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UP: कांग्रेस संग सपा लड़ेगी चुनाव, बदलेंगे सीटों के समीकरण; चुनाव में ये मुद्दे उठा सकती है समाजवादी पार्टी

अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 02 Jun 2026 10:36 AM IST
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सार

यूपी विधानसभा चुनाव में इस बार भी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस साथ मिलकर लड़ेंगे। टिकट बंटवारे को लेकर रणनीतिकारों ने मंथन शुरू कर दिया है। मेरठ जिले की सात में से दो सीटें कांग्रेस के खाते में जा सकती हैं। सपा चुनाव में ये मुद्दे उठा सकती है।

UP Assembly Election SP and Congress Set for Joint Fight New Equations Emerge
up assembly elections - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

समाजवादी पार्टी इस बार यूपी में विधानसभा चुनाव कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ेगी। हाल में ही लखनऊ में हुए अमर उजाला संवाद में दिए साक्षात्कार में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयान के बाद नए समीकरणों को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है। मेरठ में भी सीटों को लेकर हलचल शुरू हो गई है। 
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रणनीतिकारों का अनुमान है कि जिले की सात में से पांच या छह सीटें सपा और एक या दो सीटें कांग्रेस के खाते में जा सकती हैं। बीते लोकसभा चुनाव में 37 सीटों पर जीत का करिश्माई आंकड़ा खड़ा करने वाले सपा प्रमुख अखिलेश के दावे ध्यान खींचने वाले हैं। उन्होंने कहा था कि विपक्षी एकजुटता में सीटें नहीं बल्कि जीत उनका मुख्य फॉर्मूला है। सपा प्रमुख के इस एलान के बाद सियासी गलियारे, खासकर मेरठ जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मेरठ जिले के लिहाज से इस बार चुनावी मुद्दे बेहद जमीनी और तीखे हो सकते हैं।
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चुनाव में ये मुद्दे उठा सकती है सपा
पेपर लीक और युवाओं का भविष्य

मेरठ और आसपास के इलाकों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं की एक बड़ी तादाद है। रोजगार की कमी और निष्पक्ष परीक्षाएं न होने का मुद्दा।

 

किसानों की समस्याएं और गन्ना भुगतान
मेरठ बेल्ट में गन्ना किसानों की समस्याएं हमेशा से चुनाव की दिशा तय करती आई हैं। खाद-बीज के बढ़ते दाम, छुट्टा पशुओं से फसलों को नुकसान और मिलों में गन्ने के भुगतान में होने वाली देरी इस बार भी गठबंधन का मुद्दा बनेगी।

 
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सराफ, बुनकर और स्थानीय व्यापारी
मेरठ का सराफ, कपड़ा उद्योग और बुनकर समाज आर्थिक मोर्चे पर राहत की मांग करता रहा है। बिजली दरों में बदलाव और व्यापारिक सहूलियतों की कमी के चलते छोटे व्यापारियों में नाराजगी देखी जा रही है। इसे सपा कांग्रेस भुना सकते हैं।
   

पीडीए बनाम महंगाई 
सपा का पूरा फोकस पीडीए के साथ महंगाई पर आक्रामक होने की रही है। यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज को महंगाई के खिलाफ लामबंद करना।

 

मेरठ की सातों विधानसभा सीटों का समीकरण
मेरठ शहर:
यह सीट गठबंधन (विशेषकर समाजवादी पार्टी) की सबसे मुफीद सीटों में से है। यहां मुस्लिम और दलित मतदाताओं की अच्छी तादाद है। परंपरागत सीट सपा के खाते में ही रही है।

 

मेरठ कैंटः कैंट इलाका भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। यहां सवर्ण (वैश्य, पंजाबी, ब्राह्मण) और मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा मतदाताओं की संख्या अधिक है। यहां कांग्रेस की मजबूत दावेदारी है। 

 

मेरठ दक्षिण: यहां मुस्लिम, दलित, त्यागी, गुर्जर समाज के वोटर हार-जीत तय करते हैं। पीडीए फॉर्मूले को जमीन पर उतारने के लिए यह सीट सपा के खाते में जाने की उम्मीद है।

 

सरधना सीट
ठाकुर, मुस्लिम और गुर्जर बहुल यह सीट पश्चिमी यूपी की सबसे हॉट सीटों में शुमार रही है। इस सीट पर समाजवादी पार्टी का दबदबा रहा है। यहां से सपा के मौजूदा विधायक हैं।

 

हस्तिनापुर : अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित यह सीट ऐतिहासिक रूप से बेहद खास है। माना जाता है कि सूबे में सरकार उसी की बनती है जिसका विधायक हस्तिनापुर से जीतता है। 

 

किठौरः इस सीट पर मुस्लिम, त्यागी और गुर्जर मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। यह सीट पूरी तरह से समाजवादी पार्टी के पाले की मानी जाती है।

 

सिवालखासः यह सीट किसान और जाट-मुस्लिम राजनीति के इर्द-गिर्द घूमती है। रालोद के एनडीए में जाने के बाद सपा यहां किसी बड़े किसान या जाट चेहरे पर दांव लगा सकती है।
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