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Mirzapur News: श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से मिलता है वात्सल्य का संदेश
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ड्रमंडगंज। क्षेत्र के बरबसा गहरवार स्थित आनंद कुटीर आश्रम में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक अनिल महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का रसपूर्ण वर्णन किया।
कहा-श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को देखने से प्रेम वात्सल्य और ईश्वर के प्रति श्रद्धा का संदेश मिलता है।
भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं निष्कपट प्रेम, वात्सल्य और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा का संदेश देती हैं। कथा वाचक ने बताया कि नंद-यशोदा के आंगन में बालकृष्ण की नटखट चेष्टाएं, माखन-चोरी, गोप-बालकों के साथ क्रीड़ाएं और ग्वालिनियों के प्रति उनका निश्छल स्नेह भक्तों के हृदय को आनंद और भक्ति से भर देता है। बालकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े पूतना-वध, शकटासुर-विनाश, तृणावर्त संहार और ऊखल-बंधन (दामोदर लीला) जैसे प्रसंगों का उल्लेख करते हुए महाराज ने बताया कि भगवान अपनी बाल लीलाओं के माध्यम से अधर्म का नाश और भक्तों की रक्षा करते हैं।
मार्मिक भागवत कथा के बीच भजन गायक वंश नारायण शुक्ल के मधुर भजनों को सुनकर श्रद्धालु भक्ति-रस में सराबोर होकर “राधे-श्याम” और “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोष करने लगे। अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
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कहा-श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को देखने से प्रेम वात्सल्य और ईश्वर के प्रति श्रद्धा का संदेश मिलता है।
भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं निष्कपट प्रेम, वात्सल्य और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा का संदेश देती हैं। कथा वाचक ने बताया कि नंद-यशोदा के आंगन में बालकृष्ण की नटखट चेष्टाएं, माखन-चोरी, गोप-बालकों के साथ क्रीड़ाएं और ग्वालिनियों के प्रति उनका निश्छल स्नेह भक्तों के हृदय को आनंद और भक्ति से भर देता है। बालकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े पूतना-वध, शकटासुर-विनाश, तृणावर्त संहार और ऊखल-बंधन (दामोदर लीला) जैसे प्रसंगों का उल्लेख करते हुए महाराज ने बताया कि भगवान अपनी बाल लीलाओं के माध्यम से अधर्म का नाश और भक्तों की रक्षा करते हैं।
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मार्मिक भागवत कथा के बीच भजन गायक वंश नारायण शुक्ल के मधुर भजनों को सुनकर श्रद्धालु भक्ति-रस में सराबोर होकर “राधे-श्याम” और “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोष करने लगे। अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।