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Meerut News: सच्चे दिल से तौबा करें, रमजान में अल्लाह की रहमत पाएं

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Mar 2026 08:24 PM IST
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Repent with a sincere heart and receive Allah's mercy in Ramadan
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सरधना। रमजान का महीना बरकतों और रहमतों से भरा होता है। दूसरे अशरे (11 से 20 तारीख तक) को खास तौर पर गुनाहों की माफी का समय माना जाता है। गरीब और जरूरतमंदों की मदद करना इस महीने में अल्लाह को बेहद पसंद है।
जामिया सबील उल फलाह के मोहतमिम मुफ्ती इसराइल ने बताया कि दूसरे अशरे (11-20 तारीख) में अल्लाह तआला बंदों के गुनाह माफ करते हैं, जिससे रोजेदार अपने गुनाहों से पाक हो सकते हैं। शहर काजी मुफ्ती शाकिर कासमी ने हदीस की रोशनी में बताया कि इंसान गुनाह करता है लेकिन बेहतरीन इंसान वही है जो सच्चे दिल से तौबा करता है और जन्नत की दुआ मांगें।
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हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि रमजान में रोजे रखना फर्ज है और तरावीह पढ़ना सुन्नत। तरावीह की दो अलग-अलग सुन्नतें हैं एक कुरान शरीफ का सुनना और दूसरा पूरे रमजान की तरावीह पढ़ना। उलमाओं का कहना है कि अगर कोई शख्स केवल 8-10 दिन की तरावीह पढ़कर पूरा सवाब हासिल करने की सोचता है तो वह गलत है। कुरान शरीफ सुनने के बावजूद बचे हुए 20 दिन की तरावीह की सुन्नत छूट जाती है। यदि किसी को रमजान के महीने में सफर करना जरूरी हो तो कम दिनों में शब-ए-तरावीह पढ़कर भी इस सुन्नत पूरी की जा सकती है।
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