सिलिंडर भी सीमित हैं। कार्य क्षमता घटी है। इसके साथ ही ग्राहकों की आवाजाही कम हो गई है।
 

पांच साल में ऊंचाई पर पहुंचकर लुढ़का कारोबार
वर्ष 2016 में कंकरखेड़ा हाईवे सहित परतापुर, दौराला में सीमित संख्या में होटल थे। 2019 तक होटलों की संख्या बढ़कर 50 से 100 तक हो जाने से यह कारोबार ऊंचाई तक पहुंच गया। होटल एसोसिएशन के महामंत्री विपुल सिंघल बताते हैं कि अब परतापुर से दौराला तक 220 से अधिक होटल हैं। ग्राहकों का होटल में फुटफॉल कम होने से कारोबार घट गया है।

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