फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Intestines exposed, unable to feed... Newborn's life saved after 85 days of intravenous nutrition.

आंतें बाहर-दूध पीना बंद: 85 दिन नसों के सहारे बचाई नवजात की जान, 94 दिन चला इलाज; तीन जटिल सर्जरी भी हुई

Mon, 27 Jul 2026 02:34 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: मुरादाबाद ब्यूरो Updated Mon, 27 Jul 2026 02:34 AM IST
सार

मुरादाबाद में हैरान करने वाला मामला सामने आया है। 1.8 किलो वजन के समय से पहले जन्मे नवजात की आंतें पेट के बाहर थीं और भोजन का रास्ता बंद था। निजी अस्पताल में 94 दिन इलाज, तीन सर्जरी और 85 दिन तक नसों से पोषण देकर डॉक्टरों ने बच्चे को नई जिंदगी दी। इलाज के बाद नवजात स्वस्थ होकर घर लौट गया।

विज्ञापन
Intestines exposed, unable to feed... Newborn's life saved after 85 days of intravenous nutrition.
बच्चे की चिकित्सकों ने बचाई जान - फोटो : संवाद

विस्तार

समय से करीब डेढ़ माह पहले जन्मे महज 1.8 किलो वजन के एक नवजात की लगभग पूरी आंतें पेट के बाहर थीं। इतना ही नहीं, भोजन का रास्ता भी पूरी तरह बंद था। हालत इतनी गंभीर थी कि बचने की उम्मीद बेहद कम मानी जा रही थी। ऐसे में डॉक्टरों की टीम ने लगातार 94 दिन तक इलाज, तीन जटिल सर्जरी और 85 दिन तक नसों के जरिए पोषण देकर नवजात को नई जिंदगी दी।

विज्ञापन


कायरॉन चिल्ड्रन्स सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल का दावा है कि इस स्तर की जटिल बीमारी में सफल इलाज का ऐसा मामला भारत में अब तक दर्ज नहीं हुआ है। पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. वाईके पुनिया ने बताया कि नवजात कॉम्प्लिकेटेड गैस्ट्रोस्किसिस नाम की दुर्लभ जन्मजात बीमारी से पीड़ित था।
विज्ञापन


इस बीमारी में बच्चे की आंतें पेट के बाहर विकसित हो जाती हैं। इस मामले में स्थिति और भी गंभीर थी, क्योंकि आंतों के साथ एट्रेशिया यानी आंत का एक हिस्सा बंद भी था। इसके कारण इलाज और सर्जरी दोनों बेहद चुनौतीपूर्ण हो गए थे। डॉ. पुनिया के अनुसार बच्चे का जन्म समय से लगभग छह सप्ताह पहले हुआ था।
विज्ञापन
विज्ञापन


बीमारी की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञों की टीम ने चरणबद्ध उपचार शुरू किया। करीब तीन महीने तक बच्चे को मुंह से कुछ भी नहीं खिलाया जा सका। शरीर की पोषण संबंधी सभी जरूरतें विशेष सेंट्रल लाइन के माध्यम से पूरी की गईं। लगातार 85 दिनों तक टोटल पैरेंट्रल न्यूट्रिशन (टीपीएन) के जरिए नसों से पोषण दिया गया।


इस दौरान संक्रमण से बचाव, पोषण बनाए रखना और बच्चे की सामान्य वृद्धि तय करना सबसे बड़ी चुनौती रही। इलाज के दौरान नवजात की तीन बड़ी और अत्यंत जटिल सर्जरी की गईं। आखिरकार 94 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर भेज दिया गया। बच्चे के पिता मुरादाबाद निवासी सलाहुद्दीन अकील बैंगलुरु में व्यवसाय करते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed