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सिद्ध प्रभु की अर्चना सुखदायी होती है : मुनि भावभूषण
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- दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में सिद्धचक्र महामंडल विधान कराया
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में सिद्धचक्र महामंडल विधान श्रद्धा और भक्ति के साथ कराया गया। मुनि भावभूषण महाराज के सानिध्य में हुए धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे। मुनि भावभूषण ने कहा कि सिद्ध प्रभु की अर्चना सुखदायी होती है जबकि पद और प्रसिद्धि की कामना दुख का कारण बनती है।
विधान के दौरान शांतिधारा करने का सौभाग्य अरुण जैन, सुधीर जैन, सुभाष जैन एवं वीरेंद्र कुमार जैन सहित अन्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। विद्वान पंडित आशीष जैन शास्त्री ने महामंत्रों का वाचन कर अनुष्ठान को संपन्न कराया। उन्होंने बताया कि शांतिधारा से आधि-व्याधि एवं उपाधियों का नाश होता है और मन को शांति मिलती है।
मुनि भाव भूषण महाराज ने प्रवचन में कहा कि आत्मा के गुण सभी में समान हैं। अंतर केवल कर्मों का है। जब मनुष्य राग-द्वेष से मुक्त होकर आत्मबोध की ओर अग्रसर होता है तभी वह परमात्मा पद की ओर बढ़ता है। जिनेंद्र भगवान की भक्ति से सम्यक्त्व की निर्मलता और मन की पवित्रता बढ़ती है।
विधानाचार्य पंडित आशीष जैन शास्त्री ने मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराईं। सुसज्जित मंडल पर श्रद्धालुओं द्वारा 256 अर्घ्य अर्पित किए गए। आयोजन में विजय कुमार जैन, राकेश जैन, कुणाल जैन, प्रमोद जैन, आलोक जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं का सहयोग रहा। शाम को संगीतमय महाआरती और भजन संध्या का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालु भजनों पर झूमे। कार्यक्रम में अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन सहित अन्य पदाधिकारियों का सहयोग रहा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में सिद्धचक्र महामंडल विधान श्रद्धा और भक्ति के साथ कराया गया। मुनि भावभूषण महाराज के सानिध्य में हुए धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे। मुनि भावभूषण ने कहा कि सिद्ध प्रभु की अर्चना सुखदायी होती है जबकि पद और प्रसिद्धि की कामना दुख का कारण बनती है।
विधान के दौरान शांतिधारा करने का सौभाग्य अरुण जैन, सुधीर जैन, सुभाष जैन एवं वीरेंद्र कुमार जैन सहित अन्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। विद्वान पंडित आशीष जैन शास्त्री ने महामंत्रों का वाचन कर अनुष्ठान को संपन्न कराया। उन्होंने बताया कि शांतिधारा से आधि-व्याधि एवं उपाधियों का नाश होता है और मन को शांति मिलती है।
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मुनि भाव भूषण महाराज ने प्रवचन में कहा कि आत्मा के गुण सभी में समान हैं। अंतर केवल कर्मों का है। जब मनुष्य राग-द्वेष से मुक्त होकर आत्मबोध की ओर अग्रसर होता है तभी वह परमात्मा पद की ओर बढ़ता है। जिनेंद्र भगवान की भक्ति से सम्यक्त्व की निर्मलता और मन की पवित्रता बढ़ती है।
विधानाचार्य पंडित आशीष जैन शास्त्री ने मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराईं। सुसज्जित मंडल पर श्रद्धालुओं द्वारा 256 अर्घ्य अर्पित किए गए। आयोजन में विजय कुमार जैन, राकेश जैन, कुणाल जैन, प्रमोद जैन, आलोक जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं का सहयोग रहा। शाम को संगीतमय महाआरती और भजन संध्या का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालु भजनों पर झूमे। कार्यक्रम में अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन सहित अन्य पदाधिकारियों का सहयोग रहा।

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