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Mirzapur News: बड़ी कठिन है 'डगर' पांच मिनी सचिवालयों की
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मिर्जापुर। जिले में मिनी सचिवालयों को हाईटेक बनाने की कवायद की जा रही है। लेकिन 809 में से सिटी व छानबे ब्लाक के पांच ऐसी पंचायतें हैं जहां पहुंचने के लिए रास्ता ही नहीं है। पंचायत तक जाने के लिए ग्रामीणों को केवल मेड़ या फिर किसी कास्तकार की जमीन से होकर गुजरना पड़ रहा है।
सामान्य दिनों में तो लोग किसी तरह से पहुंच जाते हैं लेकिन बारिश के दिनों में वहां तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों की तरफ से कई बार रास्ते का मुद्दा उठाया गया, लेकिन आजतक कोई ठोस पहल नहीं की गई। हद तो तब है कि जब समय-समय पर होने वाले ग्राम चौपाल में आला अधिकारी भी पहुंचते हैं लेकिन इस तरफ किसी का भी ध्यान नहीं। इनमें तो कई तो ऐसे भी पंचायत भवन हैं जो जर्जर अवस्था में पहुंच गया है लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। रास्ते के अभाव में ग्रामीण शादी विवाह के मौसम में इसका सदुपयोग भी नहीं कर पा रहे।
केस-1
फसलों से होकर जाना मजबूरी, दरकीं दीवारें
जिगना। छानबे ब्लॉक में ग्राम सचिवालय कुरौठी पांडेय जहां तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं है। ग्रामीणों को मेड़ या फिर बोई गई फसलों के बीच से होकर पहुंचना पड़ रहा है। जर्जर अवस्था में पहुंच चुके पंचायत भवन का रंग रोगन और सफाई कर पंचायतकर्मी उसमें बैठक कर अपना कामकाज निपटा रहे। पंचायत भवन के चारों तरफ़ खेत है। 500 मीटर तक मेड़ या बोई गई फसलों के बीच से होकर पंचायत भवन तक जाना होता है। पंचायत भवन में छत में सरिया दिखाई दे रही हैं इसकी दीवारें तक दरक चुकी है। ग्राम प्रधान दिवाकर सिंह का कहना है कि भवन काफी पहले से बना हुआ है। चारों तरफ काश्तकारों की जमीन है।
काश्तकारों की जमीन रास्ते के निर्माण में डाल रहे रोड़ा
सिटी ब्लॉक क्षेत्र के खजुरी गांव में पंचायत भवन पहुंचने के लिए काश्तकारों की जमीन रोड़ा पड़ रहा है। रास्ते के अभाव में वाहन मुख्य रोड पर खड़ाकर अधिकारियों सहित ग्रामीणों को पैदल पंचायत भवन तक पहुंचना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नहर में पानी आने अथवा बारिश के दौरान यहां तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद अभी तक रास्ते का निर्माण नहीं हुआ। ब्लॉक के अधिकारी समस्या का हल निकालें।
देवापुर पचवल में भी मिनी सचिवालय तक नहीं है रास्ता
सिटी ब्लॉक क्षेत्र के देवापुर पचवल में भी मिनी सचिवालय तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है। गांव में बने इंटरलॉकिंग मार्ग से 40 से 50 मीटर दूर किसी दूसरे काश्तकार की जमीन बताई जा रही है। सामान्य दिनों में तो लोग यहां तक पहुंच जाते हैं। यदि मामूली बारिश हो जाए तो फिर मार्ग कीचड़ से सन जाने से लोगों का पहुंचना मुश्किल हो रहा है। बावजूद इसके रास्ते के निर्माण के लिए कोई ठोस पहल न होने से ग्रामीणों में रोष है।
केस- 4
लोहंदीखुर्द में पंचायत भवन कोटे की दुकान तक नहीं है रास्ता
सिटी ब्लाक क्षेत्र के लोहंदीखुर्द में पंचायत भवन के साथ ही कोटे की दुकान तक पहुंचने के लिए कोई सुलभ मार्ग नहीं है। ग्रामीणों को मेड़ के सहारे पहुंचना पड़ रहा है। पंचायत भवन का निर्माण तो हो गया लेकिन रास्ते के लिए कोई ठोस इंतजाम न होने से यह ग्रामीणों के लिए निष्प्रायोज्य साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन ठोस पहल कर रास्ते का निर्माण कराए इससे इसकी उपयोगिता सिद्ध हो सके। पंचायत भवन का ठीक ढंग से रंगरोगन भी नहीं हुआ है। यहां साफ-सफाई का भी अभाव है।
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पंचायत भवनों तक पहुंचने के लिए सभी पंचायत में रास्ता बना हुआ है। यदि भूमि से जुड़ा मामला है और रास्ते का निर्माण नहीं हो पा रहा है तो संबंधित कास्तकारों से मिल बैठकर कोई हल निकाला जाएगा।-संतोष कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी।
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सामान्य दिनों में तो लोग किसी तरह से पहुंच जाते हैं लेकिन बारिश के दिनों में वहां तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों की तरफ से कई बार रास्ते का मुद्दा उठाया गया, लेकिन आजतक कोई ठोस पहल नहीं की गई। हद तो तब है कि जब समय-समय पर होने वाले ग्राम चौपाल में आला अधिकारी भी पहुंचते हैं लेकिन इस तरफ किसी का भी ध्यान नहीं। इनमें तो कई तो ऐसे भी पंचायत भवन हैं जो जर्जर अवस्था में पहुंच गया है लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। रास्ते के अभाव में ग्रामीण शादी विवाह के मौसम में इसका सदुपयोग भी नहीं कर पा रहे।
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केस-1
फसलों से होकर जाना मजबूरी, दरकीं दीवारें
जिगना। छानबे ब्लॉक में ग्राम सचिवालय कुरौठी पांडेय जहां तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं है। ग्रामीणों को मेड़ या फिर बोई गई फसलों के बीच से होकर पहुंचना पड़ रहा है। जर्जर अवस्था में पहुंच चुके पंचायत भवन का रंग रोगन और सफाई कर पंचायतकर्मी उसमें बैठक कर अपना कामकाज निपटा रहे। पंचायत भवन के चारों तरफ़ खेत है। 500 मीटर तक मेड़ या बोई गई फसलों के बीच से होकर पंचायत भवन तक जाना होता है। पंचायत भवन में छत में सरिया दिखाई दे रही हैं इसकी दीवारें तक दरक चुकी है। ग्राम प्रधान दिवाकर सिंह का कहना है कि भवन काफी पहले से बना हुआ है। चारों तरफ काश्तकारों की जमीन है।
काश्तकारों की जमीन रास्ते के निर्माण में डाल रहे रोड़ा
सिटी ब्लॉक क्षेत्र के खजुरी गांव में पंचायत भवन पहुंचने के लिए काश्तकारों की जमीन रोड़ा पड़ रहा है। रास्ते के अभाव में वाहन मुख्य रोड पर खड़ाकर अधिकारियों सहित ग्रामीणों को पैदल पंचायत भवन तक पहुंचना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नहर में पानी आने अथवा बारिश के दौरान यहां तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद अभी तक रास्ते का निर्माण नहीं हुआ। ब्लॉक के अधिकारी समस्या का हल निकालें।
देवापुर पचवल में भी मिनी सचिवालय तक नहीं है रास्ता
सिटी ब्लॉक क्षेत्र के देवापुर पचवल में भी मिनी सचिवालय तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है। गांव में बने इंटरलॉकिंग मार्ग से 40 से 50 मीटर दूर किसी दूसरे काश्तकार की जमीन बताई जा रही है। सामान्य दिनों में तो लोग यहां तक पहुंच जाते हैं। यदि मामूली बारिश हो जाए तो फिर मार्ग कीचड़ से सन जाने से लोगों का पहुंचना मुश्किल हो रहा है। बावजूद इसके रास्ते के निर्माण के लिए कोई ठोस पहल न होने से ग्रामीणों में रोष है।
केस- 4
लोहंदीखुर्द में पंचायत भवन कोटे की दुकान तक नहीं है रास्ता
सिटी ब्लाक क्षेत्र के लोहंदीखुर्द में पंचायत भवन के साथ ही कोटे की दुकान तक पहुंचने के लिए कोई सुलभ मार्ग नहीं है। ग्रामीणों को मेड़ के सहारे पहुंचना पड़ रहा है। पंचायत भवन का निर्माण तो हो गया लेकिन रास्ते के लिए कोई ठोस इंतजाम न होने से यह ग्रामीणों के लिए निष्प्रायोज्य साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन ठोस पहल कर रास्ते का निर्माण कराए इससे इसकी उपयोगिता सिद्ध हो सके। पंचायत भवन का ठीक ढंग से रंगरोगन भी नहीं हुआ है। यहां साफ-सफाई का भी अभाव है।
पंचायत भवनों तक पहुंचने के लिए सभी पंचायत में रास्ता बना हुआ है। यदि भूमि से जुड़ा मामला है और रास्ते का निर्माण नहीं हो पा रहा है तो संबंधित कास्तकारों से मिल बैठकर कोई हल निकाला जाएगा।-संतोष कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी।