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UP: विधायक कमाल अख्तर को मंहगी पड़ी रुचि वीरा से अदावत? अखिलेश यादव से मुलाकात के चार दिन बाद चली गई कुर्सी
Wed, 01 Jul 2026 12:16 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 01 Jul 2026 12:16 PM IST
सार
मुरादाबाद के कांठ से समाजवादी पार्टी के विधायक कमाल अख्तर ने विधानसभा में सपा विधायक दल के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया है। राजनीतिक हलकों में इसे सांसद रुचि वीरा और कमाल अख्तर के बीच चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।
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Kamal Akhtar
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सूत्रों के अनुसार, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर कमाल अख्तर ने मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दिया। चार दिन पहले 26 जून को लखनऊ में अखिलेश यादव ने मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा और कमाल अख्तर को अलग-अलग बुलाकर बातचीत की थी।
इस दौरान राज्यसभा सदस्य जावेद अली, पूर्व विधायक यूसुफ अंसारी और सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव भी मौजूद रहे थे। पीडीए सम्मेलन के बाद उपजे विवाद को लेकर पार्टी नेतृत्व ने पूरे प्रकरण की जांच कराने और उसके बाद उचित कार्रवाई का भरोसा दिया था।
बताया जा रहा है कि विवाद उस समय और बढ़ गया था, जब सांसद प्रतिनिधि खुशनूद अली को लेकर दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच भी बयानबाजी तेज हो गई थी। कमाल अख्तर ने सोशल मीडिया पर इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष के हर निर्णय का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का जो भी आदेश होगा, उसका पालन करेंगे।
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इस दौरान राज्यसभा सदस्य जावेद अली, पूर्व विधायक यूसुफ अंसारी और सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव भी मौजूद रहे थे। पीडीए सम्मेलन के बाद उपजे विवाद को लेकर पार्टी नेतृत्व ने पूरे प्रकरण की जांच कराने और उसके बाद उचित कार्रवाई का भरोसा दिया था।
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बताया जा रहा है कि विवाद उस समय और बढ़ गया था, जब सांसद प्रतिनिधि खुशनूद अली को लेकर दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच भी बयानबाजी तेज हो गई थी। कमाल अख्तर ने सोशल मीडिया पर इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष के हर निर्णय का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का जो भी आदेश होगा, उसका पालन करेंगे।
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वहीं, सांसद रुचि वीरा ने कहा कि उन्होंने पूरे मामले से राष्ट्रीय अध्यक्ष को अवगत करा दिया था। अब जांच और आगे की कार्रवाई का निर्णय पार्टी नेतृत्व को करना है। मुख्य सचेतक पद से कमाल अख्तर के इस्तीफे के बाद मुरादाबाद की सपा राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक जानकार इसे संगठन में अनुशासन बनाए रखने और जिले की अंदरूनी गुटबाजी पर नियंत्रण की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
कमाल अख्तर और रुचि वीरा की सियासी अदावत उजागर
मुरादाबाद की राजनीति में कमाल अख्तर और रुचि वीरा के बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता चल रही है। कमाल अख्तर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं, जबकि रुचि वीरा को आजम खां का करीबी माना जाता है। आजम की पैरवी पर ही रुचि वीरा को मुरादाबाद से लोकसभा सीट से टिकट मिला था और वह सांसद बनी थीं।
मुरादाबाद की राजनीति में कमाल अख्तर और रुचि वीरा के बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता चल रही है। कमाल अख्तर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं, जबकि रुचि वीरा को आजम खां का करीबी माना जाता है। आजम की पैरवी पर ही रुचि वीरा को मुरादाबाद से लोकसभा सीट से टिकट मिला था और वह सांसद बनी थीं।
दोनों नेताओं के बीच यह प्रतिद्वंद्विता मुरादाबाद पर अपनी पकड़ बनाए रखने की जंग के कारण है। हाल ही में उनकी अदावत खुलकर सामने आ गई। यह तब हुआ जब मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी की पीडीए पंचायत का आयोजन किया गया। इस पंचायत का आयोजन कमाल अख्तर ने कराया था।
कार्यक्रम में उन नेताओं को बुलाया गया था जो आजम खां और रुचि वीरा के खिलाफ रहते हैं। राज्यसभा सांसद जावेद अली खान भी इसमें शामिल हुए थे। उन्होंने रुचि वीरा को टिकट दिए जाने का खुलकर विरोध किया था और आजम खां पर निशाना साधा था।
शिकायत और कार्रवाई
रुचि वीरा को इस पीडीए पंचायत में न तो बुलाया गया था। कार्यक्रम में लगाए गए पोस्टर में भी उनकी तस्वीर नहीं थी। इस बात की शिकायत सांसद रुचि वीरा ने पार्टी मुखिया अखिलेश यादव और आजम खां तक पहुंचाई। इस शिकायत के बाद मामले में कार्रवाई हुई।
रुचि वीरा को इस पीडीए पंचायत में न तो बुलाया गया था। कार्यक्रम में लगाए गए पोस्टर में भी उनकी तस्वीर नहीं थी। इस बात की शिकायत सांसद रुचि वीरा ने पार्टी मुखिया अखिलेश यादव और आजम खां तक पहुंचाई। इस शिकायत के बाद मामले में कार्रवाई हुई।
यह निर्णय पार्टी के राष्ट्रीय स्तर से लिया गया है। इस मामले में जिला स्तर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। शीर्ष नेतृत्व का जो आदेश होता है, वह सभी को स्वीकार होता है। - जयवीर यादव, जिलाध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
मुझे नहीं पता कि लोग इस निर्णय को पुराने मामलों से जोड़कर क्यों देख रहे हैं। मैं बस इतना ही कहूंगी कि चुनाव सिर पर हैं, हमें भाजपा से मुकाबला करना है। शीर्ष नेतृत्व बेहतर जानता है कि कौन कहां क्या भूमिका बेहतर निभा सकता है। - रुचि वीरा, सांसद, समाजवादी पार्टी