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Meerut News: पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय , बारिश से खिले किसानों के चेहरे

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 19 Mar 2026 03:05 AM IST
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Western disturbance active, rain brings smiles to farmers' faces
मेरठ..कंवलजीत..रात के समय हुई बारिश के दौरान बेगमपुल से गुजरते लोग......संवाद
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पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के साथ ही बुधवार की शाम हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। इसी के साथ मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली। बारिश होने से गर्मी से राहत मिली, साथ ही किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।
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तापमान आगामी 24 घंटे में कम हो जाएगा। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ ने असर दिखाना शुरू कर दिया। इसके चलते 19, 20 और 21 मार्च को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होगी। गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी आशंका जताई गई है। बारिश के इस दौर से दिन के तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। साथ ही हवा की गुणवत्ता में भी सुधार होने की उम्मीद है। चौधरी चरण सिंह विवि की मौसम वेधशाला पर दिन का अधिकतम तापमान 32.0 डिग्री व रात का न्यूनतम तापमान 17.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बुधवार को मेरठ का एक्यूआई 168 दर्ज किया गया। जबकि शहर में गंगानगर 169, जयभीम नगर 156, पल्लवपुरम 179, बेगमपुल 180, दिल्ली सड़क 185 दर्ज किया गया है। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही का कहना है कि 19 से शुरू हो रही बारिश का दौर 21 मार्च की दोपहर तक रहेगा। सबसे ज्यादा बारिश 20 मार्च को होगी और कुछ स्थानों पर तेज हवा के साथ ओलावृष्टि भी हो सकती है। बारिश से जहां फसलों को लाभ मिलेगा, वहीं अगर ओलावृष्टि होती है तो फसलों को नुकसान भी होने की संभावना है।
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दिन ढलते ही बदला मौसम, बारिश से फसलों को संजीवनी



मोदीपुरम। बुधवार देर रात शुरू हुई बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया। बुधवार को सुबह के समय तेज धूप निकली और हवा चली। लेकिन दिन ढलते ही मौसम ने करवट बदली और बारिश से मौसम सुहावना हो गया। बारिश ने किसानों को राहत दी। फरवरी से ही बढ़ते तापमान के कारण किसान चिंतित होने लगे थे। लेकिन बुधवार को बारिश से फसलों को नई ऊर्जा मिली है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरएस सेंगर ने बताया कि गेहूं, सरसों, चना और आलू की फसलों को इसका विशेष लाभ होगा। गेहूं दाना भरने की अवस्था में है, ऐसे में नमी मिलने से उत्पादन बढ़ने की संभावना है। वहीं सरसों और चने की फसल को भी फायदा मिलेगा। आलू की खुदाई से पहले हुई बारिश जमीन में नमी बनाए रखने में सहायक होगी। हालांकि तेज हवा और अधिक बारिश से फसलों के गिरने का खतरा भी बना रहता है, ऐसे में किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है।
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