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श्रद्धा से मिलती है आत्मिक शांति : भाव भूषण
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श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में श्री शांतिनाथ विधान के 33वें दिन 400 परिवारों ने की पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान महाअनुष्ठान के 33वें दिन करीब 400 परिवारों ने विधान कराया। श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चना कर विश्व शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
इस अवसर पर मुनि भाव भूषण महाराज ने श्रद्धालुओं को धर्मज्ञान देते हुए कहा कि भगवान शांतिनाथ और शांतिनाथ विधान का विशेष महत्व है। श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया विधान व्यक्ति के जीवन में आत्मिक शांति का संचार करता है। मानसिक अशांति और तनाव को दूर करने का माध्यम बनता है। उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति भौतिक संसाधनों में इतना उलझ गया है कि स्वयं के लिए समय नहीं निकाल पा रहा। भगवान जिनेंद्र की भक्ति से मन को स्थायी शांति प्राप्त होती है।
कार्यक्रम की शुरुआत मंत्रोच्चार के साथ भगवान जिनेंद्र के जलाभिषेक से हुई। इसके बाद पुनीत जैन, रजत जैन, सान्या जैन, मोनिका जैन, अर्हम जैन, छवि जैन और आदविक जैन को शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने अतिथियों और सहयोगियों का माला एवं मुकुट पहनाकर स्वागत किया। युवा विद्वान पं. आशीष जैन शास्त्री और दिलीप जैन शास्त्री ने विधि के अनुसार विधान की मंगल क्रियाएं संपन्न कराई।
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अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन, विजेता पुरस्कृत
ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने जैन धर्म के सिद्धांतों पर प्रवचन दिए। संध्याकालीन बेला में संगीतमय महाआरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। विजेताओं को नरेंद्र सिंह जैन और कुसुम जैन ने पुरस्कृत किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मंदिर समिति के पदाधिकारियों एवं समाज के गणमान्य लोगों का सहयोग रहा।
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान महाअनुष्ठान के 33वें दिन करीब 400 परिवारों ने विधान कराया। श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चना कर विश्व शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
इस अवसर पर मुनि भाव भूषण महाराज ने श्रद्धालुओं को धर्मज्ञान देते हुए कहा कि भगवान शांतिनाथ और शांतिनाथ विधान का विशेष महत्व है। श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया विधान व्यक्ति के जीवन में आत्मिक शांति का संचार करता है। मानसिक अशांति और तनाव को दूर करने का माध्यम बनता है। उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति भौतिक संसाधनों में इतना उलझ गया है कि स्वयं के लिए समय नहीं निकाल पा रहा। भगवान जिनेंद्र की भक्ति से मन को स्थायी शांति प्राप्त होती है।
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कार्यक्रम की शुरुआत मंत्रोच्चार के साथ भगवान जिनेंद्र के जलाभिषेक से हुई। इसके बाद पुनीत जैन, रजत जैन, सान्या जैन, मोनिका जैन, अर्हम जैन, छवि जैन और आदविक जैन को शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने अतिथियों और सहयोगियों का माला एवं मुकुट पहनाकर स्वागत किया। युवा विद्वान पं. आशीष जैन शास्त्री और दिलीप जैन शास्त्री ने विधि के अनुसार विधान की मंगल क्रियाएं संपन्न कराई।
अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन, विजेता पुरस्कृत
ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने जैन धर्म के सिद्धांतों पर प्रवचन दिए। संध्याकालीन बेला में संगीतमय महाआरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। विजेताओं को नरेंद्र सिंह जैन और कुसुम जैन ने पुरस्कृत किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मंदिर समिति के पदाधिकारियों एवं समाज के गणमान्य लोगों का सहयोग रहा।